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Potato chips making

छोटे से जुगाड़ से शुरू किया बड़ा बिज़नेस, अमेरिका तक पहुंचा रहे झटपट चिप्स बनाने की मशीन

राजकोट के जगदीश बरवाडिया ने घर पर ही एक ऐसी manual wafer making machine तैयार की है, जो आलू के चिप्स और सलाद कटिंग करने का काम आसान बना देती है।

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मार्च और अप्रैल का महीना आते ही भारत के ज्यादातर घरों में अचार, पापड़ या सालभर चलनेवाले चिप्स बनने लगते हैं। घंटों चिप्स को कटर से काटने और धूप में सुखाने के बाद, उसे बड़े से डिब्बे में भरकर रखा जाता है। गुजरात सहित देश के कई राज्यों में, आलू के बने ये चिप्स उपवास में खाए जाते हैं। इस काम में सबसे ज्यादा मेहनत आलू की एक समान कटिंग करने में लगती है। इसके अलावा, घर में रोज़ का खाना बनाने में भी सबसे ज्यादा समय, सब्जियों और सलाद की कटिंग करने में ही लगता है। हालांकि, आजकल बाजार में कटिंग के लिए कई मशीनें (wafer making machine) मौजूद हैं, जो आपका काम आसान बना देती हैं। 

ऐसी ही एक और  मेन्युअल मशीन (manual wafer machine) तैयार की है, राजकोट के जगदीश बरवाडिया ने। जगदीश एक निजी कंपनी में काम करते हैं। वह बताते हैं कि सैलरी से घर का गुजारा बड़ी मुश्किल से चल पाता था, इसलिए हमेशा से ही वह, अपना कुछ काम करना चाहते थे। साल 2015 में, उन्होंने अपने ससुर से इस बारे में बात की और सुझाव मांगा। जगदीश बताते हैं, “तक़रीबन 20 साल पहले मेरे ससुर ने चिप्स बनाने की एक मशीन बनाई थी। उन्होंने मुझे अपनी मशीन का एक नमूना भी दिखाया। तभी मेरे मन में, इस मशीन को बनाने और इसका बिज़नेस करने का ख्याल आया।” गुजरात में लोग आलू के चिप्स खाना और इसे घर पर बनाना पसंद करते हैं। इसलिए जगदीश को पूरी उम्मीद थी कि यह मशीन (potato wafer machine) लोगों को बेहद पसंद आएगी। 

जगदीश ने ऑफिस के बाद बचे समय का उपयोग करके, इस मशीन (wafer chips making machine) को बेहतर ढंग से बनाने का काम शुरू किया। सिर्फ दसवीं तक पढ़े जगदीश को, बचपन से ही कुछ नया सीखने और नई चीजों का प्रयोग करने का शौक़ था। 

potato chips making machine business

मशीन की विशेषताएं 

घर में मौजूद परंपरागत चिप्स बनाने की मशीन (wafer making machine) में अक्सर चिप्स काटते समय, हाथ कटने का डर रहता है। वहीं, ऑटोमेटिक इलेक्ट्रिक कटिंग मशीनें काफी महंगी आती हैं, जो हर कोई नहीं खरीद सकता। ऐसे में, जगदीश की बनाई यह मशीन, मेन्युअली काम करती है (manual wafer machine) और घंटो का काम मिनटों में कर देती है। मशीन की सरल बनावट, इसे उपयोग करने में आसान बनाती है। इसे प्लस्टिक की बजाए, स्टील और लोहे की मदद से बनाया गया है। इसलिए यह बेहद टिकाऊ भी है। यह ना सिर्फ चिप्स, बल्कि सलाद काटने के काम भी आती है। जगदीश बताते हैं, “बाजार में मौजूद दूसरी कटिंग मशीन्स प्लास्टिक की बनी होती हैं, जो टिकाऊ नहीं होतीं। इसलिए लोग परंपरागत मशीन को ही इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। वहीं मेरी बनाई मशीन काफी वजनदार है, जो परंपरागत मशीन का अनुभव देती है।”

शुरुआती मुश्किलें 

वह बताते हैं कि साल 2015 में, जब उन्होंने इस मशीन का बिज़नेस शुरू करने के बारे में सोचा, तब उनके पास कुछ पूंजी नहीं थी। चूँकि, उन्हें इसके पार्ट आदि बनाने के लिए पूंजी की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने अपने एक भाई की मदद ली और उसे अपना बिज़नेस पार्टनर भी बनाया। शुरुआती कुछ महीनों में मनचाहा बिज़नेस नहीं होने से, उनके भाई ने बिज़नेस बंद करने का फैसला कर लिया। जगदीश कहते हैं, “हालांकि, यह आईडिया मेरा था और मुझे इसपर यकीन था, इसलिए मैंने इसे अकेले ही करना शुरू किया।” फ़िलहाल जगदीश अपने बड़े भाई के साथ मिलकर मशीन की असेम्बलिंग और मार्केटिंग का काम कर रहे हैं।  

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सोशल मीडिया से की मशीन की मार्केटिंग 

वह अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए, गुजरात के तक़रीबन हर शहर के मशीन डीलर के पास गए। उन्हें कहीं से, कोई फायदा नहीं हुआ। तभी उनके एक दोस्त ने उन्हें सोशल मीडिया के ज़रिये मार्केटिंग का सुझाव दिया। उन्होंने फेसबुक और व्हाट्सऐप के माध्यम से अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करना शुरू किया। इस तरह उन्हें गुजरात ही नहीं, बल्कि देशभर के ग्राहकों के ऑर्डर्स मिलने लगे। वह कहते हैं “पिछले साल कोरोना के कारण बिल्कुल बिज़नेस नहीं हो पाया था, जबकि इस साल ऑनलाइन काफी ऑर्डर्स मिले।” वह मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तक अपनी मशीन कुरियर के माध्यम से पहुंचा रहे हैं।  इसी साल, उनको अमेरिका से भी एक ऑर्डर मिला था। उन्हें उम्मीद है कि आनेवाले समय में, उन्हें विदेशों से और ऑर्डर मिलेंगे। 

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ग्राहकों के बीच भी हिट है मशीन 

जगदीश इस मशीन को सीताराम ब्रांड के नाम से बेच रहे हैं। चिप्स और दूसरे नमकीन का गृह उद्योग चलानेवाली, मनीषा ने इनकी मशीन खरीदी है। वह मशीन के बारे में कहती हैं, “पहले हम हाथ से चिप्स बनाने की मशीन का इस्तेमाल करते थे। जिससे तक़रीबन 50 किलो चिप्स बनाने में एक पूरा दिन लग जाता था। जबकि इस मशीन से मात्र दो घंटे में, 50 किलो चिप्स स्लाइस तैयार हो जाती है, वह भी बड़े आराम से। जिससे हमारे समय और पैसों की बचत तो हुई ही, साथ ही चिप्स की क्वालिटी भी बहुत बढ़िया है।”

आनेवाले समय में जगदीश, छोटे-छोटे रेस्तरां चलानेवाले लोगों के लिए विशेष मशीन बनाने की तैयारी कर रहे हैं। वह एक ऐसी मशीन बनाना चाहते हैं, जो हर तरह की कटिंग के लिए काम आ सके। साथ ही, किसी भोजन के लिए सब्जी और सलाद काटने के काम आए। इससे उनका समय बचेगा और मुनाफा बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। 

आप इस मशीन से जुड़ी कोई जानकारी या इसे खरीदने के लिए जगदीश बरवाडिया को 8866619226 पर संपर्क कर सकते हैं। 

मूल लेख – कौशिक राठौड़

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