एक वक़्त था जब फ़िल्मी दुनिया एक ऐसे शायर की कलम से सजा हुआ था कि उसके हर गीत, हर ग़ज़ल और हर कव्वाली के बोल आज तक कानों में गूंजते हैं! इस शायर का नाम था शकील बदायूँनी!
हमने आज तक कई शहीदों और सेना में सेवारत जवानों के किस्से सुने हैं, जिन्होंने जीते-जी अपनी मातृभूमि पर आंच तक नहीं आने दी। पर आज हम एक ऐसे जवान की कहानी बयान करने जा रहें हैं, जिसने शहादत के बाद भी अपने देश की रक्षा का बीड़ा उठा रखा है!
आज़ादी के सात वर्षो बाद रामधारी सिंह 'दिनकर' की लिखी एक कविता 'समर शेष है' आज भी मानो उतनी ही प्रासंगिक है! ये कविता ' याद दिलाती है कि आज भी दिल्ली में तो रौशनी है पर सकल देश में अँधियारा है!
अनवर जलालपुरी ने 'राहरौ से रहनुमा तक', 'उर्दू शायरी में गीतांजलि' तथा भगवत गीता के उर्दू संस्करण 'उर्दू शायरी में गीता' पुस्तकें लिखीं, जिन्हें बेहद सराहा गया। उन्होंने 'अकबर द ग्रेट' धारावाहिक के संवाद भी लिखे थे।