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In a viral LinkedIn post, Bhavesh Lohar, son of a domestic worker from Rajasthan’s Udaipur, shared his story of how he went from walking barefoot to school to earning his dream job as an engineer at Ford Motor Company.

नंगे पांव स्कूल जाते हुए जिस कार का देखा था सपना, आज उसी कंपनी में बने सॉफ्टवेयर इंजीनियर

हाल ही में, LinkedIn पोस्ट में, भावेश ने अपनी कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि एक बड़ी कंपनी में नौकरी हासिल करने के लिए उन्हें किस तरह के हालातों से गुजरना पड़ा। उनका यह LinkedIn पोस्ट काफी वायरल हो रहा है।

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यदि आप मेहनती हैं, तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसे लोग विपरीत से विपरीत परिस्थति में भी अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिनका बचपन संघर्षों में बिता लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज वह एक ऑटोमोबाइल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उनकी कहानी (career inspiration) इन दिनों LinkedIn पर लोग खूब पढ़ रहे हैं।

यह कहानी राजस्थान के उदयपुर में रहने वाले भावेश लोहार की है। वह जब छोटे थे,  तो हर रोज़ तपती गर्मी में हाईवे पर नंगे पांव चला करते थे। उस दौरान भावेश, अपने दोस्तों से बात करते थे कि एक दिन जब वह कुछ बड़ा कर लेंगे, तो कौन सी कार खरीदेंगे। एक बार जब उन्होंने एक स्थानीय समाचार पत्र में फोर्ड फिगो का विज्ञापन देखा, तो देखते ही उन्हें उस गाड़ी से प्यार हो गया।

समय का खेल देखिए, मेहनत के बल पर भावेश ने उसी फोर्ड मोटर कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी हासिल की है, जिसकी कार का विज्ञापन उन्होंने बचपन में अखबार में पढ़ा था। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि भावेश की माँ मेड का काम करतीं हैं। तमाम तरह की आर्थिक कठिनाइयों से जूझते हुए, भावेश ने यह सिद्ध कर दिया कि मेहनत के बल पर आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं, बस आपकी इच्छाशक्ति मजबूत होनी चाहिए।

6X6 के एक कमरे में रहते थे 8 लोग

भावेश एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान), भोपाल में टेक्नोलॉजी के छात्र हैं। उनकी माँ घरों में काम करतीं हैं, जिन्होंने भावेश की पढ़ाई के लिए पैसे जोड़ने की खातिर बहुत मेहनत की। उनके बहनों ने भी उनके सपनों में पूरा साथ दिया। भावेश ने भी कॉलेज में दाखिले के लिए कई अलग-अलग तरह की नौकरियां की।

COVID-19 महामारी के दौरान, भावेश को हॉस्टल छोड़कर, अपने एक कमरे के घर में वापस आना पड़ा। उनके घर में पहले से ही सात सदस्य थे। उन्हें पढ़ाई करने के लिए एकांत जगह बड़ी मुश्किल से मिल पाती थी। लेकिन भावेश, इस समस्या के सामने भी नहीं झुके। उन्होंने पढ़ाई करने के लिए, खुद से एक कमरा बनाया और बिना कोई शिकायत किए, अपने भविष्य को सुधारने की तैयारियों में लग गए। सच्ची और कड़ी मेहनत के दम पर, उन्हें कई बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट और इंटरव्यू के ऑफर मिले।

हाल ही में, LinkedIn पोस्ट में, भावेश ने अपनी कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि एक बड़ी कंपनी में नौकरी हासिल करने के लिए उन्हें किन किन हालातों से गुजरना पड़ा। उनका यह LinkedIn पोस्ट काफी वायरल हो रहा है।

भावेश का पोस्ट:

आज भी मुझे, चिलचिलाती धूप में नंगे पांव, हाईवे पर चलते हुए एक सरकारी स्कूल में जाना, अच्छे से याद है। मैं और मेरे दोस्त अक्सर बातें किया करते थे कि जब हम बड़े आदमी बन जाएंगे, तो कौन सी गाड़ी खरीदेंगे। उन दिनों मुझे फोर्ड फिगो काफी पसंद थी। एक स्थानीय अखबार में इस कार का विज्ञापन देखने के बाद से, बस यही सोचता था कि जब मेरे पास पर्याप्त पैसे आ जाएंगे, तो यही कार खरीदूंगा।

आज मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैंने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में फोर्ड मोटर कंपनी ज्वाइन की है। मेरी माँ को इस दिन का लंबे समय से इंतज़ार था। कोरोना के कारण मुझे अपने कॉलेज के हॉस्टल को छोड़कर अपने घर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। मेरे परिवार में 7 सदस्य हैं और कमरा एक ही था। इसलिए मैंने अपनी पढ़ाई के लिए खुद  एक छोटा सा कमरा बनाया।

मैं इसी 6X6 के कमरे में सोता था, पढ़ाई करता था। यहीं बैठकर मैंने बहुत कुछ सीखा, कुछ बड़ी कंपनियों में इंटरव्यू दिए और फोर्ड में चयनित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मेरी प्यारी बड़ी बहनों का मुझपर बहुत एहसान है। उन्होंने मेरे सपनों को सच करने के लिए, अपने सपनों का बलिदान दिया। उन्होंने परिवार को पेट भरने के लिए काम किया और पैसा कमाया। मेरी माँ, मेरी पढ़ाई के लिए लोगों के घरों में काम करती थीं। क्योंकि मेरे पिता महीने के 7 से 8 हज़ार रुपये कमाते थे और लगभग वे सारे पैसे उनके कर्ज़ भरने में चले जाते थे।

मैंने बचपन में, अपनी माँ से वादा किया था कि जब मैं पैसे कमाना शुरू करूँगा, तो उन्हें काम करने की ज़रूरत नहीं होगी और मैं उनके आराम करने के लिए सोने का झूला बनाऊंगा। कॉलेज में, मुझे अपनी पढ़ाई के लिए पार्ट-टाइम नौकरी करनी पड़ती थी, इसलिए मुझे कॉलेज सोसाइटी छोड़नी पड़ी।

मैं, खुद को भाग्यशाली समझता हूं कि मैंने अपने जीवन में ये संघर्ष देखे। क्योंकि उन कठिनाइयों ने ही मुझे अपने जीवन में हर परिस्थिति का सामना करने के लिए मजबूत बनाया।

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मुझे पता है कि बहुत से छात्र, इससे भी कठिन जीवन जी रहे हैं। मैं आपको केवल इतना ही बताना चाहता हूं कि अपना काम ईमानदारी से करते रहें और सकारात्मक रहें। क्योंकि भगवान के पास आपके लिए बेहतर योजनाएं हैं, जैसा कि गीता में कहा गया है “कर्म किए जा, फल की चिंता ना कर”।

मेरी यात्रा में मेरा साथ देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद।

मेरे कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान मुझे प्रेरित रखने के लिए प्यारे बब्बर भैया, बहुत शुक्रिया।

फोर्ड में मेरे पहले दिन को यादगार बनाने के लिए सृजना उपाध्याय, यश राठी वैशाली दामोदरन, धनंजय नायर सर को धन्यवाद।”

तो यह थी भावेश के संघर्षों से सफलता तक के सफर की कहानी। सच है, बस कर्म करते जाइए, क्योंकि आपके बस में कर्म ही है, फल नहीं।

मूल लेख- रिया गुप्ता

संपादन- जी एन झा

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