in

यूपी का ‘रोनाल्डो भाई’: चपरासी के बेटे ने फुटबॉल में हासिल किया 1 करोड़ रूपये का कॉन्ट्रैक्ट!

फोटो: फेसबुक/निशु कुमार

फीफा वर्ल्ड कप जोरो पर है और फुटबॉल का जादू भारतीयों के भी सर चढ़ कर बोल रहा है। लेकिन यह बात उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग पर लागू नहीं होती। क्योंकि यहां क्रिकेट सबके दिलों पर राज करती है।

पर साम्प्रयदायिक रूप से संवेदनशील मुजफ्फरनगर के भोपा जिले की बात ही कुछ और है! यहाँ के एक निवासी निशु कुमार एक ऐसे प्रतिभावान फुटबॉल खिलाड़ी है जिनका खेल देखकर यहाँ के लोग क्रिकेट को भूल चुके हैं। जी हाँ, आप निशु कुमार की गिनती भारत के बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ियों में कर सकते हैं। आज निशु बहुत से युवाओं को फुटबॉल खेलने की प्रेरणा दे रहे हैं।

भोपा के बच्चों द्वारा, ‘रोनाल्डो भाई’ के नाम से मशहूर 21 वर्षीय निशु को हाल ही में बैंगलुरु फुटबॉल क्लब ने अपनी टीम में खेलने के लिए दो साल का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। इस कॉन्ट्रैक्ट की राशि एक करोड़ रूपये है।

पहले साल में उन्हें 40 लाख रूपये दिए जायेंगे। दूसरे साल 45 लाख और बाकी 15 लाख मैच बोनस के तौर पर दिया जायेगा।

निशु के पिता उत्तर प्रदेश में जनता इंटर कॉलेज में चपरासी की नौकरी करते हैं। उत्तर प्रदेश में फुटबॉल खेलने के लिए बहुत कम मौके मिलते हैं। लेकिन फिर भी अपनी मेहनत और लगन के बल पर निशु यहां तक पहुंचें हैं।

फोटो: फेसबुक/निशु कुमार

निशु के पहले कोच और जनता इंटर कॉलेज के स्पोर्ट्स टीचर कुलदीप राठी ने बताया, “निशु सबसे अलग है। मैंने तो केवल अपनी सिमित क्षमताओं से निशु का मार्गदर्शन किया है। पर यह निशु का खेल के प्रति प्रेम और जूनून था, जो वह यहां तक पहुंच पाया। हमारे इलाके में फुटबॉल के लिए आर्थिक सहायता तो दूर एक स्टेडियम भी नहीं है। हमारे यहां टैलेंट की कमी नही है। पर सरकार खेल पर कोई ध्यान ही नहीं देती है।”

Promotion

आखिर क्यों 1950 में क्वालीफाई करने के बावजूद टीम इंडिया खेल नहीं पायी फीफा वर्ल्ड कप!

तीन साल पहले बैंगलुरु फुटबॉल कप ज्वाइन करने के बाद निशु ने स्वयं अपना स्थान बनाया। बैंगलुरु एफसी के एक अधिकारी ने कहा, “निशु क्लब के लिए बहुत ही बढ़िया खिलाड़ी साबित हुए हैं। इसलिए उन्हें यह कॉन्ट्रैक्ट मिलना चाहिए था। वे अपने जीवन में बहुत आगे तक जायेंगे।”

इसी सब के बीच, सुविधा की कमियों के चलते भी निशु की कहानी भोपा के हर बच्चे को प्रेरित करती है। भोपा के एक किशोर गौरव सिंह ने बताया, “वह हमारे लिए हमेशा प्रेरणा का स्त्रोत रहा है। वह हमेशा कहता था कि अगर हम सुविधाओं को लेकर शिकायतें ही करते रहेंगें तो यह हमारा ही नुकसान है । अगर वह कर सकता है तो कोई भी कर सकता है।”

हालाँकि, अपने बढ़ते स्टारडम पर निशु का कुछ और ही कहना है। निशु ने बताया कि उसने यह खेल इसलिए खेलना शुरू किया क्योंकि यह सबसे सस्ता खेल है। इसमें सिर्फ बॉल की जरूरत होती है।

निशु ने बताया, “हम अपने स्पोर्ट टीचर के मार्गदर्शन में फुटबॉल खेलते थे। धीरे-धीरे मुझे इसमें मजा आने लगा। फिर एक दिन चंडीगढ़ फुटबॉल क्लब के ट्रायल हुए और मैंने वह पास कर लिया।”

दो साल बाद, उन्हें ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) एलिट अकादमी के लिए चुना गया और साल 2015 में उन्होंने बैंगलुरु एफसी में शामिल होने से पहले अंडर-19 स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे।

शेयर करे

Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

कारगिल का शेरशाह: कहानी भारतीय सेना के बहादुर जवान, कप्तान विक्रम बत्रा की!

‘नलिनी’: जानिए कौन थी रबींद्रनाथ टैगोर का पहला प्यार!