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    मेरे दिल की राख कुरेद मत

    उस दिन मिरैकल हुआ – बशीर साहब के चेहरे पर चमक आई, उन्होंने अपनी शरीके हयात की गोद में रखे अपने सर को हौले से हिलाया और एक हलकी सी मुस्कराहट के ज़रिये फ़रमाया कि वो सुन और समझ पा रहे हैं. More

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    फ़ैज़ साहब से जलन!

    महबूब के रुमान को तो हम सबने महसूस किया ही है, लेकिन सब नहीं जानते कि इन्क़िलाब का रुमान भी बहुत सुरीला होता है, दिलकश होता है। फ़ैज़ साहब इन दोनों रुमानों में ताउम्र डूबे रहे तो इनसे जलना लाज़मी तो है न ?

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    हसीन हो कहानी

    आज की शनिवार की चाय महानगर की धड़कन से परे एक सुदूर गाँव में पकी है. किसी की तेरहवीं है. जीवन कितनी जल्द बीत जाता है. More

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    सुनो दिलजानी मेरे दिल की कहानी [मुस्लिम ताज बीबी का कृष्ण प्रेम]

    भगवान आपका अपना मुआमला है किसी को हक़ नहीं कि आपको सिखाये कि किस तरह से पूजा करनी है. न आपका हक़ बनता है किसी के धर्म, कर्म, विश्वास पर प्रश्नचिन्ह लगाने का! More

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    आवारागर्द लड़कियाँ

    नारी-विमर्श में पुरस्कार प्राप्त कवि अपनी पत्नियों को नौकरानी बना कर अपना काम बजा लेने वाली ही समझते हैं. ‘उच्छृंखल नदी हूँ मैं’ लिखने वाली कवियित्रियाँ एक साँस घुटते रिश्ते में जी रही होती हैं.. More

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    तुम्हारे कमरे में!

    इस शनिवार की चाय के साथ इसी बात पर मनन करें कि आख़िर आप प्रेम से क्या हासिल कर रहे हैं, क्या हासिल करना चाहते हैं? प्रेम नाम की अशर्फ़ी कहीं कौड़ियों के मोल तो नहीं चला रहे हैं. क्या आपका प्रेम आपका उत्थान करता है. या बस क्षणिक सुख ही है. More

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    युद्ध की विभीषिका : : कला के फूल 

    आज शनीवार की चाय के साथ एक छोटा सा फूल आपकी नज़र. संस्कृत की महान रचना ‘गीतगोविन्दम’ का एक अंश प्रस्तुत कर रही हैं BHU से नृत्य विभाग की छात्राएँ. More

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    युद्ध, अहिंसा, और सोशल मीडिया के बहादुर!

    सेना की परिकल्पना ही इस विश्व के हित में अब नहीं है. और इस बात पर भी निबंध लिखे गए हैं – सेना विहीन विश्व कोई मुंगेरीलाल का सपना नहीं, यह संभव है और सबकी ज़रूरत भी. More

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    (अ)प्रेम-कविता

    प्रेम भी यूँ तो सच है. लेकिन सबके लिए नहीं. सभी प्रेम के उपभोक्ता हैं. बस उपभोक्ता. प्रेम करके अपनी उड़ान को पंख देना सबके बस की बात नहीं. More

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    26 जनवरी : इतिहास का उपयोग क्या हो?

    इतिहास को समझने के लिए इंसान में विवेक भी हो, वरना जिसका जो जी चाहेगा इतिहास को घुमा फिरा कर अपना उल्लू सीधा करने निकल पड़ेगा। More

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    पचास : साइकिल : प्रेम : शराब : कविता

    पचपन-साठ के आसपास विधवा/ विदुर हुए लोगों की शादी आज 2019 में भी दुर्लभ है. अब जब बच्चों का घर बस चुका है, या बसने वाला है अकेले माँ या बाप की शादी की बात एक पाप की तरह लगती है. माँ के लिए रोया जाता है कि हाय कैसे रहेगी अब बेचारी लेकिन उनका भी नया घर बसे यह नहीं सोचा जाता. More

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    पुरानी गली में एक शाम : इब्ने इंशा

    आज की शनिवार की चाय का मकसद आपके साथ इब्ने इंशा के लिए उमड़े प्यार को साझा करना है. ‘मीठी बातें – सुन्दर लोगों’ में अपने आपको गिन लेने वाले इंशा जी को पढ़ना-सुनना आपके मन में सुनहला, सुगन्धित, नशीला धुआँ भर देता है. More

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