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महाराष्ट्र: इस गाँव के किसान तेंदुओं के पानी पीने के लिए बना रहे हैं टैंक!

महाराष्ट्र्र के पुणे में खेड़ा तालुका के रंमाला गाँव में एक किसान, निलेश शिवाजी शिंदे ने बेजुबान जंगली जानवरों के लिए एक पहल की शुरुआत की है। उन्होंने उनके लिए पानी के टैंक बनाये जहाँ हर दो दिन में पानी भरा जाता है ताकि इन जानवरों की प्यास बुझ सके।

कुछ समय पहले ही महाराष्ट्र के पुणे में खेड़ा तालुका का एक गाँव रंमाला, अपने यहाँ फैली हरियाली को लेकर चर्चा में था। दरअसल, यहाँ पर किसी भी मौके पर जैसे शादी, बच्चे का जन्म या फिर किसी की मृत्यु पर गांववाले मिलकर वृक्षारोपण करते हैं।

अब ये गाँववाले धीरे-धीरे इंसान व जानवरों के सम्बन्ध को भी सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। इस गाँव के 25 वर्षीय किसान निलेश शिवाजी शिंदे ने खाली बैरल का इस्तेमाल कर पानी के टैंक बनाये हैं। उन्होंने इन सभी टैंकों को गाँव के पास की पहाड़ी पर रख दिया है।

नियमित रूप से इनमें पानी भरा जाता है ताकि उस पहाड़ी की तरफ़ आने वाले जंगली जानवर खासकर कि तेंदुएं अपनी प्यास बुझा सके। उनका उद्देश्य इन सभी जानवरों को आसानी से पानी उपलब्ध करवाना है ताकि वे पानी आदि के लिए गाँव में ना घुसे।

इन सभी टैंकों को हर दो दिन में वाटर टैंकर की मदद से भर दिया जाता है। गाँव में पिछले एक साल में हुए कई हमलों के बाद यह पहल शिंदे ने शुरू की है। उन्होंने पुणे मिरर को बताया, “मैंने इन जंगली जानवरों के लिए छह छोटे तालाब बना दिए हैं, जिसके लिए मैंने बैरल को दो भागों में काटकर इस्तेमाल किया है। यह छोटी-सी पहल पिछले एक महीने में बड़ी कारगर रही है क्योंकि अब तक कोई भी जंगली जानवर गाँव की तरफ़ नहीं आया है। इन टैंकों को हमारे गाँव के कुएं से ही टैंकर की मदद से भर दिया जाता है।”

शिंदे की इस पहल को वन विभाग के अधिकारी व स्थानीय लोग, दोनों का साथ मिल रहा है। इस एक पहल ने और भी किसानों को प्रेरित किया है। ये किसान अपने खेतों में भी इन जानवरों के लिए पानी आदि की व्यवस्था का इंतजाम करते हैं। कईयों ने मिलकर सीमेंट, ईंट आदि का प्रयोग कर तीन पक्के पानी के टैंक इस पहाड़ी पर बना दिए हैं।

बेशक, यह पहल काबिल-ए-तारीफ़ है जहाँ इंसान अपने साथ-साथ बेजुबान जानवरों की जरूरतों का ध्यान रख रहा है। शायद इसी सामंजस्य से प्रकृति को बचाया जा सकता है। हम उम्मीद करते हैं कि और भी लोग शिंदे से प्रेरित होकर जंगली-जीवन व जीवों के बारे में सोचेंगे।


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