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जेरेमी लालरिनुंगा: यूथ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला भारतीय एथलीट!

जेरेमी लालरिनुंगा (ट्विटर/डीडी नेशनल)

मिज़ोरम के आइज़ोल के 15 वर्षीय जेरेमी लालरिनुंगा ने अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में चल रहे यूथ ओलंपिक के दौरान 62 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग केटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा है।

इसी के साथ जेरेमी यूथ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गये हैं। और अब यूथ ओलंपिक में भारत के चार पदक हो गए, जिसमें तीन रजत शामिल है। उन्होंने इस प्रतियोगिता में कुल 274 किलो (124 किलोग्राम +150 किलोग्राम) वजन उठाया। इससे पहले वह वर्ल्ड युथ सिल्वर-मेडलिस्ट भी रहे हैं।

“मैंने देखा है कि जेरेमी सबसे अच्छा युवा वेटलिफ्टर है। उसकी क्षमता को देखते हुए हम पिछले तीन सालों से पटियाला शिविर में वरिष्ठ एथलीट के साथ उसे प्रशिक्षण दे रहे हैं,” द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता और भारतीय वेटलिफ्टिंग के प्रमुख कोच विजय शर्मा ने कहा। विजय शर्मा ने राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मिराबाई चानू को भी प्रशिक्षित किया है।

भारत के इस युवा खिलाड़ी जेरेमी का सफ़र मात्र छह साल की उम्र से शुरू हुआ था और उनका पहला खेल वेटलिफ्टिंग नहीं बल्कि बॉक्सिंग था। क्योंकि उनके पिता राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर थे।


“मेरे पिता, राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर थे। जब भी वे जिम में कसरत करते, तो मैं उनके साथ जाता था। मैंने उनसे खेल के सिद्धांतों को सीखा है। एक दिन मैंने सुना कि एक पूर्व खिलाड़ी मेरे घर के पास वेटलिफ्टिंग में बच्चों को प्रशिक्षण दे रहें हैं। तो मैंने सोचा कि मैं मुक्केबाजी के बजाए इस ताकत के खेल में कोशिश करूंगा,” जेरेमी ने द ब्रिज को बताया।

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जेरेमी के पिता उसे पुणे में सेना खेल संस्थान में परीक्षण के लिए लेकर गये। यह संस्थान सात विशिष्ट खेल- तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, डाइविंग, रेसलिंग फेंसिंग और वेटलिफ्टिंग में प्रशिक्षण प्रदान करता है।

यूथ नेशनल वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में अपनी पहली प्रतियोगिता में, उन्होंने 50 किलो वर्ग में 198 किलोग्राम भार उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। उनकी सफलता के बाद, कोच विजय शर्मा ने उन्हें 50 से 56 किलोग्राम तक कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया और मलेशिया में उन्होंने युवा विश्व वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में 234 किलोग्राम उठाकर रजत पदक जीता।

जेरेमी ने राष्ट्रमंडल युवा वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता था। हाल ही में 56 किलोग्राम से 62 किग्रा वर्ग में प्रवेश किया और इसी में उन्होंने अगस्त में 273 किग्रा का अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर किया है। बस तीन महीने पहले, उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 250 किलोग्राम था।

जेरेमी की इन सफलताओं को देखते हुए, इस बात में कोई संदेह नहीं कि साल 2020, 2024 और 2028 के ओलंपिक में देश उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद कर सकता है। बशर्ते, वह किसी चोट या फिर विवाद से दूर रहे। और साथ ही, उन्हें बस जरूरत है एएसआई और एनआईएस पटियाला में उनके कोचों के सही मार्गदर्शन की।

संपादन – मानबी कटोच


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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