in

दिल्ली पुलिस के इस अफ़सर ने 20 सालों में कोई छुट्टी नहीं ली; रिटायर होने के बाद भी कर रहे है बिना वेतन के नौकरी!

फोटो स्त्रोत: मिड-डे

दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर बलजीत सिंह राणा (66-वर्षीय) ने पिछले 20 सालों में एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली। साल 1998 के बाद से उन्होंने कभी भी कोई भी मेडिकल या कैज़ुअल लीव भी नहीं ली है।

हरियाणा के कुंडली गांव के बलजीत ने साल 1972 में अपनी ड्यूटी ज्वाइन की। नौ महीने की ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली नियुक्ति राष्ट्रपति भवन के बाहर हुई।

उन्होंने बताया कि जब मैंने पुलिस की ड्यूटी शुरू की थी, तभी से मैंने ठान लिया था कि मैं देश की सेवा पूरी ईमानदारी और लगन से करूंगा। मैंने अक्सर मेरे साथी अफ़सरों को बिना किसी कारण के भी छुट्टी लेते देखा है पर मैं अपनी ड्यूटी पुरे जूनून से करना चाहता था।

“यहाँ तक कि मेरी बेटी के शादी वाले दिन भी मैंने पूरा दिन ड्यूटी की और शाम को उसकी शादी के लिए पहुंच गया,” बलजीत ने कहा। उनकी दो बेटियां व एक बेटा है।

Promotion

उन्होंने एक छोटी-सी घटना के बारे में बताते हुए कहा, “जब मैंने पुलिस फ़ोर्स में भर्ती हुआ तो मेरे पिता ने कहा था कि तुम कोयले के खदान में जा रहे हो तो ध्यान रखना कि तुम्हारी वर्दी पर कोई दाग न लगे।”

बलजीत का कहना है कि उनका परिवार हमेशा उनकी ताकत बना रहा। उनकी पत्नी व बच्चों ने उनके काम को लेकर कभी कोई शिकायत नहीं की। बलजीत कहते हैं कि उनके परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया है। लेकिन अपनी ड्यूटी करते हुए बलजीत ने अपने परिवार की तरफ भी जिम्मेदारियों को निभाया।

साल 2012 में उनकी रिटायरमेंट होने के बाद भी वे खुद कभी रिटायर नहीं हुए। बिना किसी वेतन के वे आज भी पुलिस डिपार्टमेंट में काम कर रहे हैं।

हम बलजीत की मेहनत और देश के प्रति निष्ठा को सलाम करते हैं। यकीनन वे बहुत से लोगों के लिए प्रेरणा हैं।


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर भेज सकते हैं।

 

 

 

 

शेयर करे

Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

अवैध आश्रयगृह में हो रहा था यौन शोषण; इस 10 साल की बच्ची ने बचाया 24 लड़कियों को!

मुंबई: बिना किसी मदद के इस लड़की ने खुद पकड़ा अपने मोबाइल-चोर को; जानिए कैसे!