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इस गणेश-चतुर्थी इन तरीकों से करें बप्पा को चढ़ने वाले फूलों का पुनः प्रयोग!

मारे यहाँ भगवान की पूजा के विधि-विधान में फूलों का अत्यंत महत्व है। कोई भी पूजा भगवान को फूल अर्पित किये बिना पूरी नहीं होती।

मंदिरों में भक्त रोज न जाने कितने ही फूल चढ़ाते होंगे। अगर टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट की माने तो केवल दिल्ली के झंडेवालान मंदिर से ही हर रोज लगभग 200 किलो फूल इकट्ठे होते हैं जो मंगलवार और रविवार को 500 किलो तक पहुंच जाते हैं! नवरात्री के दिनों में तो एक टन प्रति दिन भी हो सकता है।

परन्तु समस्या इसके बाद शुरू होती है कि इन फूलों का प्रबंधन कैसे किया जाये। क्योंकि इन्हें नदी या किसी भी पानी के  स्त्रोत में बहाना प्रदूषण को बढ़ावा देना है। ऐसे में बहुत से स्टार्ट-अप और कंपनियां आपको ऐसे विकल्प दे रहीं हैं, जिनसे आप इन फूलों का बिना किसी हानिकारक प्रभाव के प्रबंधन कर सकते हैं।

झंडेवालान मंदिर में एंजेलिक फाउंडेशन द्वारा एक ऐसा मशीन लगाया गया है, जिसमें फूलों को डालकर उनसे गंध-रहित खाद बनाया जाता है। मंदिर के साथ 24 साल से काम कर रहे सुरेंद्र कुमार को इस मशीन की ट्रेनिंग दी गयी है। वे इस मशीन को 15 दिन चलाते हैं और उन्हें हर दिन 30 किलो खाद मिलता है।

यह फाउंडेशन अब तक आठ धार्मिक स्थलों पर यह मशीन लगा चुकी है। इससे बने खाद की मांग आसपास के किसान, स्कूल व अन्य मंदिर भी कर रहे हैं।

एक दूसरा विकल्प कानपूर में अंकित अग्रवाल और करण रस्तोगी की फाउंडेशन ‘हेल्प अस ग्रीन’ दे रही है। वे लगभग 49 मंदिरों से जुड़े हुए हैं और रोज़ इन मंदिरों से लगभग 4.2 टन फूल इकट्ठा करते हैं। वे इन फूलों से अगरबत्तियां बनाते हैं। उनके इस काम से 73 औरतों को भी रोजगार मिला हुआ है।

मुंबई के निखिल और प्रीतम गम्पा द्वारा शुरू किया गया ‘ग्रीन वेव’ भी फूलों से अगरबत्ती बनाकर इसका प्रबंधन कर रहा है। उनका काम मुंबई, लखनऊ और हैदराबाद में फैला हुआ है।

एक पीएचडी छात्रा और केमिकल इंजीनियर परिमला शिवप्रसाद ने फूलों के प्रबंधन का एक और उम्दा तरीका खोज निकाला है। वे इन फूलों को इकट्ठा करके और लैब में ले जाकर इनसे एक प्रक्रिया द्वारा प्राकृतिक तेल बनाती हैं। और बाकी बचा हुआ कचरा खाद में परिवर्तित हो जाता है।

इस तरह से ये सभी लोग भगवान को अर्पित होने वाले फूलों को एक नया रूप दे रहे हैं और ये प्रक्रिया हमें ‘जीवन का चक्र’ भी समझाती है।

तो इस गणेश चतुर्थी के पर्व पर आप भी बप्पा को चढ़ने वाले फूलों को किसी जलाशय या फिर नदी में फेंकने की बजाय उन्हें खाद के रूप में इस्तेमाल करें। या फिर आप इन सभी स्टार्ट-अप से भी जुड़ सकते हैं। इस तरह से आप गणपति जी को भी प्रसन्न करेंगें और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखेंगे।

(संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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