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मुम्बई ब्रिज हादसा : महज़ 55 मीटर की दूरी पर ब्रेक लगा, ड्राइवर ने बचाई यात्रियों की जान!

आज सुबह लगभग 7:30 बजे मुंबई में गोखले पुल का एक हिस्सा अँधेरी रेलवे स्टेशन की पटरियों पर टूटकर गिर गया। दहानू से चर्चगेट की तरफ जा रही एक लोकल ट्रेन अँधेरी स्टेशन के इसी ट्रैक पर आगे बढ़ रही थी। लेकिन ट्रेन ड्राइवर चंद्रशेखर सावंत ने समय रहते ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया।

ज सुबह लगभग 7:30 बजे मुंबई के अँधेरी में गोखले पुल का एक हिस्सा टूटकर गिर गया। यह पुल अँधेरी रेलवे स्टेशन का एक हिस्सा था और यह रेलवे पटरियों पर गिरा।

बताया जा रहा है कि इस हादसे में पांच लोग घायल हुए। हालाँकि, किसी भी गंभीर हालात की सुचना अभी तक नहीं मिली है।

रेल की पटरियों पर इस तरह पुल का गिरना यक़ीनन खतरनाक था। लेकिन, सबसे ज्यादा गंभीर बात यह थी कि उसी रेलवे ट्रैक पर आ रही एक लोकल ट्रेन कुछ ही मिनटों की दुरी पर थी।

दहानू से चर्चगेट की तरफ जा रही यह लोकल ट्रेन अँधेरी स्टेशन की तरफ बढ़ रही थी। और पुल गिरने के चंद सेकेंड पहले ही एक लोकल ट्रेन इसी ट्रैक से निकली थी।

 

द बेटर इंडिया से बात करते हुए, चंद्रशेखर सावंत, जो लोकल ट्रेन चला रहे थे, उन्होंने कहा, “ट्रेन लगभग 50 किमी / घंटा की गति से चल रही थी। जब पुल गिरने लगा तो हम केवल 50-60 मीटर दूर थे। यह सब मेरी आँखों के सामने हुआ। इसलिए मैंने आपातकालीन ब्रेक लगाए और बस समय रहते ट्रेन को रोक पाया।”

यदि सावंत समय पर ब्रेक नहीं लगाते तो सभी यात्रियों के साथ बड़ी दुर्घटना घट सकती थी।

जब हमने सावंत को सम्पर्क किया तो, बिना इस घटना से घबराये हुए, वे अपनी ड्यूटी पर थे। उन्होंने बताया,

“हम अपना वाहन नहीं छोड़ सकते। ट्रेन रोकने के बाद मैंने गार्ड व अधिकारियों को सूचित किया। इसके अलावा सिग्नल के लिए फ़्लैश लाइट भी ऑन करवाई और स्वयं एक लाल झंडा लेकर खड़ा हो गया ताकि आने वाली ट्रेनों को रोका जा सके। हमे इस तरह की परिस्थितियों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।”

ट्रेन ड्राइवर सावंत के भतीजे, सिद्धेश सावंत ने बताया, “वो एक एक्स-आर्मी अफ़सर है। ज़िंदगियाँ बचाना उनका कर्तव्य है। हमें उन पर गर्व है।”

सुबह की इस लोकल ट्रेन में सैंकड़ों यात्री थे। ब्रेक लगाने में अगर चंद पलों की भी देरी हुई होती तो एक बड़ी त्रासदी घट सकती थी।

लोगों ने भी घटना के तुरंत बाद से ही ट्विटर पर सावंत को उनकी सूझ-बुझ के लिए धन्यवाद देना शुरू कर दिया। उन्होंने आज बहुत से मुंबईकरों की जान बचायी है।

( संपादन – मानबी कटोच )


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