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छत्तीसगढ़ के युवा आईपीएस आरिफ शेख ने कम्युनिटी पोलिसिंग से बदल दी यहाँ की तस्वीर!

ब भी हम पुलिस के बारे में सोचते हैं, तो हमारे भीतर डर की भावना आने लगती है। बच्चो को हमेशा से बताया जाता है कि तुम होमवर्क कर लो नहीं तो पुलिस अंकल आकर पकड़ लेंगे। आम आदमी के जहन में पुलिस वालों की छवि बेहद कड़क एवं क्रूर होती है। इन सभी भ्रांतियों को छत्तीसगढ़ के युवा आईपीएस अफ़सर आरिफ शेख ने कम्युनिटी पोलिसिंग के माध्यम से तोड़ने का सफल प्रयास किया है।

क्या है कम्युनिटी पोलिसिंग?

आम जनता अक्सर पुलिस से दूर भागती है। खुद पर भी संकट आ जाए, तो वह पुलिस से संपर्क करने से पहले सौ बार सोचती है। पुलिस के प्रति विश्वसनीयता के इस गहरे संकट को दूर करने हेतु कम्युनिटी पोलिसिंग सर्वश्रेष्ठ उपाय है। इस पहल के माध्यम से पुलिस अपने हर महत्त्वपूर्ण योजना में आम जनता की राय एवं सहभागिता तय करते हुए समाज में अपराध पर नियंत्रण करती है।

छत्तीसगढ़ के जिले बालोद, बस्तर एवं बिलासपुर में आईपीएस आरिफ शेख द्वारा अनूठी मुहीम के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिणाम देखा गया है।

यह है कम्युनिटी पोलिसिंग की नायब पहल :

1. मिशन ई-रक्षा

 

इस पहल की शुरुआत बालोद ज़िले में साइबर अपराध के संबंध में लोगों को जागरूक करने के लिए किया गया है। पुलिस द्वारा प्रशिक्षित विद्यार्थियों (ई-रक्षक) व पुलिस स्टाफ के माध्यम से ,आॅनलाइन व साइबर अपराध के संबंध में ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर जागरूकता अभियान चलाया गया। गांववालो को 500 प्रशिक्षित इ -रक्षको के माध्यम से छत्तीसगढ़ी बोली में सभी प्रकार के साइबर -क्राइम के बारे में जानकरी दी गई है एवं उनसे निपटने के गुर भी सिखाये गए। इस पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में साइबर अपराध में कमी आई एवं गांववालों की मदद से पुलिस ने एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का भी भंडाफोड़ किया। इस मुहीम के बाद अब बालोद के लोग किसी भी अनजान, फेक कॉल या मेल का रिप्लाई करने से पहले पुलिस को सुचना देने लगे है। इस मुहिम के माध्यम से ज़िले के 705 गाँव में 5 लाख से ज़्यादा लोगों को साइबर प्रशिक्षण दिया गया। इतना ही नहीं इस पहल के बाद साइबर क्राइम के मामले कम हो गए हैं और अब अपराधी भी इस बात से भलीभांति परिचित हो चुके है कि अब गांववालों को बेवकूफ बनाना असंभव है

2. मिशन जीवदया


इस मुहीम का उद्देश्य बालोद जिले की जनता की सहभागिता से दुर्घटना-संभावित स्थानों का चिन्हांकन कर, दुर्घटना होने की स्थिति में नागरिकों की सहभागिता से प्राथमिक इलाज करना है। पुलिस द्वारा 200 से ज़्यादा जीवदया समिति का गठन कर, उन्हें एक्सीडेंट के तुरंत बाद दिए जाने वाले टास्क का प्रशिक्षण दिया गया व मेडिकल किट भी वितरित की गई है। इसके साथ-साथ 40 एक्सीडेंट प्रोन एरिया को चिन्हांकित कर उन क्षेत्रों की मरम्मत कर उन्हें ठीक किया गया।

इस मुहीम के कारण अब तक 30 लोगों की जान सफलता पूर्वक बचा ली गयी है। जहाँ 2015 में 138 लोगों की एक्सीडेंट के कारण मृत्यु हुई थी वहीं 2016 में आकड़ा गिरकर 108 हो गया। इस मुहीम से इंजीनियर, डॉक्टर, व्यापारी आदि सभी सदस्य जुड़े है और निरंतर अपनी सेवाएँ दे रहे है।

3.मिशन पूर्ण शक्ति


इस मुहिम का उद्देश्य महिलाओं को सभी क्षेत्रों में सशक्त बनाना व आत्मविश्वास की भावना जागृत कर, सशक्त समाज का निर्माण करना है। इस पहल के तहत महिलाओं को ‘रेडी टू रियेक्ट माड्यूल’ के तहत आत्मरक्षा का प्रशिक्षण एवं कानूनी अधिकारों के संबंध में जानकारी दी जा रही है। जिले की महिलाओं को विशेष महिला कमांडो बनाया गया है, जो आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित कर रही हैं। इस मुहीम में अब तक 5000 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से जुड़कर अपने गाँव में नशा, शराबखोरी, जुआ आदि कुरीतियों के खिलाफ़ कार्य कर रही है। इन महिलाओं द्वारा सारे कार्य पूर्ण रूप से अहिंसात्मक होते है तथा इसके परिणामस्वरूप आज गाँव-गाँव में शराब की बिक्री 25 प्रतिशत तक कम हो गई है। इन महिला कमांडो द्वारा यह कार्य महिला-शक्ति का सबसे बड़ा उदारहण है।

4. आमचो बस्तर आमचो पुलिस


इस मुहीम का अर्थ है “हमारा बस्तर, हमारी पुलिस “! क्योंकि यह विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र के लिए बनाई गयी थी, इसलिए इस मुहिम का नाम आमचो बस्तर आमचो पुलिस रखा गया। इस मुहीम के माध्यम से पुलिस के जवान आदिवासियों से न केवल मुलाकात करते थे, बल्कि उनके लोक एवं पारम्परिक त्योहारों में भी शामिल होकर खुशियां बाटते हैं। इतना ही नहीं पुलिस प्रशासन द्वारा उनके रोजमर्रा के सामान की व्यवस्था कर उनकी हर संभव मदद की जाती है। इस मुहीम के परिणामस्वरूप आदिवासियों का विश्वास पुलिस प्रशासन पर बढ़ने लगा और उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे के लिए पुलिस की हर संभव मदद की। इस पहल के कारण पांच नक्सलियों को मार गिराया गया तथा 73 से ज़्यादा नक्सलियों ने आत्म समर्पण कर नक्सलवाद का मार्ग छोड़ दिया। इस अभियान में नक्सली विचारधारा से जुड़े बच्चों के पुनर्वास की व्यवस्था की गई। नक्सलियों के लिए बाल संघम के तौर पर काम करने वाले बच्चों को लाल आंतक के साए से बाहर निकाल कर उन्हें शिक्षित करने का काम पुलिस द्वारा इसी मुहिम के तहत सफलता पूर्वक किया गया।

5 संवेदना केंद्र


एसपी आरिफ शेख ने महिलाओं की जरूरतों को समझते हुए थाने पहुंचने वाली महिलाओं से लेकर थाने में ड्यूटी पर तैनात महिला कर्मियों की परेशानियों को दूर करने का बीड़ा उठाया है। जिले के कई थानों में महिलाओं के लिए अब ‘संवेदना केंद्र’ बनाए गए हैं, जहां सेनेटरी नेपकिन, प्रसाधन कक्ष, विशेष स्वागत-सहयोग कक्ष, कानूनी सलाह, महिला स्टाफ और मेडिकल से जुड़ी सुविधाएं सब एक ही जगह उपलब्ध होंगी। थानों में महिलाओं के प्रति विशेष कक्ष की यह अवधारणा पुलिसिंग को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने की ओर एक कदम है। देश का पहला संवेदना केंद्र तोरवा में स्थापित किया गया। इसके बाद जिले के सीपत, रतनपुर व कोटा थाने में भी केंद्र स्थापित किए गए। इनके जरिए पुलिसकर्मियों को भी काफी सहूलियत मिलने लगी है।

6. राखी विद खाकी


राखी विद खाकी नाम से चलाई गई इस मुहिम के तहत रक्षाबंधन के दिन जगह-जगह तैनात पुलिस कर्मियों की कलाई पर महिलाओं और युवतियों ने राखी बांधी। उनके साथ सेल्फी ली और उसे बिलासपुर पुलिस के सोशल मीडिया पेज पर अपलोड किया गया। इस मुहीम की थीम लाइन “एक भाई जो दूर रहकर भी पास है” रखा गया था इस मुहीम का मकसद महज सोशल मीडिया आउटरीच बढ़ाना नहीं था अपितु इस पहल के माध्यम से 50 हज़ार से ज़्यादा लड़कियों के मोबाइल में हेल्पलाइन नंबर फीड करवाया गया, अब किसी भी समय इस हेल्पलाइन के माध्यम से यह लड़कियां पुलिस से सहायता ले सकती है।

कम्युनिटी पोलिसिंग की सफलता का राज़ युवा आईपीएस आरिफ शेख की दूरदर्शिता एवं बेहतर क्रियान्वयन है।

आरिफ शेख कहते है, “पोलिसिंग एक सर्विस डिलीवरी की तरह है, आपको हमेशा आम जनता के अनुसार बेहतर से बेहतर प्रोग्राम बनाना होगा। अगर आपको समाज के लिए कुछ बेहतर करना है तो क्यों न समाज को साथ लेकर किया जाए।”

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित हुए आईपीएस आरिफ शेख!

छत्तीसगढ़ के युवा एसपी आरिफ शेख देश के पहले आईपीएस अधिकारी बन गए हैं, जिन्होंने कम्युनिटी पुलिसिंग के लिए अमेरिका में लगातार दो बार प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता है। अमेरिका के वर्जिनिया में हाल ही में एक समारोह में आरिफ शेख को अपराध अन्वेषण में उत्कृष्ट काम के लिए लीडरशिप अवार्ड दिया गया।

पुलिसिंग अवार्ड के क्षेत्र में देश भर में चर्चित एसडब्ल्यूआई ने भी आरिफ को इनोवेशन एंड एक्सीलेंसी अवार्ड के लिए चुना है। इसके साथ- साथ आरिफ शेख अमेरिका की प्रसिद्ध लुइस डेकमर ट्रस्ट के भी एक एक मात्रा नॉन-अमेरिकन सदस्य है।

कम्युनिटी पोलिसिंग के माध्यम से समाज में प्रताड़ित महिलाओं, बच्चों और अन्य कमजोर वर्गों की मदद के लिए आईपीएस आरिफ शेख की टीम कई अभियानों के द्वारा लोगों को जागरूक करने का काम कर रही है और इस प्रकार बदलाव की एक यात्रा शुरू हुई है। इस युवा आईपीएस की सोच एवं जज्बे को सलाम!


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Written by जिनेन्द्र पारख

जिनेन्द्र पारख हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, रायपुर के छात्र हैं. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से आते हैं. इनकी रुचियों में शुमार है – समकालीन विषयों पर पढ़ना, लिखना जीवन के हर हिस्से को सकारात्मक रूप से देखना , इतिहास पढ़ना एवं समझना.

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