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सिविल इंजीनियर से बन गए ‘लखनऊ कबाड़ीवाला,’ प्रतिमाह कमाई 70000 रुपए

सिविल इंजीनियर से बन गए ‘लखनऊ कबाड़ीवाला,’ प्रतिमाह कमाई 70000 रुपए

लखनऊ, उत्तर-प्रदेश में रहने वाले 29 वर्षीय ओम प्रकाश प्रजापति, सिविल इंजीनियर के तौर पर बनारस में नौकरी कर रहे थे। लेकिन, लॉकडाउन में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप, ‘लखनऊ कबाड़ीवाला’ शुरू किया।

कोरोना महामारी की वजह से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। इस वजह से, दुनियाभर में लोग बहुत सी परेशानियां झेल रहे हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने आपदा में भी अवसर की तलाश की और अपना बिजनेस शुरू करने का रिस्क उठाया। लखनऊ के 29 वर्षीय ओम प्रकाश प्रजापति इन्हीं लोगों में से एक हैं। 

ओम प्रकाश हमेशा से अपना कोई काम करना चाहते थे और एक आईडिया पर वह काफी समय से काम भी कर रहे थे। लेकिन किसी न किसी वजह से, वह नौकरी छोड़कर काम शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। उन्होंने द बेटर इंडिया को बताया, “मैंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। डिप्लोमा पूरा होने के बाद, कुछ समय तक लखनऊ में ही एक कंपनी में काम किया और फिर बनारस में एक कंपनी ज्वॉइन कर ली। अपना स्टार्टअप शुरू करने से पहले, मैं बनारस में ही काम कर रहा था। जहाँ मुझे हर महीने 30 हजार रुपये मिलते थे।” 

पिछले साल देश में लॉकडाउन शुरू होने से पहले, ओम प्रकाश छुट्टी लेकर घर आए हुए थे। उन्हें पता नहीं था कि उनकी चंद दिनों की छुट्टी महीनों में बदल जाएगी। वह बताते हैं कि लॉकडाउन के समय, उनका बनारस वापस जाना नहीं हो पाया। यही वह समय था, जब उन्हें लगने लगा कि अब उन्हें अपना बिजनेस शुरू कर देना चाहिए। उन्होंने अपने घर-परिवार में बात की और खुद को एक मौका देने की ठानी। जून 2020 में, उन्होंने अपना स्टार्टअप ‘लखनऊ कबाड़ीवाला‘ शरू किया। 

नौकरी करते समय मिला आईडिया:

Civil Engineer
Om Prakash

ओम प्रकाश कहते हैं कि इस काम का आईडिया, उन्हें अपनी नौकरी के दौरान ही मिला था। उन्हें काम के दौरान, अलग-अलग जगहों पर जाकर ‘स्क्रैप मैनेजमेंट’ (कबाड़े/कचरे का प्रबंधन) भी करना पड़ता था। वहाँ जो लोग कबाड़ खरीदने आते थे, वे उल्टे-सीधे दाम लगाकर चीजें ले जाते थे। ओम प्रकाश अक्सर सोचते थे कि अगर इसी काम को सही ढंग और अच्छी व्यवस्था के साथ किया जाए तो यह एक अच्छा बिजनेस हो सकता है। उन्हें आईडिया मिल चुका था और बस वह इस पर काम करना चाहते थे। इसलिए 2019 में ही, उन्होंने अपने बिजनेस का नाम सोचकर अपनी वेबसाइट भी बनवा ली। 

उन्होंने बताया, “मुझे लगा कि अगर मैं वेबसाइट बनवा लूंगा तो इसे शुरू करने की चाह बनी रहेगी। इसलिए लॉकडाउन में, जब मुझे लगा कि शायद इस समय बिजनेस शुरू करना सही होगा तो मैंने दोबारा नहीं सोचा। परिवार वालों ने भी कहा कि अगर बिजनेस करना चाहते हो तो एक बार ट्राई कर लो। परिवार का साथ मिलने से मेरी हिम्मत और बढ़ गयी। इसलिए, मैंने नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया।” 

हालांकि, ओम प्रकाश के आसपास ऐसे बहुत से लोग थे, जिन्हें उनका यह फैसला सही नहीं लगा। कई लोगों ने उनसे कहा भी कि इस माहौल में नौकरी छोड़ना समझदारी नहीं है। लेकिन, ओम प्रकाश ने ठान लिया था कि वह असफलता की चिंता किए बगैर, सिर्फ अपने काम पर फोकस करेंगे। अगर उन्हें असफल ही होना है तो क्यों न एक बार कोशिश करके ही असफल हुआ जाए! जून 2020 में ओम प्रकाश ने अपना काम शुरू किया। फंडिंग के लिए, उन्होंने अपनी बचत के पैसे इस्तेमाल किए और परिवार वालों ने भी उनकी काफी मदद की।

कैसे करते हैं काम: 

ओम प्रकाश ने कबाड़ के लगभग 33 सामानों का मूल्य (प्राइस लिस्ट) अपनी वेबसाइट पर डाला हुआ है। जिनमें अखबार, एल्यूमीनियम, तांबा, किताबें, बैटरी, कूलर, केबल, फाइबर और इलेक्ट्रॉनिक जैसे सामान शामिल हैं। अगर किसी को अपना कोई पुराना या खराब सामान, कबाड़ वाले को देना है तो उसके लिए यह वेबसाइट एक बेहतर विकल्प है। लोग इस वेबसाइट पर जाकर या फोन के माध्यम से, अपने सामान के बारे में जानकारी दे सकते हैं। उनसे बातचीत के बाद, ओम प्रकाश की टीम उनके घर पहुँचती है और इलेक्ट्रॉनिक मशीन से तौल कर कबाड़ की खरीद की जाती है।

साथ ही, ठेले पर घर-घर से कबाड़ इकट्ठा करने वाले लोगों से भी ओम प्रकाश कबाड़ खरीदते हैं। वह कहते हैं कि इस काम में सोशल मीडिया से उन्हें बहुत मदद मिली है। उन्होंने अब खुद का एक गोदाम बना लिया है, जिसमें उन्होंने ज्यादा से ज्यादा खरीदा हुआ कबाड़ भरना शुरू कर दिया है। ओम प्रकाश कबाड़ के सामान खरीदने के बाद, इस क्षेत्र में काम करने वाले बड़े डीलर्स या रिसायक्लर्स को बेचते हैं। जो फ़िलहाल सिर्फ लखनऊ तक ही सिमित हैं। शहर में उनके लगभग पांच हजार ग्राहक हो गए हैं। 

Civil Engineer to Lucknow Kabadiwala

उनके इस काम में तीन लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है। वर्तमान में, ओम प्रकाश की कमाई लगभग 70 हजार रुपए प्रति महीना है। उन्हें संतोष है कि वह अब अपना काम कर रहे हैं, जो वह हमेशा से करना चाहते थे। यहाँ तक का उनका सफर, कई तरह की चुनौतियों से भरा हुआ रहा। शुरुआत में उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ा लेकिन, उनके परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया। 

उन्होंने कहा, “मैंने कई बार सोचा कि क्या मुझे यह काम बंद कर देना चाहिए? लेकिन, घरवालों ने हमेशा मेरा हौसला बनाये रखा। उन्होंने कहा कि कोशिश करते रहो, अगर एक-दो बार में ही हार मान जाओगे तो काम करने का क्या फायदा। आज मुझे खुशी है कि मैंने हार नहीं मानी क्योंकि, अब हमारा कारोबार आगे बढ़ने लगा है।” 

आगे की योजना: 

फिलहाल, ओम प्रकाश और उनकी टीम सिर्फ लखनऊ में ही काम कर रहे हैं और वे सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही कबाड़ इकट्ठा करते हैं। फिर इसे अलग-अलग करके कई डीलर्स तक पहुँचाते हैं। ओम प्रकाश का कहना है कि आगे उनकी योजना पूरे सप्ताह यह काम करने की है। इसके अलावा, वह और अधिक ग्राहकों के साथ-साथ नए डीलर्स से जुड़ना चाहते हैं। 

उनकी योजना, पहले अपने काम को उत्तर-प्रदेश के दूसरे शहरों तक फैलाने की है। इसके बाद, वे दूसरे राज्यों के बारे में भी सोचेंगे। उनका कहना है कि वह पारदर्शिता से काम करते हैं। इसलिए धीरे-धीरे ही सही, उन्हें सफलता भी मिल रही है। अपना स्टार्टअप शुरू करने की चाह रखने वाले लोगों के लिए, वह सिर्फ यही सलाह देते हैं कि आप जितना समय बिजनेस की रणनीति बनाने में जाया करेंगे, उतना ही आपकी इच्छाशक्ति कम होगी। हर एक चीज आप बिजनेस शुरू करने से पहले ही नहीं सीख सकते हैं। बिजनेस के बहुत से गुर और उस सेक्टर से जुड़ी बातें, आप अपना काम शुरू करने के बाद ही सीख सकते हैं। इसलिए, ज्यादा सोचिए मत और अपना काम शुरू कीजिए।

अगर आप लखनऊ निवासी हैं और अपने घर से किसी कबाड़ को निकालने के लिए उनकी सेवायें लेना चाहते हैं तो उनकी वेबसाइट देख सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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