More stories

  • in

    अच्छी ख़बरों का ज़माना – एक नृत्य नाटिका

    ‘हम सच्चे हैं – हम अच्छे हैं’ गाते गाते लोग स्टेज से चले जाते हैं. नट कमर पर हाथ रख कर बाँकी नज़र से नटी को देख रहा है. पार्श्व से गाने की आवाज़ धीरे धीरे ज़ोर पकड़ती है.. नटी मुस्कुरा कर नट की बाहों में बाँह डालती है और दोनों मिल कर साथ में गाने लगते हैं.. झूठा ही सही, झूठा ही सही..
    More

  • in

    Hither hither, Love

    आज की शनिवार की चाय अचानक खिल उठने वाले फूलों और अचानक बरस जाने वाले प्यार के नाम. More

  • in

    ऐ, तुम्हारा पियानो कहाँ है?

    यही होता है तो आख़िर ये होता क्यूँ है? जैसे सवाल हैं. मैं यहाँ किसलिए हूँ? मैं कौन हूँ. मेरी ज़िन्दगी का मकसद क्या है? वे खोज में हैं.. वे ऊपर लिखी कहानी की तरह एक कीड़ों-मकोड़ों जैसी, पिंजरे में फंसे पंछी जैसी, असेंबली लाइन की तरह पूर्व-परिभाषित ज़िन्दगी नहीं चाहते. वे सच्ची ख़ुशी चाहते हैं. वे नृत्यरत होना चाहते हैं, वे जीवन का गीत गाना चाहते हैं. इस दुनिया को ऐसे लोग ही सुन्दर बनाते हैं. More

  • in

    जे डी अंकल का स्केच!

    मुझे पूरा अंदेशा है कि जैसे ही स्केच पूरा होगा जेडी अंकल समाधी ले लेंगे, और ये उनके और हमारे शहर के लिए अच्छा ही होगा! More

  • in

    मदारी!

    आज शनिवार की चाय के साथ आपको एक एब्स्ट्रैक्ट सी कविता ‘सलमा की लव स्टोरी’ दिखाता हूँ. ये कविता कागज़ पर नहीं हो सकती आपको देखनी ही पड़ेगी. More

  • in

    किसिम किसिम के NRIs

    भारतीय संगीत और संस्कृति महज़ भारतीयों की ही पसंद या ज़िम्मेदारी नहीं है सुनिए ‘पधारो म्हारे देस’ गियाना ब्रैंटली से. More

  • in

    कौवा है, घड़ा है, कंकड़ है, पानी है 

    ‘धूप में घोड़े पर बहस’ यह केदारनाथ सिंह की एक प्रसिद्ध कविता है. आज शनिवार की चाय में यह कविता आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं राष्ट्रीय पुरुस्कार विजेता फिल्मकार / अभिनेता रजत कपूर. More

  • in

    मेरे दिल की राख कुरेद मत

    उस दिन मिरैकल हुआ – बशीर साहब के चेहरे पर चमक आई, उन्होंने अपनी शरीके हयात की गोद में रखे अपने सर को हौले से हिलाया और एक हलकी सी मुस्कराहट के ज़रिये फ़रमाया कि वो सुन और समझ पा रहे हैं. More

  • in

    फ़ैज़ साहब से जलन!

    महबूब के रुमान को तो हम सबने महसूस किया ही है, लेकिन सब नहीं जानते कि इन्क़िलाब का रुमान भी बहुत सुरीला होता है, दिलकश होता है। फ़ैज़ साहब इन दोनों रुमानों में ताउम्र डूबे रहे तो इनसे जलना लाज़मी तो है न ?

    More

  • in

    हसीन हो कहानी

    आज की शनिवार की चाय महानगर की धड़कन से परे एक सुदूर गाँव में पकी है. किसी की तेरहवीं है. जीवन कितनी जल्द बीत जाता है. More

Load More
Congratulations. You've reached the end of the internet.