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गुलाब की खेती ने उबारा गरीबी से, 400 रुपए/किलो बिकता है इनके घर पर बना गुलकंद

गुलाब की खेती ने उबारा गरीबी से, 400 रुपए/किलो बिकता है इनके घर पर बना गुलकंद

नवसारी, गुजरात के रहने वाले जाकिर हुसैन और शमशाद जाकिर हुसैन, जैविक तरीकों से गुलाब की खेती करते हैं और इसके फूल से गुलकंद, गुलाबजल और फेसपैक जैसे उत्पाद बनाकर ग्राहकों तक पहुँचा रहे हैं। इस काम से वह महीने भर में 25 हजार रूपये से ज्यादा की कमाई कर लेते हैं।

खेती एक ऐसा पेशा है, जिसमें आप ढेर सारे प्रयोग कर सकते हैं। अनाज से लेकर फूल तक उगाकर, आप बेहतर कमाई कर सकते हैं। आज हम आपके लिए गुजरात के एक दंपति की ऐसी ही प्रेरक कहानी लेकर आए हैं, जिन्होंने गुलाब की खेती (Rose Farming) से अपनी किस्मत बदल दी। 

यह कहानी गुजरात के नवसारी में रहने वाले किसान, जाकिर मुल्ला और उनकी पत्नी, शमशाद जाकिर हुसैन मुल्ला की है। इस परिवार को शुरुआत में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दरअसल, पारिवारिक मतभेदों के चलते, उन्हें अपने बच्चों के साथ अपना घर छोड़ना पड़ा था। उस समय, उनके पास आजीविका के लिए सिर्फ आधा एकड़ जमीन थी। जिसमें, उन्होंने कम जगह में अपने रहने के लिए एक घर बनाया और बाकी जमीन पर पारंपरिक तरीकों से खेती करने लगे। 

पर, अगले कुछ साल उनके लिए बहुत ज्यादा मुश्किलों से भरे हुए थे क्योंकि, खेती में उपज अच्छी नहीं हो रही थी। उनके छह सदस्यीय परिवार का खर्च चलाना भी, उनके लिए बहुत मुश्किल हो रहा था। ऐसे में, जाकिर और शमशाद को आजीविका के दूसरे तरीकों के बारे में सोचना था, जिससे वह अपने परिवार का पेट भर सकें। 

जाकिर बताते हैं, “हम अपने खेत में सब्जियां उगाकर, बाजार में बेचते थे। लेकिन कई बार उपज इतनी कम होती, कि हमें दूसरों से सब्जियां खरीदनी पड़ती थी। इसलिए, हमें अपने भरण-पोषण के लिए कोई और रास्ता ढूँढना था।”

इस बारे में शमशाद आगे बतातीं हैं, “हमारी जमीन पर दो देसी किस्म के गुलाब के पौधे लगे हुए थे। मैं साल 2014 से ही गुलाब फूल से अपने बच्चों के लिए गुलकंद बनाती थी। मैंने जाकिर से कहा कि अगर हम इसे बिजनेस बना पाएं तो अच्छा होगा।”

इसके बाद, ये दोनों बागवानी पर ध्यान देने लगे और गुलाब के उत्पाद बनाने लगे। जब से उन्होंने गुलाब से जैविक तरीकों से गुलकंद, गुलाबजल और चेहरे पर लगाने के लिए ‘फेस पैक’ तैयार करना शुरू किया तब से उनकी आजीविका बढ़ गई और वह प्रतिमाह 25 हजार रुपये से ज्यादा की कमाई करने लगे। 

अलग राह पर बढ़ाया कदम:

शमशाद कहतीं हैं कि उन्हें संदेह था कि उनके बनाये घरेलू उत्पाद बाजार में सफल हो पाएंगे या नहीं? वह कहतीं हैं, “हमें इन्हें बनाने का सही तरीका नहीं पता था और न ही इनसे स्वास्थ्य को होने वाले वैज्ञानिक फायदों के बारे में पता था। जाकिर ने हमारे एक पारिवारिक डॉक्टर से बात की, जिन्होंने बताया कि गुलकंद, पेट में सूजन होने पर, खराश, अल्सर और पाचन समस्याओं का इलाज करने में मदद करता है, तथा गर्भवती महिलाओं के लिए काफी अच्छा होता है।”

तब उन्होंने सोचा कि अगर उनके ये सभी उत्पाद सफल हुए, तो ये लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होंगे। 

Gujarat Couple Growing Rose
Processing Rose petals

जाकिर ने कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क किया और वहाँ पर कृषि विभाग के वैज्ञानिकों से मदद मांगी। उन्होंने बताया, “मैंने वहाँ के अधिकारियों को गुलकंद का सैंपल दिखाया और पूछा कि क्या हम इसे बाजार में बेच सकते हैं। अधिकारियों की प्रतिक्रया सकारात्मक थी और उन्होंने सुझाव दिया कि हम जैविक तरीकों से गुलाब के पौधों को उगाने (Rose Farming), खाद बनाने और प्राकृतिक तरीकों से गुलकंद का उत्पादन करने का प्रशिक्षण लें। उन्होंने सरकारी विभाग की तरफ से हमारे गुलकंद को बाजार तक पहुँचाने के लिए भी कहा।”

इस दौरान, उन्हें पता चला कि इलाके में कोई और गुलकंद नहीं बना रहा है। इस तरह, यह एक अलग उत्पाद था और इसमें सफलता की संभावना भी काफी ज्यादा थी। उन्होंने सभी तकनीकों को सीखने और प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए एक महीने का प्रशिक्षण लिया। 

मेहनत से मिली सफलता:

जाकिर और शमशाद ने 1000 देसी किस्म के गुलाब के पौधे खरीदे और अपनी जमीन पर उगाना शुरू किया (Rose Farming)। गुलाब के पौधों को कम पानी और ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है।

जाकिर कहते हैं कि देसी किस्म के गुलाब के पौधों में छोटे पत्ते होते हैं, लेकिन इनसे बड़ी मात्रा में गुलाब की उपज (Rose Farming) मिलती है। वह गुलाब की पंखुड़ियों को धूप में सुखाते हैं और गुलकंद बनाने के लिए उसमे मिश्री का इस्तेमाल करते हैं।

जाकिर बताते हैं, “यह सामान्य चीनी से बहुत ज्यादा अच्छी होती है। बेहतर स्वास्थ्य के नजरिये से हम इसे एल्युमीनियम की बजाय स्टील के बर्तनों में बनाते हैं। प्राकृतिक तरीकों से गुलकंद बनने में तीन महीने का समय लगता है। जिसमें गुलाब के फूलों की कटाई, इन्हें सूखाना, मिश्री में मिलाना और इस मिश्रण को गुलकंद बनने के लिए छोड़ देना आदि शामिल है। हम इस गुलकंद को ‘जैविक शमा गुलकंद ब्रांड’ नाम से पैक करते हैं और कृषि विज्ञान केंद्र पहुँचाते हैं। हमारा गुलकंद 400 रूपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिकता है।”

Gujarat Couple
Using Steel Container to make gulkand

मुंबई के गौरांग भगत को उनके इस जैविक गुलकंद का स्वाद बहुत पसंद आया। भगत कई सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए हैं और वह इस उत्पाद का बाजारीकरण करने में भी जुटे हुए हैं। जाकिर कहते हैं कि उन्होंने गुलाब के पौधों के बीच बची खाली जगह में एलोवेरा और अन्य औषधीय पौधों को उगाना शुरू किया है। आगे, उनकी योजना बालों के लिए प्राकृतिक तेल बनाने की है। 

शमशाद कहतीं हैं कि वह खुश हैं कि उन्होंने यह जोखिम उठाया। वह कहतीं हैं, “मुझे विश्वास था कि अगर हम कड़ी मेहनत करेंगे, तो जरूर सफल होंगे। हमें व्यवसाय से लाभ तो मिल ही रहा है, पर असली खुशी तभी मिलती है, जब ग्राहक हमें कॉल करते हैं और हमारे उत्पादों की तारीफ करते हैं।”

यदि आप भी गुलकंद ऑर्डर करना चाहते हैं, तो जाकिर से  9904232588 पर संपर्क कर सकते हैं।

मूल लेख: हिमांशु नित्नावरे  

संपादन- जी एन झा

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Rose Farming

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