विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाली हिमा दास के लिए फ़िनलैंड में रहनेवाले भारतियों ने मिलकर भेजे 1 लाख रूपये!

असम में ढिंग से ताल्लुक रखने वाली 18 वर्षीय हिमा दास एक किसान की बेटी हैं। उसने आईएएएफ वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में टेम्पेरे में 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया है।

सम में ढिंग से ताल्लुक रखने वाली 18 वर्षीय हिमा दास एक किसान की बेटी हैं। उन्होंने आईएएएफ वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में टेम्पेरे में 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने इस दौड़ को 51.46 सेकेंड में पूरा कर रिकॉर्ड कायम किया है। विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाली वे भारत की पहली ट्रैक एथलीट हैं।

हिमा की उपलब्धि ने हर भारतीय का दिल जीत लिया है। लेकिन इस युवा खिलाड़ी ने अपने जीवन में बहुत मुश्किलों का सामना किया है। शायद इसीलिए फ़िनलैंड में रहने वाले भारतीयों के दिल में भी हिमा दास के लिए बहुत खास जगह बन गयी है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक फ़िनलैंड में रहने वाले भारतीयों का एक समूह इस खिलाडी से मिलने के लिए हेलसिंकी से टेम्पेरे आया।

हेलसिंकी में वॉरियर्स हॉकी क्लब चलाने वाले विक्की मोगा ने अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर हेलसिंकी के पंजाब सांस्कृतिक सोसाइटी और पंजाब स्पोर्ट्स क्लब के सदस्यों को एक सन्देश लिखा, “चलो उसके लिए कुछ करते हैं।”

इस सन्देश के जबाब में मात्र 10-15 मिनट में ही उन लोगों ने 900 यूरो इकट्ठा कर लिए थे और इसके थोड़ी देर बाद उन्होंने लगभग 1250 यूरो जमा किये।

ये सभी लोग रविवार की दोपहर हेलसिंकी से टेम्पेरे पहुंचे और हिमा और पीटी उषा से मिले।

विक्की चाहते थे कि उनके द्वारा जमा की गयी राशि (लगभग 1 लाख रूपये) सीधा हिमा तक पहुंचें। इसलिए उन्होंने हिमा के निजी बैंक अकाउंट में पैसे जमा कराये।

हिमा इन लोगों का प्यार देखकर अभिभूत हो गयी थीं। लेकिन इन लोगों की उदारता यहीं नहीं रुकी। सभी ने हिमा को तोहफे भी दिए। बाद में सभी लोगों ने हिमा और अन्य कोचों के साथ बैठकर खाना भी खाया।

बहुत से खिलाड़ी हमारे यहां आर्थिक सहयता के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में हिमा के लिए यह सम्मान बहुत मायने रखता है।

मूल लेख: रेमंड इंजीनियर

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