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    पुष्पा भारती से सब प्यार करते हैं!

    आज द बेटर इंडिया और शनिवार की चाय में मनीष गुप्ता के साथ पढ़िए, डॉ. धर्मवीर भारती की रचना ‘कनुप्रिया’! क्योंकि डॉ. भारती सिर्फ ‘गुनाहों का देवता’ के ही रचियता नहीं थे। उन्होंने ‘कनुप्रिया’ और ‘अंधायुग’ जैसी रचनाएँ भी की हैं। More

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    सत्तर-अस्सी का एलबम!

    चुपड़ी, कर्री, भाप उठती रोटी की धूप की बातें संदली शाम, महकी रात का घी पोर पोर में रवाँ रवाँ. ठुमकती भोर दिल के चोर अम्मा के राम पिताजी के सुबह के काम रेडियो पर गाने फुल्ली दीदी के फ़साने छत पर खिलती अचार की बरनियाँ साइकिल सुधारने वाले का स्वैग बनिए की दुकान की […] More

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    तुम्हें नहलाना चाहती हूँ!

    मैं उस ख़त को लेकर मुंडेर पर जा कर बैठ गया सुबह की चाय के साथ. वो बरसात का मौसम था. मुझे कहीं जाना नहीं था तो मैं बैठा ही रहा. बरसात बीती तो शिशिर आया. फिर शरद, बसंत, हेमंत, ग्रीष्म और फिर से वर्षा. More

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    वन नाइट स्टैंड!

    जब एक आदमी और औरत स्वेच्छा से किसी को चुनते हैं तो वे फ़रिश्ते प्रतीत होते हैं. लेकिन संबंधों पर काम न करने की वजह से बोझिलता आ जाती है जिसे वे अपना प्रारब्ध मान बैठते हैं. More

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    दीवाली-वैराग्य!

    इस कविता में हास्य है शायद, या सच्चाई है, मुझे नहीं पता. जीवन के सवाल पर हूबनाथ की एक छोटी सी कविता! More

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    भूत / देव / नरक / पाताल

    मानव कौल एक अभिनेता होने के साथ-साथ, एक परिपक्व नाटककार भी हैं. हिन्दी कविता प्रोजेक्ट में आरम्भ से ही जुड़े थे. आज के वीडियो में उनके एक नाटक ‘इल्हाम’ से एक कविता ‘रेखाएँ’ आप के लिए प्रस्तुत है! More

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    कविता महज़ शब्दों का खेल नहीं!

    शब्द समृद्ध और सशक्त होते हैं लेकिन शब्दों के परे की अभिव्यक्ति आपको अपने अंदर कहीं दूर तक ज़्यादा आसानी से ले जा सकती है. More

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    तुम्हें याद हो कि न याद हो : भारत में कभी समलैंगिकता जुर्म थी!

    हिंदी कविता (Hindi Studio) और उर्दू स्टूडियो, आज की पूरी पीढ़ी की साहित्यिक चेतना झकझोरने वाले अब तक के सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक/सांस्कृतिक प्रोजेक्ट के संस्थापक फ़िल्म निर्माता-निर्देशक मनीष गुप्ता लगभग डेढ़ दशक विदेश में रहने के बाद अब मुंबई में रहते हैं और पूर्णतया भारतीय साहित्य के प्रचार-प्रसार / और अपनी मातृभाषाओं के प्रति मोह जगाने के काम में संलग्न हैं. More

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