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कोटा के यशराज का कमाल! बिना मिट्टी 45 दिनों में ऑयस्टर मशरूम उगाकर कमाए 80 हज़ार रुपये

Yashraj Sahu from Kota, Rajasthan Growing Oyster Mushroom without soil

कोटा के 21 वर्षीय यशराज ने अपने साथी राहुल मीणा की मदद से बिना मिट्टी, भूसे और बीज के जरिये हैंगिंग फ्रेश Oyester Mushroom की खेती कर, 45 दिनों में फसल तैयार कर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

कोटा (राजस्थान) के 21 वर्षीय यशराज साहू ने अपने 24 वर्षीय साथी राहुल मीणा की मदद से मिट्टी का उपयोग किए बिना, हैंगिंग बैग के जरिये ऑयस्टर मशरूम की खेती (Oyster Mushroom Cultivation) से मात्र 45-60 दिन में शानदार मुनाफा कमा लिया। इसके लिए उन्हें ज्यादा पैसे भी नहीं खर्च करने पड़े और अब वे MSVO Agro Steps Pvt Ltd. नाम से खुद की कंपनी शुरू कर लोगों से मशरूम खरीद भी रहे हैं, वह भी मार्केट प्राइस से अधिक दाम पर। ताकि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को मशरूम की खेती से जोड़ सकें।

यश ने यह कमाल अपनी मेहनत और लगन से कर दिखाया है। उन्होंने 625 वर्ग फ़ीट के खाली पड़े प्लॉट में मशरूम की खेती के लिए बांस, ग्रीन नेट, काली पॉलीथिन आदि से स्ट्रक्चर तैयार करने तक का सारा काम खुद ही किया। स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद, उन्होंने रात 9 बजे से 1 बजे तक लगातार दस दिन तक 500 बैग्स तैयार किए, जिसमें मशरूम की खेती की जा सके। अब यश 500 बैग मशरूम की खेती से आगे बढ़कर, 1000 बैग्स तक करने का मन बना चुके हैं और इसी की तैयारी में हैं।

स्कूल में ही तय कर ली थी राह 

Oyster Mushroom cultivation
Oyster Mushroom

गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले यशराज का लक्ष्य, स्कूल समय से ही तय था। उन्होंने स्कूलिंग के दौरान ही मशरूम के व्यवसाय में अपना भविष्य तय कर लिया और कक्षा 11वीं में एग्रीकल्चर विषय चुन, स्कूलिंग पूरी की। इसके बाद, स्नातक की पढ़ाई के लिए बीएससी एग्रीकल्चर में दाखिला ले लिया।

फिलहाल, वह बीएससी एग्रीकल्चर (B.Sc. Ag) अंतिम वर्ष के छात्र हैं। बीएससी की पढ़ाई के दौरान ही, उन्होंने ‘कृषि वन, देहरादून’ नाम के संस्थान से 1 महीने तक मशरूम की खेती (Oyester Mushroom Cultivation) की बारीकी सीखी और फिर साल 2018 में 50 बैग्स में मशरूम उगाने का प्रयोग करके देखा, जिससे उनको 80 किलो मशरूम मिले।

प्रयोग से मिले 80 किलो मशरूम, उन्होंने 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचे। उनका यह प्रयोग सफल तो हो गया, लेकिन अगले 2 सालों तक कोरोना के कारण, वह इसमें कुछ खास नहीं कर पाए। इस दौरान, उन्होंने ‘कृषि विज्ञान केंद्र, कोटा’ के वैज्ञानिकों से संपर्क साधा और जनवरी 2022 में नई तकनीक के साथ मशरूम उगाने के लिए 500 बैग्स तैयार किए और इस बार उनको 1000 किलो से ज्यादा मशरूम मिले। लागत निकालने के बाद भी, इस ऑयस्टर मशरूम को बाजार में बेचकर यश ने 80,000 रुपये से ज्यादा की कमाई की।

Oyster Mushroom ही नहीं, मशरूम पाउडर से भी कमा रहे मुनाफा

Mushroom Grown by Yashraj Sahu
Mushroom Grown by Yashraj Sahu

यश, फ्रेश ऑयस्टर मशरूम को 100-150 रुपये किलो तक बेचते हैं, जबकि उसी मशरूम का सूखा पाउडर बनाकर 1500 से 2000 रुपये प्रति किलो में बेच देते हैं। 100 किलो फ्रेश मशरूम से 10 किलो मशरूम पाउडर बनता है। इस तरह यश 45-60 दिन की मशरूम खेती से ही, 80,000 से 1 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।

यश का कहना है, “स्कूल के समय से ही मशरूम की खेती का मन बना लिया था, इसलिए विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लेकर घर में ही 3 साल पहले 250 वर्ग फ़ीट खाली जगह पर स्ट्रक्चर तैयार कर 50 बैग मशरूम की खेती का प्रयोग शुरू किया, जिसमें परिणाम उम्मीद अनुसार आए। इस साल जनवरी में राहुल मीणा की सहायता से 500 बैग ऑयस्टर मशरूम तैयार किये, जिससे अच्छी फसल हुई। औसतन एक गुच्छे में 300-400 ग्राम ऑयस्टर मशरूम निकलता है, लेकिन मेरे बैग के गुच्छों में 700 ग्राम तक मशरूम निकले।”

उन्होंने आगे कहा, “परिवार में कोई व्यापारी या किसान नहीं है, इसलिए शुरू में थोड़ी घबराहट थी। लेकिन अब डेढ़-दो महीनों की मेहनत से ही अच्छी कमाई देख घर वाले भी खुश हैं। अब आगे इसे और बड़े स्तर पर करने की तैयारी है।”

किन चीज़ों की होती है ज़रूरत और किन बातों का रखें ध्यान

Yashraj Sahu taking care of Mushrooms
Yashraj Sahu taking care of Mushrooms

यशराज ने बताया, “1000 किलो ऑयस्टर मशरूम (Oyster Mushroom) के लिए 500 बैग तैयार करने पड़ते हैं, जिसके लिए 600 किलो भूसा,100 किलो बीज, 200 रुपये की काली पॉलीथिन और 800 रुपये की रस्सी की जरुरत होती है। बांस के स्ट्रक्चर बनाकर उसे ग्रीन नेट से कवर किया जाता है।”

उन्होंने आगे बताया, “मशरूम बैग्स को 18 दिनों तक सूरज की रोशनी से बिल्कुल दूर रखना होता है और उसके बाद हल्के पानी का छिड़काव कर सकते हैं। इस तरह लगभग 45-60 दिन में क्रॉप तैयार हो जाती है। एक साल में ऑयस्टर मशरूम की 6 से 7 क्रॉप तक लगाई जा सकती है।”

पहले यश को मशरूम बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन यूट्यूब, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि वन संस्थान की मदद से अब उनके मशरूम की अच्छी खासी मांग है। इसलिए उन्होंने अब खुद की कंपनी शुरू कर दी है। इसके अलावा, यश अब लोगों के यहाँ प्लांट सेट करवाने का काम भी करते हैं।

लोगों के यहां, जो भी उत्पादन होता है उसे बाजार मूल्य से अधिक दाम पर खरीदकर, आगे मांग के अनुसार बेच देते हैं। यश, फ्रेश मशरूम का आचार और मशरूम पाउडर को पापड़, कैप्सूल और बिस्किट के रूप में बेचकर भी अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।

लेखः सुजीत स्वामी

संपादनः अर्चना दुबे

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