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सिंगल यूज़ प्लास्टिक बंद होने के बाद शुरू हुआ अनोखा कैफ़े, प्लास्टिक के बदले मिलेगा फ्री खाना

देशभर में जहां सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर बैन लगा है, ऐसे में लोगों को प्लास्टिक रीसायकल के लिए प्रेरित करने के लिए जूनागढ़ में एक अनोखी पहल की जा रही है। यहां आप प्लास्टिक जमा करके मुफ्त में खाना खा सकते हैं।

देश में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण के कारण  सरकार ने एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। लेकिन हमारे खाने की टेबल से लेकर किराने के सामान तक सब कुछ तो प्लास्टिक से घिरा हुआ है। ऐसे में प्लास्टिक से दूर रहना शायद सबके लिए आसान न हो। लेकिन इस प्लास्टिक को कचरे में फेंकने के बजाय रीसायक्लिंग के लिए  देना सबके बस की बात ज़रूर हो सकती है।  

लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होंगे, जो कहेंगे कि रीसायक्लिंग के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक को देना कहां है और इसके लिए कौन प्लास्टिक का कचरा इकट्ठा करे? तो ऐसे ही लोगों को प्रेरित करने के लिए जूनागढ़ प्रशासन ने एक अनोखा तरीका खोज निकाला है।
जूनागढ़ शहर के कलेक्टर रचित राज ने अपने शहरवासियों को प्लास्टिक, रीसायक्लिंग के लिए देने के बदले में, खाना देने का फैसला किया है। जी हाँ, बिल्कुल सही सुना आपने। जूनागढ़ में 30 जून को ‘प्राकृतिक प्लास्टिक कैफ़े’ नाम के एक कैफ़े का उट्घाटन किया गया है,  जिसमें आपको सिंगल यूज प्लास्टिक देने के बदले नींबू पानी, ढोकला और पोहा जैसा स्वादिष्ट नाश्ता परोसा जाएगा। 

Prakritik Plastic Cafe junagadh
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प्राकृतिक प्लास्टिक कैफे को दिया गया है फंकी लुक

जूनागढ़ जिले के महिला व बाल विकास अधिकारी, जिगर जसानी ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए बताया कि इस कैफ़े को देशभर में चल रही मुहिम को और गति देने के लिए खोला गया है।
उन्होंने कहा, “यह बेहतरीन आइडिया हमारे कलेक्टर का था, जबकि इस कैफ़े का संचालन ‘सर्वोदय सखी मंडल’ की महिलाएं करेंगी। हमने एक रीसायक्लिंग कंपनी के साथ समझौता भी किया है, जो नियमित रूप से कैफ़े में जमा प्लास्टिक ले जाया करेगी।”

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यह एक ईको-फ्रेंडली कैफ़े है,  जहां सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाएगा। शहर के सिटी हॉस्पिटल के पुराने कैंपस में इस कैफ़े को बनाया गया है। वहीं, ज्यादा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इसे एक फंकी लुक भी दिया गया है। 

लोगों से मिली गज़ब की प्रतिक्रिया 

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आमतौर पर, लोग अपने आस-पास पड़े प्लास्टिक वेस्ट को कचरे में ही डाल देते हैं।  लेकिन उस कचरे के डिब्बे से शायद ही कोई प्लस्टिक रीसायकल के लिए जाता होगा। ऐसे में लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक रीसायकल की अहमियत समझाने का यह तरीका थोड़ा अनोखा है और शायद इसीलिए यह सबको काफी पसंद भी आ रहा है। 

इसे लोग कितनी पसंद कर रहे हैं, इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि मात्र आठ दिनों में ही इस प्राकृतिक प्लास्टिक कैफ़े ने 190 किलो प्लास्टिक वेस्ट जमा किया। कितनी अच्छी बात है न कि एक छोटी सी पहल के कारण इतना ज्यादा प्लास्टिक वेस्ट हमारे लैंडफिल में जाने से बच गया।   

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कई लोगों ने अपने घर में पड़ा कबाड़ या आस-पास पड़ा वेस्ट प्लस्टिक यहां जमा किया और उसके बदले यहां के लजीज़ नाश्ते का स्वाद चखा।  

स्विग्गी-ज़ोमैटो पर भी है यह कैफे

इस कैफ़े में 500 ग्राम ‘प्लास्टिक कचरे’ के बदले आपको 1 गिलास शरबत या 1 गिलास नींबू पानी मिलेगा। जबकि 1 किलो ‘प्लास्टिक कचरे’ के बदले 1 प्लेट ढोकला या 1 प्लेट पोहा मिलेगा। इसके अलावा, कैफ़े के मेन्यू में काठियावाड़ी प्लैटर और गुजराती प्लैटर भी शामिल हैं। कुल मिलाकर जितना ज़्यादा सिंगल यूज प्लास्टिक देंगे, उतनी ही ज़्यादा खाने-पीने की चीज़ें मिलेंगी। 

सबसे अच्छी बात तो यह है कि यह कैफ़े ज़ोमैटो और स्विग्गी के ज़रिए भी काम करता है। यानी अगर कोई चाहे, तो घर बैठे भी इस बेहतरीन ऑफर का लाभ उठा सकता है। 

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यह कहना गलत नहीं होगा कि प्राकृतिक प्लास्टिक कैफ़े, जनता और प्रशासन की साझेदारी का बेहतरीन उदाहरण है और इस पहल से जल्द ही पूरा शहर प्लास्टिक मुक्त भी बन सकता है।   

संपादनः अर्चना दुबे

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