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इतिहास के पन्नों से

History Pages | Motivational History | Inspirational History \ इतिहास के वे भुला दिए गए नायक, जिनकी कहानियां हर भारतवासी को ज़ुबानी याद होनी चाहिए!

अंग्रेज़ों को चकमा दे, जेल से फ़रार हुए इस क्रांतिकारी को कभी नहीं पकड़ पाई थी ब्रिटिश पुलिस!

By निशा डागर

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी पंडित गेंदालाल दीक्षित का जन्म 30 नवम्बर 1888 को उत्तर-प्रदेश के आगरा जिले के एक मई गाँव में हुआ। उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल के साथ मिलकर मैनपुरी षड्यंत्र को अंजाम दिया। टीबी रोग के चलते उन्होंने 21 दिसंबर 1920 को प्राण त्याग दिए। 

कैप्टेन गुरबचन सिंह सलारिया: वह भारतीय जिसने विदेशी धरती पर फहराया था विजय का पताका!

By निशा डागर

कैप्टेन गुरबचन सिंह सलाारिया का जन्म 29 नवंबर 1935 को पंजाब के शकगरगढ़ के पास एक गांव जनवाल (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। वे गोरखा राइफल्स में कैप्टेन थे। वे संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान के सदस्य थे। वह परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले एकमात्र संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक हैं।

गणेश वासुदेव मावलंकर : स्वतंत्र भारत के प्रथम लोकसभा अध्यक्ष!

By निशा डागर

गणेश वासुदेव मावलंकर का जन्म 27 नवम्बर, 1888 को गुजरात के वडोदरा में हुआ था। वे भारत के प्रसिद्द स्वतंत्रता सेनानी थे। भारत की स्वतंत्रता के बाद ये लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष बने थे। भारत की इस महान विभूति का 27 फ़रवरी, 1956 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

सखाराम गणेश देउस्कर: 'बंगाल का तिलक,' जिसकी किताब पर अंग्रेज़ों ने लगा दी थी पाबंदी!

By निशा डागर

देउस्कर ने बहुत सारे ऐसे लेख लिखे, जिनका उद्देश्य भारतीय जनता को अपने अतीत और वर्तमान का ज्ञान कराना था। सखाराम गणेश देउस्कर

'मलकानगिरी का गाँधी' जिससे डरकर, अंग्रेज़ों ने दे दी थी फाँसी!

By निशा डागर

लक्ष्मण नायक का जन्म 22 नवंबर 1899 को कोरापुट में मलकांगिरी के तेंटुलिगुमा में हुआ था। वह भूयान जनजाति से संबंध रखते थे। उन्होंने आदिवासी आधिकारों के लिए ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विद्रोह किया। बाद में वे कांग्रेस के अभियान से जुड़ गये। 29 मार्च 1943 को बेरहमपुर जेल में उन्हें फांसी दी गयी।

शांति घोष: वह क्रांतिकारी जिसने 15 साल की उम्र में ब्रिटिश अधिकारी को गोली मारी!

By निशा डागर

शांति घोष भारत के स्वतंत्रता संग्राम की क्रान्तिकारी वीरांगना थीं। उनका जन्म 22 नवंबर 1916 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 15 साल की उम्र में एक अंग्रेजी अधिकारी को गोली मारी थी। उन्होंने अपनी आत्मकथा 'अरुणबहनी' नाम से लिखी। साल 1989 में 28 मार्च को उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली।

झलकारी बाई : झाँसी की रानी की परछाई बन, जिसने खदेड़ा था अंग्रेज़ों को!

By निशा डागर

झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर 1830 को उत्तर प्रदेश के झांसी के पास के भोजला गाँव में एक निर्धन कोली परिवार में हुआ था। बताया जाता है कि रानी लक्ष्मी बाई की ही तरह उनकी बहादुरी के चर्चे भी बचपन से ही होने लगे थे। झलकारी बाई को युद्ध के दौरान ‎4 अप्रैल 1858 को वीरगति को प्राप्त हुई।

टीपू सुल्तान: 'मैसूर का शेर', जिसने रखी थी भारत में 'रॉकेट टेक्नोलॉजी' की नींव!

By निशा डागर

'मैसूर का शेर' कहे जाने वाले टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवम्बर 1782 को हुआ था। उन्होंने अंग्रेजों को कई बार बुरी तरह हराया। उन्हें 'मिसाइल मैन' भी कहा जाता है। आधुनिक रॉकेट का प्रोटोटाइप टीपू के पिता हैदर अली ने बनाया था, जिसे बाद में टीपू ने और आगे बढाया।

बिरसा मुंडा: ब्रिटिश सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह करनेवाले पहले आदिवासी वीर

By निशा डागर

Birsa Munda: First Adivasi Freedom Fighter Of India. बिरसा मुंडा: ब्रिटिश सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह करनेवाले पहले आदिवासी वीर।

वासुदेव बलवंत फड़के: वह क्रांतिकारी जिनकी आदिवासी सेना ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबवाये!

By निशा डागर

vasudev balwant phadke का जन्म 4 नवंबर, 1845 को महाराष्ट्र के रायगड जिले के शिरढोणे गांव में हुआ था। साल 1857 की क्रांति की विफलता