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न मिट्टी, न भारी गमले, जानिए कैसे इस Potting Mix से छत पर उगाते हैं 30 से ज़्यादा सब्जियां

potting mix

जॉन शेरी, केरल के कृषि फार्म इनोवेशन ब्यूरो में असिस्टेंट डायरेक्टर हैं। चलिए उनसे जानें कि घर पर बिना मिट्टी के potting mix बनाकर, टमाटर, लोबिया, भिंडी, करेला, लौकी, मिर्च, बैंगन आदि कैसे उगा सकते हैं।

शहरी लोग अपने घरों की छत पर बागवानी करने के लिए, आजकल ‘ग्रो बैग’ का इस्तेमाल कर रहे हैं। किसी भी नर्सरी में, ग्रो बैग आसानी से मिल जाते हैं। ये प्लास्टिक के बड़े बैग जैसे होते हैं, जिनमें सब्जियां और दूसरे पौधों की जड़ें आसानी से विकसित हो पाती हैं। साथ ही, ये कम जगह में आसानी से लग भी जाते हैं।  हालांकि, इन ग्रो बैग को छत पर रखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है। इनमें हल्के वजन वाले पॉटिंग मिक्स (potting mix) जैसे- कोकोपीट के ऊपर लाल मिट्टी या मिट्टी की सबसे ऊपरी परत को चढ़ाना बहुत जरूरी होता है, ताकि तेज हवा चलने पर ये बैग उड़ न जाएं। 

एर्नाकुलम, केरल के कृषि फार्म इनोवेशन ब्यूरो के असिस्टेंट डायरेक्टर, जॉन शेरी कहते हैं, “इन दिनों कई शहरी परिवार अपनी छत पर बागवानी कर रहे हैं। वे मिट्टी की सबसे ऊपरी परत और लाल मिट्टी को इस्तेमाल में लेते हैं, इसलिए मिट्टी की उपजाऊ परत खराब होने लगती है।”  

उन्होंने न सिर्फ इस समस्या की पहचान की है, बल्कि इसका समाधान भी खोज निकाला है। उन्होंने चावल की भूसी का इस्तेमाल करके, मिट्टी के बिना एक पॉटिंग मिक्स (potting mix) तैयार किया है। इस पॉटिंग मिक्स से मिट्टी की उपजाऊ परत को खराब होने से रोकने में मदद मिल सकेगी। 

द बेटर इंडिया के साथ बात करते हुए, जॉन इस पॉटिंग मिक्स (potting mix) को बनाने का तरीका बताया। इसी पॉटिंग मिक्स में वह अपनी छत पर 30 प्रकार की सब्जियां उगाते हैं।

John Sherry

बिना मिट्टी की बागवानी  

अप्रैल 2020 में, जब जॉन के पास लॉकडाउन के कारण काफी खाली समय था, तब उन्होंने ग्रो बैग में सब्जियां उगाने का फैसला किया। वह बागवानी में लाल मिट्टी का इस्तेमाल नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने चावल की भूसी के साथ प्रयोग किया, जिसे आमतौर पर कचरा समझ कर फेंक दिया जाता है।
जॉन कहते हैं, “भूसी से छुटकारा पाने के लिए, किसान अक्सर इसे जला देते हैं।” भूसी में सिलिका, कार्बन, कैल्शियम और मैग्नीशियम ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। भूसी के इन्हीं गुणों के कारण, उन्होंने इसका इस्तेमाल बागवानी में करने का फैसला किया। 

भूसी, ग्रो बैग को सख्त बनाती है। भूसी की वजह से, पॉटिंग मिक्स (potting mix) को अच्छे से हवा मिलती रहती है और इसमें कीड़े भी नहीं लगते। इस तरीके को अपनाने से अच्छी उपज भी मिलती है। फ़िलहाल, जॉन अपनी 140 वर्ग फुट की छत पर टमाटर, लोबिया, भिंडी, करेला, लौकी, मिर्च, बैंगन जैसी 30 सब्जियां उगाते हैं। 

वह बताते हैं, “यह तरीका काफी अच्छा है, क्योंकि इसमें सूरज की रोशनी सही रूप से सभी पौधों तक पहुँचती है और छत पर पड़ने वाली धूप का पूरी तरह से इस्तेमाल हो पाता है। साथ ही, ग्रो बैग के हल्के होने की वजह से छत पर भार भी काफी कम हो जाता है, जिससे कॉन्क्रीट की छत या घर को कोई नुकसान नहीं पहुँचता।”

अगर आप भी पौधों को उगाने के लिए, इस पॉटिंग मिक्स (potting mix) को घर पर बनाना चाहते हैं, तो नीचे पढ़िए इसे बनाने का तरीका –

भूसी से पॉटिंग मिक्स बनाने का तरीका  

इसके लिए, आपको गाय के गोबर का पाउडर, नारियल की भूसी से बनी खाद, चावल की भूसी और चावल की भूसी की राख की जरूरत होगी।

 स्टेप 1: चावल की भूसी और चावल की भूसी की राख को 1:1 के अनुपात में मिलाएं।

स्टेप 2: ग्रो बैग में सबसे पहले चावल की भूसी के मिक्स की एक परत डालें।

Rice husk for potting mix
चावल की भूसी और चावल की भूसी की राख

स्टेप  3: फिर, नारियल की भूसी से बनी खाद डालें।

स्टेप 4: इसके बाद फिर से, चावल की भूसी के मिक्स की एक परत डालें। 

स्टेप 5: इसके ऊपर, चार इंच सूखे गोबर का पाउडर डालें।

Soil less potting mix
सूखे गोबर का पाउडर

स्टेप  6: इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं, जब तक कि बैग का 3/4 (तीन-चौथाई) भाग भर न जाए।

(potting mix)
ग्रो बैग के 3 /4 भाग में पॉटिंग मिक्स

भरे हुए ग्रो बैग को प्लास्टिक ट्रे में रखा जाता है, जो पानी से भरा होता है। जब पॉटिंग मिक्स (potting mix) में पानी की मात्रा कम हो जाती है, तब यह ट्रे से पानी सोखता है।   

पॉटिंग मिक्स (potting mix) को अधिक पोषक बनाने के लिए, जॉन गाय के गोबर का पतला घोल बनाने की सलाह देते हैं। वह कहते हैं कि घोल बनाने के लिए, 1:10 के अनुपात में पानी और गोबर को मिलाकर, गोबर का 10 लीटर घोल बनाएं। साथ ही, घोल में 50 ग्राम पोटाश मिलाकर, इसे हर सोमवार को सभी ग्रो बैग में डालें। 

इस तरह, आप बड़े ही आसान तरीके से ग्रो बैग में बिना मिट्टी का इस्तेमाल किये, अपनी पसंद की सब्जियां और पौधें उगा सकते हैं।

मूल लेख: रौशनी मुथुकुमार

संपादन – प्रीति महावर

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