मुंबई की मशहूर फूडचेन ‘जंबोकिंग बर्गर' के मालिक, धीरज गुप्ता बता रहे हैं, कैसे उन्होंने 'मेक इन इंडिया' पर ध्यान केंद्रित करते हुए, एक स्ट्रीटफूड वड़ा पाव को रीब्रांड किया और फूड बिजनेस में आगे बढ़े।
करोड़ों का राजस्व अर्जित करने वाली टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कंसल्टिंग फर्म ‘IPexcel’ की स्थापना के बाद, ओडिशा की मधुमिता अग्रवाल अब अपने पति दिनकर अग्रवाल के साथ, एक इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी ‘OBEN’ का नेतृत्व कर रही हैं।
बेंगलुरु की जिंसी सैमुअल ने खेती में बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के, अपनी छत पर हाइड्रोपोनिक और एक्वापोनिक विधि से 230 तरह की फल-सब्जियां उगाती है। साथ ही, झींगा तथा तिलापिया मछलियों का भी होता है प्रजनन।
डिब्रूगढ़, असम के रहने वाले 56 वर्षीय चाय किसान, दुर्लभ गोगोई ने 15 से ज्यादा फूड प्रोसेसिंग मशीनें बनाई हैं। जिनमें चाय, धान, हल्दी, अगर और अदरक जैसी फसलों को प्रोसेस करने वाली मशीनें शामिल हैं।
तमिलनाडु के तंजावुर में साल 1949 में बनी ‘बॉम्बे स्वीट्स’ नामक दुकान में, रोजाना लगभग चार हजार ग्राहक आते हैं। यहां 200 प्रकार की मिठाइयां और सात तरह के स्वादिष्ट स्नैक्स मिलते हैं।
केरल के कोल्लम जिले में कोट्टाराकरा के रहने वाले 41 वर्षीय डॉ. हरि मुरलीधरन, पिछले 10 सालों से अपने खेत में लगभग 800 विदेशी प्रजातियों के फलों के पेड़-पौधे उगा रहे हैं। जिनमें सॉनकोय, अलामा, यूगु, बिगनेय आदि शामिल हैं।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में रहने वाली 46 वर्षीया ऋतू सोनी, साल 2017 से अपनी छत पर बागवानी कर रही हैं और अपने ‘एबीसी ऑफ़ गार्डनिंग' यूट्यूब चैनल के जरिए, अपने 1.7 लाख से भी ज्यादा सब्सक्राइबर को बागवानी के गुर सिखा रही हैं।
कोलकाता की रहने वाली 65 वर्षीया मंजू देवी पोद्दार और उनकी 21 वर्षीया नातिन, याशी चौधरी ने अगस्त 2020 में अपने मिठाई बिज़नेस, 'नानीज़ स्पेशल' की शुरुआत की थी। जिससे उन्हें मात्र आठ महीने में, चार लाख रुपए की कमाई हुई है।
गुजरात के जूनागढ़ में पिखोर गाँव के रहने वाले, अमृत भाई अग्रावत (75) किसानों के लिए कई तरह के आविष्कार करके, उनकी समस्याओं को हल करते हैं। अपने इन्हीं कार्यों के लिए, उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं और उनके एक आविष्कार को पेटेंट भी मिला है।