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दरामली : देश का पहला ‘कौशल्य गाँव’, जिसके विकास को देखने आते हैं देश-विदेश से लोग!

“देश- विदेश से लोग हमारे यहाँ घूमने और विकास का मुआयना करने आते हैं। शायद ही कोई दिन जाता होगा, जब बाहर से कोई हमारे यहाँ नहीं आता!”

यह किसी बड़े शहर के मेयर या सांसद का नहीं, बल्कि यह कहना है गुजरात के साबरकांठा जिले के दरामली गाँव की सरपंच हेतलबेन देसाई का।

लगभग 1550 की आबादी वाले इस गाँव में हर वह सुविधा है, जो आपको बड़े- बड़े शहरों में मिलेंगी। साफ़-सुथरी सड़कें, बिजली, वाई-फाई आदि से लेकर गाँव के अपने ग्रामहाट और गृहउद्योगों तक, शायद ही ऐसी कोई चीज़ हो, जो आपको इस गाँव में न मिले।

दरामली गाँव को स्वच्छता के साथ-साथ, देश का प्रथम ‘कौशल्य गाँव’ होने का सम्मान प्राप्त है, तथा अभी तक इस गाँव ने अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 24 अवार्ड जीते हैं!

पर गाँव की यह पूरी कायापलट सिर्फ़ एक-दो साल में नहीं हुई है। इस बदलाव की नींव, साल 2012 में खुद दरामली गाँव के निवासियों ने रखी थी। यह गाँव के लोगों का ही फ़ैसला था कि किसी शिक्षित व्यक्ति को सरपंच का उम्मीदवार बनाया जाये, और 2012 में उन्होंने गाँव के ही एक शिक्षित परिवार की बहु हेतल बेन को इस काम के लिए चुना!

हेतल बेन ने अपने शुरूआती दिनों के बारे में बात करते हुए बताया, “मैंने तभी ठान लिया था कि अगर मैं सरपंच बनीं, तो अपने गाँव का विकास ऐसे करुँगी कि बाहर से भी लोग हमारे यहाँ आयें और हमारे गाँव का नाम हर जगह सम्मान से लिया जाए। साथ ही, मैं चाहती थी कि लोगों को वह सब सुविधाएँ दूँ, जिनके लिए वे शहर जाते हैं, ताकि फिर कोई भी गाँव न छोड़े।”

 

बाहर से भी लोग इस गाँव की तरक्की देखने आते हैं

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आईये देखते हैं, वह कौनसे बदलाव थे, जिनकी वजह से यह गाँव, शहरों से भी बेहतर बन गया –

  1. गाँव में हरित क्रान्ति 

एक आदर्श गाँव की नींव वहां के लोगों की एकजुटता से होती है। इसके लिए किसी ऐसे काम को शुरू करना ज़रूरी था, जहाँ सभी का समान योगदान हो। इसलिए शुरुआत वृक्षारोपण से की गयी और आज इस गाँव में हरियाली और पर्यावरण को बनाये रखने के लिए ख़ास वृक्षारोपण मंडल है।

2. स्वच्छता पर ज़ोर

हरियाली के साथ-साथ गाँव की स्वच्छता पर भी पूरा ध्यान दिया गया। सड़कों की मरम्मत करवाने के अलावा, हर गली में स्ट्रीट लाइट्स लगवाई गयीं हैं। पूरी तरह से खुले में शौच-मुक्त यह गाँव, अन्य मुलभूत सुविधाओं के मामले में भी काफ़ी आगे है। गाँव में साफ़-सफ़ाई बरकरार रखने के लिए हर एक घर से कूड़ा- कचरा इकट्ठा करके, उसे गाँव के बाहर ख़ास तौर पर कचरा-प्रबंधन के लिए बनाये गये गड्डों में डालकर आने के लिए एक स्पेशल ट्रेक्टर लगवाया गया है। यदि कोई गाँव की स्वच्छता को भंग करता है, तो उनके खिलाफ़ कार्यवाही की जाती है।

“हमारे गाँव में सब एक-दूसरे की मदद करते हैं। बहुत-से विकास कार्यों में गाँव वाले भी आर्थिक सहायता देते हैं और हर त्यौहार पर पूरे गाँव की साफ़- सफ़ाई में साथ देकर श्रमदान भी करते हैं। शुरू-शुरू में गाँववालों को इस तरह के कामों के लिए आगे आने में झिझक होती थी, पर इसे खत्म करने के लिए सबसे पहले हम, ग्राम पंचायत के सभी कर्मचारी काम शुरू करते हैं। इसे देखकर बाकी लोग भी जुड़ जाते हैं,” हेतल बेन ने बताया।

3. स्वस्थ गाँव, श्रेष्ठ गाँव!

कुपोषण से मुक्त इस गाँव का अपना एक स्वास्थ्य केंद्र है और साथ ही ब्लड बैंक भी है, जहाँ नियमित रूप से गाँव के लोग रक्तदान करते हैं। स्वास्थ्य केंद्र में ख़ास तौर से एक महिला डॉक्टर को भी नियुक्त किया गया है।

4. कौशल्य से बढ़ी खुशहाली  

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गाँव का अपना ग्रामहाट है

इस गाँव में 21 सखी मंडल हैं। हर एक मंडल में 13- 20 महिलाएँ हैं, जिनके द्वारा आज गाँव में 21 गृहउद्योग चलाये जा रहे हैं, जिनमें साबुन बनाना, फिनाइल बनाना, मसाले बनाना, अचार उत्पादन जैसे काम शामिल हैं। इन गृहउद्योगों से गाँव की लगभग सभी महिलाएँ जुड़ी हुई हैं और इस तरह से गाँव में 100% रोज़गार है। साथ ही, गृहउद्योगों को बाज़ार देने के लिए गाँव में ही एक ग्रामहाट भी है। इसके अलावा गाँव के 10वीं और 12वीं पास बच्चों को कोई न कोई स्किल ट्रेनिंग करवाई जाती है, ताकि वे बेरोज़गार न रहें।

कौशल और रोजगार के क्षेत्र में मजबूत होने के कारण ही इस गाँव को गुजरात सरकार ने साल 2015 में ‘कौशल्य गाँव’ का सम्मान दिया गया था।

5. पंचायत का अनुशासन 

ग्राम पंचायत में कार्यरत हर एक व्यक्ति पूरी ज़िम्मेदारी से अपना काम करता है। सभी कर्मचारी हर रोज़ पंचायत ऑफिस आएं, इसके लिए बायोमेट्रिक मशीन लगवाई गयी है; जहाँ हर दिन उनकी हाजिरी होती है। सभी सदस्य बैठकर गाँव की समस्याओं पर चर्चा करते हैं और फिर गाँववालों के साथ विचार-विमर्श कर उस पर काम करते हैं।

गाँव के युवाओं से लेकर बुजूर्गों तक, ग्राम पंचायत में सबका योगदान होता है। कई मुद्दों पर बड़े-बूढ़े मार्गदर्शन करते हैं, वहीं युवाओं से भी पंचायत सलाह-मशवरा करती है। भारत की ‘श्रेष्ठ पंचायत’ होने का ख़िताब प्राप्त करने वाली यह पंचायत गाँधी जी के स्वशासन आदर्श पर काम करते हुए, गाँव के सभी छोटे-बड़े मुद्दों को गाँव में ही सुलझा लेने का पूरा प्रयास करती है। 

6. तकनीकी में किसी भी बड़े शहर से कम नहीं 

सुरक्षा के लिए गाँव में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरा लगे हैं और सभी के लिए वाई-फाई की भी सुविधा उपलब्ध है। गाँव की DRML के नाम से एक मोबाइल एप्लीकेशन भी है, जहाँ से भी आप यहाँ के गृहउद्योगों में बनने वाले उत्पाद खरीद सकते हैं। यह भी पढ़ें: एक घर जो एकत्रित करता है वर्षा का जल और उत्पादित करता है सौर ऊर्जा, आर्गेनिक भोजन और बायोगैस!

7. शिक्षा की राह

बच्चों के लिए विभिन्न तरह की गतिविधियाँ गाँव के सरकारी स्कूल में ही करवाई जाती हैं

इस गाँव में ‘ज्ञान प्रबंधन केंद्र’ के चलते, सभी लोगों को राज्य व केंद्र सरकार द्वारा चलायी जा रही सभी योजनाओं की जानकारी मिल रही है। इसके अलावा, गाँव के जो भी बच्चे सरकारी नौकरी करना चाहते हैं, उन्हें फॉर्म आदि निकलने पर पूरी जानकारी दी जाती है और साथ ही, गरीब बच्चों के फॉर्म्स की फीस का खर्च पंचायत देती है।

जल्द ही, गाँव का एक ख़ास अख़बार निकालने की तैयारी में भी हैं, जहाँ गाँववाले इस गाँव के विकास की हर ख़बर पढ़ पायेंगे। बेशक, गुजरात का यह गाँव, न सिर्फ़ देश के अन्य गांवों के लिए, बल्कि शहरों के लिए भी प्रेरणा है।

संपादन – मानबी कटोच 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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