Search Icon
Nav Arrow

पुराने अख़बारों के इस्तेमाल से कैसे सजाए घर, सीखिए नासिक की इस गृहणी से!

Advertisement

टेलीविज़न और स्मार्टफोन की इस दुनिया के आने से पहले, ज़्यादातर लोगों का दिन सुबह का अख़बार आने से शुरू हुआ करता था। पर आज टेक्नोलॉजी के चलते अख़बार के पाठकों की संख्या पिछले कुछ सालों में घटी है, फिर भी भारत उन देशों में से एक है जहां आज भी लोग अख़बार खरीदते हैं।

मुझे आज भी याद है कैसे हमारे बचपन में अख़बार पढ़ना अच्छी आदतों में गिना जाता था और शायद इसीलिए मेरे पापा ने तीन अख़बारों का सब्सक्रिप्शन लिया हुआ था। और जब एक बार अख़बार को पढ़ लिया जाता था तो उसके बाद इनका प्रयोग पैकिंग के लिए किया जाता या फिर बहुत बार घर के किसी कोने में ये तब तक पड़े रहते, जब तक किसी कबाड़ी से अच्छा मोल न मिल जाये।

पर क्राफ्ट के शौक़ीन लोगों के लिए अखबार ऐसा ज़रिया है जिससे वे बहुत अलग-अलग और क्रियात्मक चीज़ें कर सकते हैं।

और इन्हीं क्रिएटिव लोगों में शामिल होती हैं नासिक की मीना पाटनकर। उनकी बनाई गुड़िया और अन्य क्राफ्ट की चीज़ों को आप जब देखेंगे तो एक नज़र में पहचान ही नहीं पाएंगे कि इन्हें अख़बारों से बनाया गया है।

हमारे साथ देखिये मीना के कुछ हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स

पिछले एक दशक से आर्ट और क्राफ्ट कर रहीं मीना का रिश्ता इन कागजों से तब जुड़ा जब इनके बच्चे बड़े हो गए और पढ़ाई के लिए बाहर जाकर रहने लगे। द बेटर इंडिया को मीना बताती हैं, “जब मेरी बेटी अपनी उच्च शिक्षा के लिए बाहर गयी तब मुझे लगा कि मेरे पास बहुत खाली समय है। मेरे यहाँ बहुत सारे अख़बार इकट्ठा हुए पड़े थे और मैं इनसे कुछ करना चाहती थी।”

यह भी पढ़ें: कचरे से संगीत पैदा करते ‘धारावी रॉक्स बैंड’ के होनहार बच्चे!

पर सही मायनों में अख़बार को इस तरह इस्तेमाल करने की प्रेरणा उन्हें एक फेसबूक पोस्ट से मिली। किसी ने सिर्फ़ अख़बार का प्रयोग कर के एक फूलों का गुलदस्ता बनाया था और उसे फेसबुक पर पोस्ट किया। मीना याद करती हैं, “मैंने इंटरनेट पर तलाशना शुरू किया और मुझे ऐसे कई विडियो मिले जहां लोगों ने अख़बार से बहुट सुंदर चीज़ें बनाई थीं। कुछ लोग बहुत अच्छे से इन्हें बनाने का तरीका बताते थे और कुछ लोग नहीं बताते, फिर मैंने खुद अलग-अलग तकनीक ट्राई करना शुरू किया।”

Advertisement

हालांकि, यह सब पाँच साल पुरानी बातें हैं।

आज तो मीना की बनाई हुई अख़बार की गुड़िया शहर में काफ़ी प्रसिद्ध हैं और लोग अक्सर उनके पास ऑर्डर देने आते हैं।

मीना पाटनकर

वे बताती हैं कि वे इस तरह की गुड़िया स्टॉक में बनाकर नहीं रखतीं, बल्कि सिर्फ़ तभी बनाती हूँ जब कोई उन्हें ऑर्डर देता है। क्योंकि वो जो क्राफ्ट बनाती हैं, उसमें वे पेपर मैशे की जगह पेपर ट्यूब का इस्तेमाल करती हैं। और इस वजह से इनके प्रोडक्ट्स थोड़े नाजुक होते हैं और इसके रख-रखाव का ख़ास ध्यान रखना पड़ता है। और फिर इसे धूल से भी बचाना होता है।

मीना सिर्फ़ पेपर क्राफ्ट में ही नहीं, बल्कि गोंड और वरली कला में भी माहिर हैं। ये क्रियात्मक और रचनात्मकता प्रतिभा शायद इस परिवार की रगों में है क्योंकि मीना की दोनों बेटियाँ भी डिज़ाइन के क्षेत्र में है। उन्हें अपने पति और बच्चों की तरफ से हर तरह का सहयोग मिला है।

यह भी पढ़ें: सुरैया आपा – वे कारीगरों की उंगलियों में पिरोती हैं जादुई तिलिस्‍म!

बेशक, अख़बारों को रीसाइकल करने का इससे सुंदर तरीका शायद ही कुछ हो। यह रचनात्मक तो है ही, साथ ही, देखने में बहुत सुंदर है। हम मीना को शुभकामनाएं देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे इसी प्रकार इस सुंदर कार्य को आगे बढ़ाती रहेंगी।

अगर आप मीना से संपर्क करना चाहते हैं, तो आप उन्हे 8805916811 पर कॉल कर सकते हैं!

मूल लेख: लक्ष्मी प्रिया
संपादन: निशा डागर


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर भेज सकते हैं।

Advertisement
_tbi-social-media__share-icon