गोबर से चप्पल, लोगो, नेम प्लेट जैसी चीज़ें बनाना शुरू कर, कई महिलाओं व किसानों को दिया काम

Neeraj Started making slippers, logos, name plates from cow dung

उत्तराखंड के रहनेवाले नीरज पिछले छह सालों से ‘श्री बंसी गौ धाम’ नाम से अपना बिज़नेस चलाते हैं और गोबर का इस्तेमाल कर ढेर सारे प्रोडक्ट्स बनाकर बेच रहे हैं।

गोबर से खाद तो आपने कई बार बनाई होगी। एक समय था जब लोग गोबर से घर की लिपाई किया करते थे और अब तो इससे पेंट भी बनाया जाने लगा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोबर से बने प्रोडक्ट्स, जैसे- चप्पल, लोगो, नेम प्लेट और दीये जैसी चीज़ें भी बाज़ार में आ गई हैं?

उत्तराखंड के काशीपुर के रहनेवाले नीरज चौधरी, गोबर से तरह-तरह की ईको-फ्रेंडली डेकोरेटिव चीज़ें बना रहे हैं। नीरज, पिछले छह सालों से ‘श्री बंसी गौ धाम’ नाम से अपना बिज़नेस चलाते हैं और गोबर का इस्तेमाल कर ढेर सारे प्रोडक्ट्स बनाकर बेच रहे हैं। 

वह गोबर को सुखाकर, उसके पाउडर से ये चीज़ें बनाते हैं और फिर इन्हें पपीते के दूध या अलसी के तेल से पॉलिश करते हैं। द बेटर इंडिया से बात करते हुए नीरज ने बताया, “गाय का गोबर एक ऐसी चीज़ है, जो साल के बारहो महीने हमें आसानी से मिल सकती है, इसीलिए यह काम शुरू करने के लिए कच्चे माल के रूप में हमने गोबर का इस्तेमाल किया।”

Neeraj Chaudhary
Neeraj Chaudhary

उन्होंने आगे बताया, “हम सबसे पहले गोबर को प्रॉसेस करते हैं, फिर उसे सुखाया जाता है और चक्की में पिसाई की जाती है। इसके बाद, तरह-तरह के सांचों में ढलाई करके उसमें लगभग दस प्रतिशत या पंद्रह प्रतिशत प्राकृतिक गोंद होता है, जैसे मैदा लकड़ी है, ग्वार गम है, किसी भी प्राकृतिक गोंद का इस्तेमाल करके हम तरह-तरह के प्रोडक्ट्स बनाते हैं।” 

कैसे आया गोबर से बने प्रोडक्ट्स को बाज़ार में लाने का आईडिया? 

Clock made of cow dung
Clock made of cow dung

नीरज को यह आईडिया तब आया, जब उन्होंने रास्ते पर घूमती बेसहारा गायों को देखा, जिनके मालिकों ने उन्हें छोड़ दिया था।इस काम की शुरुआत के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया, “लगभग पांच साल पहले हमने देखा कि सैंकड़ों की तादाद में गौवंश सड़कों पर हैं और अक्सर वे दुर्घटना के शिकार भी हो जाते हैं। जब एक ग्वाले को दूध नहीं मिलता है, या फिर गायें किसी बीमारी से ग्रस्त हो जाती हैं, तो उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया जाता है या कत्लखाने में काटने के लिए बेच देता है।” 

आज नीरज ऑर्डर के मुताबिक़ हर तरह की डेकोरेटिव चीज़ें बनाते हैं, जिसका वह पहले एक कंप्यूटराइज्ड प्रिंट तैयार करते हैं, फिर सांचे बनाकर, गोबर के पेस्ट को साइज़ और डिज़ाइन के हिसाब से ढाल देते हैं। नीरज के इस बिज़नेस ने कई महिलाओं और मज़दूरों को रोज़गार भी दिया है। 

साथ ही, किसान भी गोबर बेचकर कुछ कमाई कर लेते हैं। नीरज, वर्कशॉप के ज़रिए लोगों को ऐसे उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग भी देते हैं। अगर आप भी नीरज से कुछ ख़रीदना चाहते हैं या उनकी वर्कशॉप का हिस्सा बनना चाहते हैं तो उन्हें 8218643240 पर संपर्क कर सकते हैं। 

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