पंजाब के अमृतसर जिला के धरदेव गाँव के रहने वाले मंदीप को मशरूम खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए साल 2017 में आईसीएआर द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियों ने एलपीजी ग्राहकों के लिए कैशबैक की सुविधा उपलब्ध की है।
विनोद ने इंटरनेट से मिलिट्री मशरूम की खेती के तरीके को सीख कर, अपने एक 15x15 के कमरे को लैब में बदल दिया और करीब 1 लाख रुपए से सभी संसाधनों को जुटा कर, इसकी खेती शुरू कर दी।
जंगल में आग की समस्या को देखते हुए अभिनव ने अपने साथी, मैत्री वी के साथ मिलकर अपने वेंचर वाशिन कम्पोजिट्स के तहत, चीड़ के काँटों से अब तक बायोडिग्रेडेबल फेस शील्ड, चम्मच, मग से लेकर प्लेट्स, बाउल्स और ग्लास जैसी कई अविश्वसनीय उत्पादों को बना दिया। आज उनके उत्पादों की माँग पूरे देश में है।
नई दिल्ली में रहने वाले अमित चौधरी करीब 3 साल पहले फैशन डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद किसी वजह से डिप्रेशन में चले गए थे। इस वजह से वह तय नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें जिंदगी में करना क्या है। इसके बाद उन्होंने बागवानी शुरू करने का फैसला किया, जो बचपन से ही उनका शौक था।
कमल की खेती किसी स्थायी जल निकाय में की जाती है, लेकिन आज उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अपने छत पर 100 से अधिक पौधों की बागवानी करने वाली संगीता श्रीवास्तव गमले में कमल उगाने का तरीका साझा कर रही हैं।
जब आज की पीढ़ी 50 साल की उम्र तक रिटायर होने की योजना बना रही है, तो 105 वर्षीय पप्पम्मल की कहानी सिर्फ एक उदाहरण नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है, क्योंकि आज भी, हर दिन वह अपने खेती कार्यों को करती हैं।
IPS Hero: एक आईपीएस अधिकारी का मूल कर्तव्य समाज में कानून व्यवस्था को सुनिश्चित करना होता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में तैनात आईपीएस संदीप चौधरी अपने पहल ‘ऑपरेशन ड्रीम्स’ के तहत, ऐसे छात्रों को निःशुल्क कोचिंग देते हैं, जो सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए गुणवत्तापूर्ण कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते हैं।
बिहार के औरंगाबाद जिला के नवीनगर में रहने वाले राजेश सिंह ने कृषि आधारित उद्योग में करीब 14 वर्षों तक काम करने के बाद उन्होंने तय किया कि क्यों न खुद का कुछ शुरू किया जाए और इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी, तब उनका वेतन प्रति माह 1 लाख रुपए से भी अधिक था।