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कोलकाता के ‘काठी रोल’ को विदेश में दिलाई पहचान, खड़ा किया करोड़ों का कारोबार

कोलकाता के ‘काठी रोल’ को विदेश में दिलाई पहचान, खड़ा किया करोड़ों का कारोबार

क्या आपने कोलकाता की मशहूर ‘काठी रोल’ का स्वाद चखा है? दरअसल यह कोलकाता के लोगों की पसंदीदा डिशेस में से एक है। इसका स्वाद लाजवाब होता है। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि इस लजीज काठी रोल (Kathi Roll) के दीवाने लंदन से लेकर न्यूयॉर्क तक हैं। आज हम आपको कोलकाता की पायल साहा से मिलवा रहे हैं, जिन्होंने विदेशों में कोलकाता के इस मशहूर व्यंजन को घर-घर तक पहुँचाने का काम किया है।

‘हॉस्पिटैलिटी’ या बिज़नेस में किसी भी तरह का कोई अनुभव न होने के बावजूद, पायल ने अमेरिका में अपना खुद का फूड स्टार्टअप शुरू किया- ‘द काठी रोल कंपनी’ (The Kathi Roll Company)

पायल बचपन से ही अपने शहर की गलियों में मिलने वाले काठी रोल खाकर बड़ी हुईं हैं। इसलिए अमेरिका में जब उन्हें यह नहीं मिला तब उन्होंने खुद ही इसे बनाने की ठानी। जो काम उन्होंने अपने लिए शुरू किया था, वह आज करोड़ों रूपये का कारोबार बन चुका है। न्यूयॉर्क और लंदन में उनके 4 आउटलेट्स हैं। 

22 साल की उम्र में शादी करने के बाद, पायल अपने पति के साथ अमेरिका चली गईं थीं। वह बतातीं हैं, “मैं साल 2000 में अमेरिका आई तब मुझे पता चला कि वीज़ा प्रतिबंधों के कारण मैं यहाँ काम नहीं कर सकती हूँ। हालाँकि मैं कोई बिज़नेस शुरू कर सकती थी, इसलिए मैंने यही किया।”

Kati Roll
The Kati Roll

वह कहतीं हैं कि, न्यूयॉर्क ऐसी जगह है, जहाँ सब जल्दी में रहते हैं। इसलिए लोगों का आते-जाते बीच में काठी रोल खरीदना और अपने काम के लिए निकल जाना, न्यूयॉर्क के लोगों के लिए एक काफी अच्छा विकल्प था। इसके अलावा एक और अच्छी बात है कि लोग काठी रोल को स्नैक या मील के तौर पर भी खा सकते हैं। पायल ने बताया, “यह ऐसा खाना है जो किफायती होने के साथ ही आपका पेट भी अच्छे से भरता है।”

साल 2002 में उन्होंने अपना पहला आउटलेट शुरू किया। इस आउटलेट में खासतौर पर छात्रों और देर रात पार्टी से लौटने वाले लोगों को काठी रोल सर्व किया जाता था। वह बतातीं हैं कि उन्होंने 2005 में, मिडटाउन में अपना दूसरा आउटलेट शुरू किया। 2007 में लंदन में तीसरा आउटलेट और मार्च 2012 में चौथा आउटलेट शुरू किया। 

नहीं किया कोई ‘बिज़नेस प्लान’: 

The Kati Roll Company
Payal Saha

अब से 18 साल पहले अगर कोई पायल से उनका बिज़नेस प्लान पूछता, तो शायद वह कहतीं कि, आप क्या पूछ रहे हो? वह बतातीं हैं, “मैंने अपना पहला आउटलेट मेरे यहाँ सफाई करने वाली महिला के साथ शुरू किया था। हमने आउटलेट का कोई शानदार उद्घाटन नहीं किया था। बस हमने स्टोर का शटर ऊपर किया और काठी रोल बेचना शुरू किया। पहले दिन हमारी 50 डॉलर कमाई हुई और हमारे लिए वह बहुत ख़ुशी का पल था।” धीरे-धीरे आउटलेट बढ़े तथा उनके ब्रांड का नाम भी बड़ा हुआ। आज उनके यहाँ कुल 116 कर्मचारी काम करते हैं। 

शुरुआत में अपने दोस्तों और परिवार से उधार लेकर पायल ने डेढ़ लाख डॉलर की इन्वेस्टमेंट के साथ, पहला आउटलेट खोला। वह बतातीं हैं कि, आउटलेट खुलने के 18 महीने के भीतर ही उन्होंने अपने निवेश की रकम को कमा लिया था। काठी रोल के प्रति अपने लगाव और प्यार के बारे में बात करते हुए वह कहतीं हैं, “तब कोलकाता के हर गली-नुक्कड़ पर काठी रोल का स्टॉल हुआ करता था। जहाँ मैं नियमित रूप से रोल खाने के लिए जाती थी, जिससे मुझे बहुत ख़ुशी मिलती थी। इस ख़ुशी के अहसास को मैं न्यूयॉर्क में भी जीना चाहतीं थीं। सच कहूं तो मुझे बिज़नेस के बारे में कोई समझ नहीं थी। मैंने हर दिन काम करते हुए ही सब कुछ सीखा है।” 

काम करते हुए कैसे सीखा:

Kolkata Woman Payal Saha

इस बारे में पायल कहतीं हैं, “जब मैंने शुरुआत की, तो मुझे नहीं पता था कि कैसे अलग-अलग वेंडर से जुड़ा जाता हैं।” ऐसे तो वह स्टोर में जाकर सभी ज़रूरी ‘रॉ मटेरियल’ खरीद सकतीं थीं, लेकिन इससे उन्हें सब कुछ खुदरा मूल्य (रिटेल प्राइस) पर मिलता, और उनकी लागत बढ़ जाती। इसलिए अक्सर वह स्टोर के बाहर वहाँ माल लेकर आने वाले ट्रकों का इंतज़ार करतीं थीं। जब वह आते तो पायल उनसे जाकर बात करतीं, और उनके फ़ोन नंबर लेतीं थीं। बाद में उनसे अपनी ज़रूरत के हिसाब से संपर्क करके सामान खरीदतीं थीं। 

वह कहतीं हैं, “वह मेरे लिए सीखने का वक़्त था और आज जब मैं इस बारे में सोचतीं हूँ, तो ख़ुशी मिलती है कि मैंने वह सब किया।” पायल के लिए उनकी कम उम्र उनके लिए सबसे सकारात्मक बात थी। वह कहतीं हैं कि अगर वह आज बिज़नेस शुरू करतीं, तो यह बहुत अलग होता। साथ ही, उस समय जो रिस्क उन्होंने लिए, उन्हें आज लेने के बारे में वह सोच भी नहीं सकतीं हैं। 

मुंबई से सीखा हुनर:

Kolkata Woman  Entrepreneur

पायल अपने आउटलेट में लोगों को काठी रोल (Kathi Roll) का सही भारतीय स्वाद परोसना चाहतीं थीं। इसलिए वह मुंबई आईं और यहाँ उन्होंने ‘चौरंगी लेन’ नामक एक रोल की ही आउटलेट में काम किया। वह कहतीं हैं, “मैं जितना ज्ञान ले सकती थी, मैंने लिया। ताकि मेरे यहाँ काम करने वाले लोगों को मैं सिखा सकूँ।” उन्होंने ठान लिया था कि उनके रोल ‘कोलकाता के रोल’ से बेहतर नहीं, तो कम से कम उनकी ही तरह स्वादिष्ट ज़रूर हो। 

उन्होंने इतने सालों में अपने रोल के स्वाद के दम पर ही अपने नियमित ग्राहक कमाएं हैं। इसके अलावा, उनके आउटलेट्स में लगे बॉलीवुड फिल्मों के पुराने पोस्टर भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इस तरह के पोस्टर लगाकर पायल अपने आउटलेट्स में कोलकाता की गलियों जैसा माहौल बनाना चाहतीं हैं। उन्होंने मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी के निधन पर उनका एक बड़ा-सा पोस्टर लगाया था। इसी तरह विनोद खन्ना को श्रद्धांजलि देने के लिए उन्होंने ’द बर्निंग ट्रेन’ फिल्म का पोस्टर भी लगाया था। 

Kati Roll Firm in USA
Using Bollywood posters in outlets

मांग के हिसाब से मेन्यू

उनके मुख्य मेन्यू में देसी काठी रोल (Authentic Kathi Roll) ही है। लेकिन, जो लोग स्वस्थ खाने के विकल्प की मांग करते हैं उनके लिए पायल काठी रोल में पराठे की जगह रोटी का इस्तेमाल करतीं हैं। उनके मेन्यू में कई तरह की लस्सी भी है, जैसे मैंगो लस्सी और मिष्टी दोई लस्सी। जिन्हें बनाने के लिए वह बंगाल के मशहूर ‘खजूर के गुड़’ का इस्तेमाल करतीं हैं। उनके ‘चिकन एग रोल’ की काफी ज़्यादा मांग है और शाकाहारी लोगों के लिए वह पनीर रोल का विकल्प देती हैं। 

कोविड-19 महामारी के चलते, बिज़नेस बढ़ाने की उनकी योजना रुक गई थी। लेकिन पायल ने कुछ नये एक्सपेरिमेंट्स कर, लोगों तक पहुँचाने का रास्ता निकाल ही लिया। वह बतातीं हैं, “हम ‘फ्रोज़ेन फूड’ पर एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं और इसे न्यूयॉर्क में कुछ ग्रोसरी स्टोर्स के ज़रिये बेच रहे हैं। मैं उन शहरों में अपने आउटलेट खोलना चाहतीं हूँ, जहां कॉलेज हैं। मुझे पता है वहाँ ये अच्छे चलेंगे।”

Kolkata Woman
A look at the Menu

उनकी एक मील, जिसमें दो काठी रोल और एक ड्रिंक शामिल होती है, 15 डॉलर की है। यह कीमत लोगों के लिए किफायती है और इसलिए वह बार-बार उनके रोल खाने आते हैं। 

उनके ग्राहकों के साथ उनका रिश्ता अब इतना मजबूत हो चुका है कि उन्होंने जापान जैसे देशों में काठी रोल कुरियर भी किए हैं। अपने काठी रोल की गुणवत्ता पर पायल को इतना विश्वास है, कि वह कहतीं हैं, “पश्चिम बंगाल को इसके जीआई टैग (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) के लिए अप्लाई करना चाहिए।” 

मूल लेख: विद्या राजा 

संपादन – जी एन झा

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kathi roll

निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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