कोलकाता की पहली दुर्गा-पूजा, जिसकी आयोजन समिति के सदस्य हैं फुटपाथ पर रहने वाले बच्चे!

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में बाघबाज़ार में पहली बार फूटपाथ पर गुजर-बसर करने वाले लोगों के बच्चों अपनी दुर्गा पूजा का आयोजन कर रहे हैं। इसका नाम उन्होंने 'फूटपाथेर दुर्गा पूजो' रखा है। इस आयोजन के सभी कार्य, मूर्ति बनाने से लेकर पंडाल सजाने तक, बच्चों द्वारा किये जा रहे हैं।

श्चिम बंगाल के कोलकाता में जहाँ एक तरफ लोग दुर्गा पूजा पर करोड़ों में पैसे खर्च कर देते हैं, ऐसे में मेयर बाड़ी के पास बाघबाज़ार में फूटपाथ पर गुजर-बसर करने वाले कुछ लोग पहली बार बोड़ो-बाड़ी दुर्गा पूजा का आयोजन करने जा रहे हैं।

इस पूजा का पूरा आयोजन व प्रबन्धन यहाँ के बच्चों द्वारा किया जा रहा है। बच्चों ने इसे ‘फूटपाथेर दुर्गा पूजो’ का नाम दिया है और उनकी थीम है, ‘इच्छापुरोण’!

यहाँ के बच्चों ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि पिछले साल से वे लोग अपनी दुर्गा माँ की मूर्ति बनाने व दुर्गा पूजा आयोजित करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन पिछली बार ऐसा हो नही पाया। इस बार इन बच्चों की इच्छा बंगुर निवासी महेंद्र अग्रवाल और उनकी पत्नी रश्मि की मदद से पूरी हो रही है।

दरअसल, एक दिन मेयर बाड़ी जाते हुए महेंद्र ने कुछ बच्चों को मिट्टी से मूर्ति बनाते हुए देखा। जब उन्होंने उनसे वजह पूछी तो उन्हें पता चला कि कैसे ये बच्चे अपना दुर्गा पूजा का पंडाल लगाने का प्रयास कर रहे हैं। इन बच्चों की इस मासूमियत ने महेंद्र को प्रभावित किया और उन्होंने इनकी मदद करने का ज़िम्मा उठाया।

उन्होंने कहा, “सभी लोग दुर्गा पूजा मनाते हैं; तो अगर एक छोटा सा प्रयास इन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है? वैसे भी उन्हें क्या चाहिए, क्ले, चार्ट, पेपर, रंग, दिया आदि बस, इनका बजट तो 1 लाख रूपये से भी कम है।”

लगभग 20 स्थानीय बच्चे इस दुर्गा पूजा की आयोजन समिति में शामिल हैं। मूर्ति बनाने से लेकर पंडाल सजाने तक सभी काम ये बच्चे ही कर रहे हैं। कक्षा छठी के छात्र देबजीत दास व कक्षा सातवीं के छात्र सुरोजीत सरकार ने माता की मूर्ति बनाने की जिम्मेदारी ली है।

यह पंडाल एक स्थानीय और अनौपचारिक स्कूल, शारदा प्राइमरी स्कूल में लगाया जायेगा। बाघबाज़ार के रामकृष्ण मठ के स्वामी अभिन्नानंद ने कहा कि यह एक नेक काम है और हम इसमें इन बच्चों की हर सम्भव मदद करेंगे।

संपादन – मानबी कटोच


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