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    तुम्हें याद हो कि न याद हो : भारत में कभी समलैंगिकता जुर्म थी!

    हिंदी कविता (Hindi Studio) और उर्दू स्टूडियो, आज की पूरी पीढ़ी की साहित्यिक चेतना झकझोरने वाले अब तक के सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक/सांस्कृतिक प्रोजेक्ट के संस्थापक फ़िल्म निर्माता-निर्देशक मनीष गुप्ता लगभग डेढ़ दशक विदेश में रहने के बाद अब मुंबई में रहते हैं और पूर्णतया भारतीय साहित्य के प्रचार-प्रसार / और अपनी मातृभाषाओं के प्रति मोह जगाने के काम में संलग्न हैं. More

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    उर्दू में गीता [कृष्ण क्या हिन्दू हैं?]

    विश्व की शायद ही ऐसी कोई भाषा बची हो जिसमें गीता का अनुवाद नहीं हुआ है. और उर्दू में भी लगभग 60 अनुवाद हो चुके हैं. More

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    माँ-पिता गोरे हैं तो हे राम, तुम क्यों काले हुए?

    यह हिन्दू धर्म की ही विशेषता है कि भगवान पूज्य भी है और दोस्त भी. गोपियाँ कृष्ण को उलाहने दे सकती हैं. अब के कान्हा जो आये पलट के, गालियाँ मैंने रक्खी हैं रट के. More

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    ‘चिर अभिलाषा / चोर अभिलाषा’

    आदमी जितना झूठ अपने आप से बोलता है उतना दुश्मन से भी नहीं
    हर तरह से अपने आप को समझा दिया जाता है कि ‘बहुत अच्छा कर रहे हो’ / ‘कर ही क्या सकते हो?’
    अपनी नदी को ज़रूरतों के हिसाब से मोड़ने की जद्दोजहद में बीता जीवन – गरीब
    अपना धर्म समझ कर उसी में रहना – अमीरी है More

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    ये ज़ुबाँ हमसे सी नहीं जाती : दुष्यंत कुमार [इंक़लाब की आवाज़ और टूटे हुए साज़ का दर्द भी]

    आज शनिवार की चाय में मनोज बाजपेयी प्रस्तुत कर रहे हैं दुष्यंत कुमार जी की एक आग में बघारी हुई रचना! More

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    एक कजरी सुनिए बारिश में

    जब सखी सहेलियां सवान में झूम झूम पिया संग झूले, कजली दूर परदेश में बसे अपने साजन को याद कर तड़प तड़प रह जाए. आह ने गीत का रूप लिया. काजमल माई के चरणों में सर रख जो गीत उसने बुने, उन्ही पीड़ा के तारों से बने कजरी के लोकप्रिय लोक गीत. सावन में गाये जाने वाले ये लोकगीत अमूमन औरतों द्वारा झुंड बना कर गाये जाते हैं. More

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    प्यार-व्यार-अभिसार

    वरिष्ठ कवि उदयप्रकाश जी की कविता प्रस्तुत कर रहे हैं वरुण ग्रोवर.
    इस कविता का शीर्षक है ‘चलो कुछ बन जाते हैं’. और वीडियो देखने के बाद अपना फ़ोन, कम्प्यूटर बंद कर दें और अपना सप्ताहांत प्यार-व्यार-और अभिसार की बातों, ख़यालों में बितायें:) More

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    अभिनय असंभव है!

    आसान सी पंक्तियाँ प्रस्तुत करना ज़्यादा मुश्किल होता है. ‘एक राजा था, और एक उसकी रानी थी..’ इसे शूट करने वाले दिन सौरभ शुक्ला जी ने बहुत से आँसू बहाये, पता नहीं कितनी सिगरेट और चाय पी गयीं. अभिनय के विद्यार्थी बहुत कुछ सीख सकते हैं इससे. More

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    ईश्वर है? भूत है?

    इस लेख का मकसद यह स्थापित करना कतई नहीं है कि भगवान होते हैं या नहीं होते. महज़ यह सवाल खड़े करना है कि लोग अपने विवेक और बुद्धि से अपने तौर-तरीक़ों, अपनी आस्थाओं पर एक नयी नज़र डालें. More

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    वो दिन क्या हुए?

    पेश है एक श्रृंगार रस का वीडियो जिसे US में फ़िल्माया गया था. राधारमण कीर्तने जी फ़्लोरिडा में पंडित जसराज के स्कूल का काम सँभालते हैं और सारा फ़ीस्ट वहीं की अभिनेत्री हैं! More

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