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    जे डी अंकल का स्केच!

    मुझे पूरा अंदेशा है कि जैसे ही स्केच पूरा होगा जेडी अंकल समाधी ले लेंगे, और ये उनके और हमारे शहर के लिए अच्छा ही होगा! More

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    मदारी!

    आज शनिवार की चाय के साथ आपको एक एब्स्ट्रैक्ट सी कविता ‘सलमा की लव स्टोरी’ दिखाता हूँ. ये कविता कागज़ पर नहीं हो सकती आपको देखनी ही पड़ेगी. More

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    किसिम किसिम के NRIs

    भारतीय संगीत और संस्कृति महज़ भारतीयों की ही पसंद या ज़िम्मेदारी नहीं है सुनिए ‘पधारो म्हारे देस’ गियाना ब्रैंटली से. More

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    कौवा है, घड़ा है, कंकड़ है, पानी है 

    ‘धूप में घोड़े पर बहस’ यह केदारनाथ सिंह की एक प्रसिद्ध कविता है. आज शनिवार की चाय में यह कविता आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं राष्ट्रीय पुरुस्कार विजेता फिल्मकार / अभिनेता रजत कपूर. More

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    मेरे दिल की राख कुरेद मत

    उस दिन मिरैकल हुआ – बशीर साहब के चेहरे पर चमक आई, उन्होंने अपनी शरीके हयात की गोद में रखे अपने सर को हौले से हिलाया और एक हलकी सी मुस्कराहट के ज़रिये फ़रमाया कि वो सुन और समझ पा रहे हैं. More

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    फ़ैज़ साहब से जलन!

    महबूब के रुमान को तो हम सबने महसूस किया ही है, लेकिन सब नहीं जानते कि इन्क़िलाब का रुमान भी बहुत सुरीला होता है, दिलकश होता है। फ़ैज़ साहब इन दोनों रुमानों में ताउम्र डूबे रहे तो इनसे जलना लाज़मी तो है न ?

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    हसीन हो कहानी

    आज की शनिवार की चाय महानगर की धड़कन से परे एक सुदूर गाँव में पकी है. किसी की तेरहवीं है. जीवन कितनी जल्द बीत जाता है. More

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    सुनो दिलजानी मेरे दिल की कहानी [मुस्लिम ताज बीबी का कृष्ण प्रेम]

    भगवान आपका अपना मुआमला है किसी को हक़ नहीं कि आपको सिखाये कि किस तरह से पूजा करनी है. न आपका हक़ बनता है किसी के धर्म, कर्म, विश्वास पर प्रश्नचिन्ह लगाने का! More

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    आवारागर्द लड़कियाँ

    नारी-विमर्श में पुरस्कार प्राप्त कवि अपनी पत्नियों को नौकरानी बना कर अपना काम बजा लेने वाली ही समझते हैं. ‘उच्छृंखल नदी हूँ मैं’ लिखने वाली कवियित्रियाँ एक साँस घुटते रिश्ते में जी रही होती हैं.. More

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    तुम्हारे कमरे में!

    इस शनिवार की चाय के साथ इसी बात पर मनन करें कि आख़िर आप प्रेम से क्या हासिल कर रहे हैं, क्या हासिल करना चाहते हैं? प्रेम नाम की अशर्फ़ी कहीं कौड़ियों के मोल तो नहीं चला रहे हैं. क्या आपका प्रेम आपका उत्थान करता है. या बस क्षणिक सुख ही है. More

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    युद्ध की विभीषिका : : कला के फूल 

    आज शनीवार की चाय के साथ एक छोटा सा फूल आपकी नज़र. संस्कृत की महान रचना ‘गीतगोविन्दम’ का एक अंश प्रस्तुत कर रही हैं BHU से नृत्य विभाग की छात्राएँ. More

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    युद्ध, अहिंसा, और सोशल मीडिया के बहादुर!

    सेना की परिकल्पना ही इस विश्व के हित में अब नहीं है. और इस बात पर भी निबंध लिखे गए हैं – सेना विहीन विश्व कोई मुंगेरीलाल का सपना नहीं, यह संभव है और सबकी ज़रूरत भी. More

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