in ,

कोयम्बतूर के तीन युवको ने ठानी भूख से जंग लड़ने की और इस काम को आगे बढाने के लिए जीता 1000$ का इनाम भी !

एक नेक सोच और उसे पूरा करने का जस्बा हो तो रास्ते खुद ही निकल आते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ कोयम्बतूर के पद्मनाबन गोपालन के साथ।

ज़रुरतमंदों के लिए कुछ करने की इच्छा तो उसके अन्दर थी पर न तो पद्मनाबन के पास कोई आर्थिक सहारा था और न ही कोई पहचान। और यह दोनों ही उसे मिला अमरीका की स्वयं सेवी संस्था “पोल्लिनेशन प्रोजेक्ट” द्वारा आयोजित एक प्रतियोगिता में भाग लेकर।

यह प्रतियोगिता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होती है जिसमे अलग अलग देशो की संस्था भाग लेती है। जीतने वाली संस्था को इनाम के तौर पर अपनी संस्था को आगे बढ़ने के लिए पैसे दिए जाते है। इस बार यह प्रतियोगिता पब्लिक वोटिंग पर आधारित थी। जुलाई मध्य में वोटिंग लाइन बंद कर दी गई थी।

इस साल इस प्रतियोगिता में पद्मनाबन की संस्था ‘नो फ़ूड वेस्ट’ ने भी हिस्सा लिया था जो की भारी मात्रा के वोटो से विजयी रही। पुरस्कार स्वरुप उसे अपनी संस्था को आगे बढ़ने के लिए $1000 की राशि भी दी गयी।

nfw

Photo: Pollination Project

पद्मनाबन बताते हैं

” एक बार मैं एक शादी की पार्टी से बहार निकल रहा था। फटी साड़ी में एक बहुत ही दुबली और कमज़ोर औरत मेरे पास आई और खाने के लिए भीख मांगने लगी। मैं जिस पार्टी से निकला था वहां बहुत सा खाना फेंका जा रहा था, क्यूंकि वहां पर मौजूद मेहमानों के लिए वह खाना बहुत ज्यादा था। इस दृश्य ने मेरी सोच बदली और मैंने इसके लिए कुछ करने का ठान लिया।”

अक्टूबर २०१४ से पद्मनाबन और उनके दो दोस्त सुधाकर और दिनेश ‘नो फ़ूड वेस्ट’ अभियान से जुड़े हैं जिसमे पार्टी और  होटलों से बचा हुआ खाना ले कर ज़रुरतमंदों में बाँट दिया जाता है। फिलहाल यह संस्था कोयम्बतूर में ही काम कर रही है।

शुरुवाती दिनों में इन्होने आयोजको से बात की थी पर किसी ने इन्हें मदद करने में कोई उत्साह नहीं दिखाया। तब इन्हें सारा खर्च खुद ही उठा कर इसे आगे बढ़ाना पड़ा था।

इस प्रतियोगिता को जीतने के बाद अब ‘नो फ़ूड वेस्ट’ के लिए स्थिति बदल रही है और इस पहचान से संस्था को उनलोगों से भी मदद मिलनी शुरू हो गयी है जिन्होंने कभी इनकी ओर ध्यान नहीं दिया था।

Padmanaban, the boy behind the initiative.
पद्म्नाबन
Photo: Twitter

‘नो फ़ूड वेस्ट’ का अगला कदम एक मोबाइल एप्प को लांच करना होगा जिस से लोगो को अपने आस पास की ऐसी जगहों के बारे में पता चले जहाँ वे बचा हुआ खाना दान कर पायें। यह एप्प आगामी २ अक्टूबर को लांच किया जाएगा। इसके अलावा इस संस्था को आस पास के ५ शहरों में फैलाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

अक्टूबर १६ को ‘वर्ल्ड फ़ूड डे’ मनाया जाता है। इसी दिन ‘ नो फ़ूड वेस्ट’ संस्था की ओर से एक घंटे की ‘जीरो हंगर ऑवर’ की मुहीम चलायी जायेगी।

nfw3

Photo: Facebook

इसमें जीती हुई राशी से गरीबों को खाना खिलाया जाएगा। इस मुहीम का मकसद लोगों को बचे हुए खाने के प्रति जागरूक बनाना है।

इस बड़ी जीत के लिए पद्मनाबन की पूरी टीम को बधाई। हम उम्मीद करते हैं कि इनकी इस जीत से दूसरी संस्थाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।


 

इसी तरह खाने को ज़रुरात्मंदो तक पहुँचाने वाले हंगर हीरोज़ के बारे में यहाँ पढ़े !

शेयर करे

Written by निधि निहार दत्ता

निधि निहार दत्ता राँची के एक कोचिंग सेंटर, 'स्टडी लाइन' की संचालिका रह चुकी है. हिन्दी साहित्य मे उनकी ख़ास रूचि रही है. एक बेहतरीन लेखिका होने के साथ साथ वे एक कुशल गृहणी भी है तथा पाक कला मे भी परिपक्व है.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

फैशन डिज़ाइनर ने सिखाया झुग्गी में रहने वाले बच्चो को रेनकोट बनाना!

इशान के बनाये लकड़ी के पुल की मदत से अब स्कूल जा पाते है झुग्गी में रहने वाले बच्चे!