More stories

  • in

    लड़कियों! सेक्स की बात मत करो

    आज 2018 में नारियाँ आगे आ रही हैं और अपनी लैंगिकता और कामुकता के बारे में बात कर लेती हैं. पचास-सौ साल पहले ऐसा होना समाज को कितना असहज कर देता? More

  • in

    दिल के हैं बुरे लेकिन अच्छे भी तो लगते हैं

    आसान सा लेख है पर अगर मन भारी हो गया हो तो माफ़ी. इलाज के तौर पर ये वीडियो हाज़िर है.. देखें परवीन कैफ़ की नशा ला देने वाली मासूमियत को.. कहती हैं.. More

  • in ,

    बाल की खाल के कबाब!

    हमारी लोक-संस्कृति की इतनी मीठी, मसालेदार बानगी – हमारा सदियों पुराना गीत. लाखों लोग अभिभूत हुए, उन्हें अपनी अपनी आँचलिक भाषाओं पर प्यार आया, उनका प्रयोग करने की झिझक टूटी! More

  • in

    रूमी से मिले?

    एक था रूमी दो थे रूमी सब थे रूमी “तुम जिसे ढूँढ़ते हो वो तुम्हें ढूँढ रहा है” [मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी] ‘इसका मतलब क्या हुआ? हम तो सब कुछ ढूँढ रहे हैं – पैसा, नाम, काम, कर्म, भगवान, दोस्त, प्रेमी, सुख, पहाड़, समुद्र, तैरना, उड़ना, टूटना, जुड़ना.. ये सब हमें ढूँढ रहे हैं?’ जवाब […] More

  • in

    मृत्यु : आख़िरकार है क्या?

    अपनी हानि पर शोक ठीक है लेकिन जो गया उसके लिए तो एक नया अध्याय आरम्भ हुआ है. हम उसे जाने दें.. अच्छे से विदा करें ताकि नए अध्याय में वह आसानी से रम सके. More

  • in

    बाबा बुल्ले शाह दा टूथपेस्ट!

    आप ही कहें ये बुल्ला पड़ा पड़ा ‘कमली हाँ’ ‘कमली हाँ’ (मैं पागल हूँ) करता रहता है. उधर बाबा लोग देश समाज के भले के लिए पता नहीं क्या क्या कर रहे हैं! More

  • in

    इतवार के इतवार ज़िन्दगी!

    आज तुम्हारा 29वाँ जन्मदिन है, सुबह से ऑफ़िस में भागादौड़ी, तनाव है. कल रात सब देर तक काम कर रहे थे. मेरा सर ज़ोर से फट रहा है. ऊपर से चिन्ता है कि तुम्हारे लिए तोहफ़ा लेना है. More

  • in

    इक इश्क़ की कहानी !

    क्या प्रेम हर जगह एक सा होता है? क्या सभी एक सी गहराई (और ऊँचाई) से प्यार कर पाते हैं? सुनिए सरदार जाफ़री की एक नज़्म नग़मा सहर की ज़ुबानी! More

  • in

    हम वही काट रहे हैं जो बोया है!

    (अ)सभ्यता का आरम्भ/ का अंत’ ! 2016 के आँकड़ों के अनुसार औरतों के ख़िलाफ़ जुर्मों को देखें तो 3.27 लाख केस रिपोर्ट हुए थे. अपने देश में प्रतिदिन 106 बलात्कार की घटनायें होती है. ये तो वो हैं जो केस सामने आते हैं. हमारी संस्कृति में जिसके साथ ग़लत हुआ है उसे गन्दा समझा जाता है तो बहुत […] More

  • in

    जोनो-गोनो-मोनो अधिनायको जोयो हे..

    जीवन के प्रत्येक मोड़ पर एक नयी ऊर्जा से भर देने वाला हमारा राष्ट्रगीत हर भारतवासी की रगों में संचरित है. हममें से कौन है जिसकी आँखों में कभी आँसू नहीं आ गए होंगे इसे सुन/गाकर. हममें से कौन है जिसके लहू में उबाल न आया हो, मुट्ठियाँ न तनी हों. More

Load More
Congratulations. You've reached the end of the internet.