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Naturally Cool House, Made Of Recycling Local Things, Wood & Roof Tiles

स्थानीय चीज़ों, लकड़ियों व रूफ टाइल को रीसायकल कर बने इस घर में नहीं पड़ती AC की ज़रूरत

आर्किटेक्ट नितिन एमएस और मनोज बडकिलया ने कर्नाटक में एक ऐसा सस्टेनबल घर बनाया है, जिसे स्थानीय सामग्री के साथ-साथ पुरानी लकड़ियों और रूफ टाइलों को रीसायकल करके बनाया गया है।

क्या आपने कभी सोचा है कि एक घर बनाने की कीमत क्या होती है? घर (Sustainable Construction) बनाने में पैसे तो खर्च होते ही हैं, साथ ही इसे बनाने में उपयोग की जाने वाली सामग्री से हमारे समाज, इकोलोजी और इकोनमी पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनिया भर में ऊर्जा से संबंधित कार्बन एमिशन में रेज़िडेन्शिअल प्रॉपर्टीज़ 17 से 21 प्रतिशत के बीच योगदान करती हैं।

मैसूर के रहनेवाले आर्किटेक्ट नितिन एमएस और मनोज बडकिलया इस समस्या से अच्छी तरह वाकिफ थे और इसका समाधान खोजते हुए दोनों ने ऐसे घर बनाने का फैसला किया, जिनमें पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाने वाली चीजों का इस्तेमाल हो।

नितिन और मनोज ने मिलकर ‘प्रांगण अर्थन आर्किटेक्चर’ नाम से एक संस्था की शुरुआत की है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके द्वारा बनाए जाने वाले घरों की दीवारें प्राकृतिक सामग्री, मिट्टी और मोल्डिंग ब्रिक्स से बनाई जाती हैं।  

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कहां से आया Sustainable Construction का आइडिया?

Bedroom and dining area.
Bedroom and dining area.

सस्टेनेबल घर (Sustainable Construction) बनाने के आइडिया के बारे में बात करते हुए नितिन बताते हैं कि यह सफर साल 2017 में शुरु हुआ, जब वह अपने बचपन के एक दोस्त से मिलने उनके घर मुंबई गए थे। नितिन अपने दोस्त से काम के बारे बात कर रहे थे। वहीं, उनके दोस्त ने बताया कि उनके पिता बीवी राव, अपने उड्डुपी में एक पारंपरिक घर बनाने की सोच रहे हैं।

अपने दोस्त और उनके पिता से बातचीत करते हुए नितिन को पता चला कि वे एक ऐसा घर बनाना चाहते हैं, जहां उनका पूरा परिवार एक साथ रह सके।

नितिन कहते हैं कि बीवी राव के लिए पहले उन्होंने मेडिटेरियन और ट्रॉपिकल झलक के साथ एक ग्रामीण घर बनाने का सोचा। लेकिन फिर और बाचतीच हुई, अंत में स्थानीय रूप से मिलने वाली चीज़ों का इस्तेमाल करते हुए पांच बेडरूम वाला एक घर डिजाइन किया गया।

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साल 2021 तक, 47 सेंट जमीन पर ‘उडुपी माने’ नाम का एक घर बनकर तैयार हुआ, जो शहर भर में एक अनूठी संपत्ति बन गया है। इस घर में पारंपरिक ग्रामीण जीवन का हर पहलू देखा जा सकता है।

सीमेंट और स्टील का इस्तेमाल कम से कम किया गया

इस घर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पारंपरिक घरों (Sustainable Construction) की तुलना में इसमें 95 प्रतिशत कम कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही गर्मियों के मौसम में इस घर में तापमान 4 डिग्री तक कम रहता है।

नितिन बताते हैं कि इस घर को केवल पारंपरिक लुक ही नहीं दिया गया है, बल्कि इसे बनाने में पारंपरिक तरीके भी अपनाए गए हैं। सीमेंट और स्टील का इस्तेमाल कम से कम किया गया है। साथ ही कोशिश की गई है कि ऐसी स्थानीय चीज़ों का इस्तेमाल किया जाए, जिससे कम से कम कार्बन निकले। इस घर में कटहल की लकड़ी और अफ्रीकी ट्यूलिप के साथ-साथ कई अन्य पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल किया गया है, जिसे रीसायकल किया जा सकता है।

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घर को बनाने के लिए लकड़ी का उपयोग रूफ सपोर्ट बीम, फ्रंट पोर्च कॉलम, कैबिनेट्स, फ्रेम और अन्य इलेक्ट्स बनाने के लिए किया गया है। नितिन बताते हैं कि घर बनाने में उपयोग की जाने वाली सभी लकड़ियां पुरानी इमारतों से ली गई हैं।

नए के मुकाबले पुरानी लकड़ियां क्यों होती हैं फायदेमंद?

रीसायकल की जा सकने वाली लकड़ियों को चुनने की वजह यह है कि जब पुरानी इमारतें टूटती हैं, तो उनकी लकड़ियों को या तो आग के लिए ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है या सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। दोनों ही मामलों में, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं। ऐसे में, अगर इन पुरानी लकड़ियों का फिर से इस्तेमाल किया जाए, तो काफी कुछ बदला जा सकता है। 

मनोज कहते हैं कि ये पुरानी लकड़ियां, नई लकड़ियों की तुलना में अधिक समय तक चलती हैं, क्योंकि इन्हें पर्याप्त रूप से परिपक्व पेड़ों से काटा जाता है, जिससे ये प्राकृतिक रूप से दीमक के प्रति प्रतिरोधी हो जाती हैं। साथ ही ये नए सागौन की लकड़ी खरीदने के मुकाबले सस्ती भी होती हैं। 

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Small windows for ventilation
Small windows for ventilation

लकड़ी का उपयोग पारंपरिक फ्लैट छत तैयार करने के लिए भी किया जाता है, जिसे स्थानीय रूप से कन्नड़ में ‘मुच्चीगे’ के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब ‘छत का घेरा’ होता है। इस घर (Sustainable Construction) में लकड़ियों का इस्तेमाल एक स्लैब बनाने के लिए भी किया गया, ताकि छत पर लगे मैंगलोर टाइल्स का भार को संभाला जा सके।

नए के बजाय पुरानी टाइल्स का किया गया इस्तेमाल

मनोज बताते हैं कि उन्होंने पहले से इस्तेमाल की गई टाइलों को प्राथमिकता दी, क्योंकि सफाई और फिर से रंगने में आने वाले खर्च की भी बचत हुई और पुरानी टाइलें, नए प्रोडक्ट के मुकाबले आधी कीमत पर भी मिल गईं।

इसके अलावा, नई तैयार टाइलों की तुलना में पहले से इस्तेमाल हुई टाइलें ज्यादा सख्त होती हैं, क्योंकि समय के साथ ये हर तरह के मौसम की स्थिति का सामना कर चुकी होती हैं और इनमें प्रतिरोध क्षमता विकसित होती है। साथ ही चीज़ों को रीसायकल करने से कार्बन फुटप्रिंट और एनर्जी लागत बचाने में भी मदद मिलती है।

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मनोज ने बताया कि स्टोन फाउंडेशन की चिनाई और लैटेराइट की दीवारें काजू के तेल, गुड़, नदी की रेत और चूने का उपयोग करके पारंपरिक नुस्खे के साथ चूने के मोर्टार से बनाई गई हैं।

घर के फर्श के लिए रेड ऑक्साइड का इस्तेमाल किया गया है, जो घर में एक पारंपरिक आकर्षण लाता है। घर के फर्नीचर, जैसे- सोफा, बैठने की जगह और डाइनिंग रूम अंदर बनाए गए हैं। मनोज कहते हैं कि “इन्हें बनाने के लिए पीले ऑक्साइड, जेड-हरे ऑक्साइड और चॉकलेट ब्राउन ऑक्साइड रंगों का इस्तेमाल किया गया है।”

इस Sustainable Construction में वेंटिलेशन का रखा गया है खास ध्यान

पलस्तर की हुई दीवारें, गर्मियों में भी घर को ठंडा रखने में मदद करती हैं। घर में इस्तेमाल किया गया चूना एक स्वस्थ व साफ वातावरण और इमारत को मजबूत बनाता है। घर की एक और खासियत वेंटिलेशन के लिए छोटी खिड़कियां लगाना है। इस बारे में बात करते हुए मनोज विस्तार से बताया कि उड्डुपी के ग्रामीण इलाकों में एक तरह का चकाचौंध नजर आता है। इसलिए उन्होंने बड़ी खिड़कियों के बजाय छोटी खिड़कियां लगाने का फैसला किया।

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इसके अलावा, गर्मी और ह्यूमिडिटी से बचने के लिए एक्टिव और पैसिव वेंटिलेशन पर भी ध्यान दिया। वेंटिलेशन प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए वह बताते हैं कि 80 प्रतिशत हवा जगह से ऊपर उठती है और सबसे ऊपरी पिरामिड छत के नीचे दिए गए छिद्रों से बाहर निकलती है।

वह कहते हैं, “सिस्टम पर्याप्त ताजी हवा और थर्मल कंफर्ट के प्रवाह को सुनिश्चित करता है। घर के दक्षिणी और पश्चिमी किनारों के साथ एक कॉरिडोर बनाया गया है, जो सख्त दक्षिण-पश्चिम सूरज की रोशनी से हीट बफर बनाता है। यह कॉरिडोर घर के पीछे बनाए गए बगीचे से भी जुड़ता है। यह घर और बगीचे के बीच एक लिंक बनाता है, जिससे ठंडी हवा का सर्कुलेशन होता है।”

किस तरह का अंतर महसूस कराता है यह घर?

Sustainable architecture traditional house
Sustainable architecture traditional house

मनोज ने बताया कि पारंपरिक घरों की तरह इस घर में कॉलम या बीम नहीं हैं। भार सहने योग्य एक स्थिर स्ट्रक्चर के लिए आर्च और कड़ीदार आर्च का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। मनोज बताते हैं कि आर्च में धीमे-धीमे लोड ट्रांसफर होता है, जो स्ट्रक्चर को मजबूत बनाता है।

इस सस्टेनेबल घर में रहनेवाले बीवी राव कहते हैं कि वह जीवन भर मुंबई में रहे और इसलिए वह भीषण गर्मी से डरते हैं। बीवी राव कहते हैं कि वह जलवायु परिवर्तन को रोकने में कुछ योगदान देना चाहते थे और इसलिए एक सस्टेनबल घर बनाना पसंद किया। वह कहते हैं कि पिछले एक साल में यहां रहते हुए उन्होंने कई सकारात्मक अंतर देखे हैं।

वह कहते हैं कि बाहर से घर (Sustainable Construction) के भीतर घुसते हुए प्राकृतिक ठंडक का एहसास हो जाता है। यह घर ठंडा और आरामदायक लगता है। घर के लिए किसी ग्रेनाइट या प्रॉसेस्ड सामग्री का उपयोग नहीं किया गया है। काफी हद तक इस घर में लगीं लगभग सारी चीजें प्राकृतिक और जैविक हैं।

मूल लेखः हिमांशु नित्नावरे

संपादनः अर्चना दुबे

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