बेंगलुरू: केवल 10×10 फीट जगह में उगा रहे हैं 20 तरह की सब्जियां, जानिए कैसे

अक्सर लोग सोचते हैं कि सब्जी की खेती के लिए बहुत ज्यादा जगह की ज़रूरत होती है। महानगरों में तो लोग बागवानी में फूल के पौधे लगा लेते हैं लेकिन जगह की कमी की वजह से सब्जी नहीं उगा पाते हैं। लेकिन आज हम आपको रू-ब-रू करा रहे हैं एक ऐसे शख्स (Bengaluru Man) से जो मात्र 10×10 फीट की जगह में 20 तरह के साग-सब्ज़ियाँ और फल उगा रहा है।

बेंगलुरू में रहने वाले 50 वर्षीय देवराज के ने अपने घर की बालकनी में ही एक सुंदर सा बागान बनाया है। उन्होंने द बेटर इंडिया को बताया, “मैंने अपनी छोटी सी जगह में ही पत्तेदार सब्जियां, हर्ब्स, करी पत्ता, अनार, आलू, बीन्स और यहाँ तक कि ड्रमस्टिक भी उगा रहा हूँ। खाद के लिए मैं गीले कचरे का उपयोग करता हूँ। बाज़ार से गार्डनिंग के लिए जैविक पेस्टिसाइड के अलावा और कुछ भी नहीं खरीदता हूँ।”

देवराज एक प्रोफेशनल योगा शिक्षक हैं और स्कूल-कॉलेज और अलग-अलग संस्थानों में योगा सिखाते हैं। जब उन्होंने योगा सिखाना शुरू किया, तब से ही उन्होंने खुद स्वस्थ और ताज़ा सब्ज़ियाँ उगाने की भी ठानी। वह बताते हैं, “बचपन में माँ और दादी को हमेशा घर पर ही बागवानी करते हुए देखता था। वहीं से गार्डनिंग के प्रति लगाव बढ़ा।”

 

Bengaluru Man
Devaraj K

देवराज ने जब गार्डनिंग शुरू की तब वह अपने परिवार के साथ बेंगलुरू के उत्तरी इलाके में रहते थे। उन्होंने कहा, “वह घर बड़ा था और गार्डनिंग के लिए 30×50 फीट जगह थी। लेकिन साल 2014 में हमारे बेटे आदित्य की तबियत खराब रहने लगी तो हम जयनगर शिफ्ट हो गए। नया घर काफी छोटा था। यह लगभग 80 साल पुराना घर है और आधुनिक घरों की तुलना में छोटा है।”

देवराज अपने बेटे को घर में उगी ताज़ी और स्वस्थ सब्जियां ही खिलाना चाहते थे क्योंकि कहीं न कहीं उसकी बीमारी खान-पान से जुड़ी हुई थी। वह कहते हैं कि ज़्यादातर लोग केमिकल द्वारा उगा हुआ खाना ही खा रहे हैं और ये केमिकल हमारे शरीर को कब और कैसे नुकसान पहुँचा दे कोई नहीं जानता है।

छत पर लगाया गार्डन:

देवराज को अपने घर की छत पर 10×10 फीट की खाली जगह दिखी और वहीं पर उन्होंने गार्डनिंग करने की ठानी। इस जगह पर जाना भी मुश्किल था क्योंकि यह थोड़ी ऊपर है लेकिन उन्होंने जैसे-तैसे सभी व्यवस्था की। अब पिछले छह सालों से वह सेम, चेरी टमाटर, गिलोय, करी पत्ते, तीन प्रकार के लेमनग्रास और यहाँ तक ​​कि ड्रमस्टिक उगा रहे हैं।

देवराज कहते हैं, ”हल्दी की फसल लेने के लिए नौ महीने की जरूरत होती है और इस दिसंबर में इसकी हार्वेस्टिंग हो जाएगी।” उनका कहना है कि उनका उद्देश्य यह साबित करना है कि आप छोटी जगह में ही भी फल और सब्ज़ियाँ उगा सकते हैं। उनके घर की लगभग आधी ज़रूरतें इस छोटे से गार्डन से पूरी हो जाती हैं। इस तरह से उनके बेटे के खाने में अधिकतर घर पर उगी साग-सब्जियां और फल शामिल होते हैं।

 

Bengaluru Man growing Vegetables
Cherry Tomato

अपने गार्डन को फलता-फूलता रखने के लिए देवराज घर पर ही खाद बनाते हैं। उनके घर से कोई गीला कचरा बाहर नहीं जाता। फलों और सब्जियों के छिलकों का उपयोग घर पर खाद बनाने के लिए होता है। आपको सभी कचरे को बस एक गड्ढ़े में रखना है या फिर किसी ड्रम में और इसे ढक दें। यह अपने-आप डीकम्पोज हो जाएगा। हालांकि, उन्हें छत पर यह गार्डन बनाने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस घर में छत पर जाने के लिए पहले से कोई सीढ़ियाँ नहीं बनी है तो उन्हें अलग से सीधी लगानी पड़ती है।

वह आगे कहते हैं कि छत को वाटरप्रूफ करना भी एक चुनौती थी। वह कहते हैं, “पानी का ड्रेनेज सिस्टम बहुत ज़रूरी था क्योंकि अगर पानी ठहरता तो छत खराब हो जाती। इसलिए छत की वाटरप्रूफिंग बहुत ज़रूरी थी और यह काफी मुश्किल काम था।”

छत पर कभी भी जाना संभव नहीं था क्योंकि साधन की समस्या थी। इसलिए उन्होंने अपने गार्डन में गुलदाउदी के फूल उगाए ताकि साग-सब्जियों पर कोई पेस्ट न लगे।

 

Bengaluru Man
Growing 20 types of veggies, fruits

जी रहे हैं स्वस्थ ज़िंदगी:

देवराज कहते हैं कि वह जो खाना खाते हैं वह शुद्ध और स्वस्थ है। किसी भी तरह के केमिकल से मुक्त है। इससे अच्छी बात और क्या होगी। उनके बेटे की तबियत में भी काफी सुधार हुआ है। उन्होंने और बहुत से लोगों को अपने घरों में गार्डन सेटअप करने में मदद की है।

बहुत से लोग उन्हें सम्पर्क करते हैं कि उनके गार्डन के लिए पौधों का सही आकार क्या रहेगा, खाद कैसे बना सकते हैं और उगाने के लिए डिब्बे ढूँढ़ना आदि। मौसम के हिसाब से उन्होंने सब्जियों का चार्ट भी बनाया है। कब सब्जियां लगानी है और कब इनकी हार्वेस्टिंग होगी- यह सब उन्होने इसमें लिखा है। उनकी यह गाइड मुफ्त में हैं और लोगों को स्वस्थ भोजन उगाने में मदद करने के लिए हैं।

बेंगलुरू की एक गृहिणी क्रेसेन्सिया विजय कुमार की भी देवराज ने मदद की है। वह बतातीं हैं कि उन्हें गार्डनिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। देवराज ने एकदम जीरो से उनकी गार्डन लगाने में मदद की। “मैंने 2017 में गार्डन लगाया था लेकिन पिछले 6 महीने से मैं ज़्यादा समय गार्डनिंग के लिए दे रही हूँ,” उन्होंने आगे कहा।

 

Bengaluru Man growing Vegetables
His Garden

अंत में देवराज कहते हैं कि वह इन दिनों गार्डनिंग किट भी तैयार कर रहे हैं, जिनमें जैविक खाद, गोबर और गौमूत्र शामिल है। उनका उदेश्य है कि अधिक से अधिक लोग गार्डनिंग से जुड़ें और अपने लिए सब्जी उगाएँ।

देवराज से सम्पर्क करने के लिए आप उन्हें devaraj.adithya@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं!

अगर आपको भी है बागवानी का शौक और आपने भी अपने घर की बालकनी, किचन या फिर छत को बना रखा है पेड़-पौधों का ठिकाना, तो हमारे साथ साझा करें अपनी #गार्डनगिरी की कहानी। तस्वीरों और सम्पर्क सूत्र के साथ हमें लिख भेजिए अपनी कहानी hindi@thebetterindia.com पर!

मूल लेख: Himanshu Nintaware
संपादन – जी. एन झा 

यह भी पढ़ें: बंजर ज़मीन से घने जंगल तक: जानिए कैसे इस शख्स ने लगा दिए 1 करोड़ से भी ज्यादा पेड़-पौधे


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बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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