Bengaluru Man Growing Vegetables

अनाथालय की छत को बना दिया किचन गार्डन, अब बच्चों को मिलती हैं ताज़ा जैविक सब्जियां

कहते हैं कि जिन्हें पेड़-पौधों से लगाव होता है, वह जीवन में सबसे अधिक खुश रहते हैं। ऐसे लोग अपने व्यस्त दिनचर्या में भी गार्डनिंग के लिए आसानी ने समय निकाल लेते हैं। गार्डनिंग के शौकिन लोग न केवल अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी बड़े शौक से पेड़-पौधे लगाते हैं। आज हम आपको बेंगलुरू के एक ऐसे ही शख्स की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो न केवल अपनी बागवानी को फूल-पत्तियों से सजा रहे हैं साथ ही एक अनाथालय में भी उन्होंने टैरेस गार्डन तैयार है, जिससे बच्चों को हरी-हरी ताजी सब्जियां मिल रही है।

बेंगलुरू में रहने वाले सुरेश राव, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया में बतौर सीनियर अकाउंटेंट कार्यरत हैं। अपने प्रोफेशनल काम में सुरेश जितने अच्छे हैं, उतने ही पैशन से वह अपना गार्डनिंग का शौक भी जीते हैं। सुरेश कहते हैं कि वह ऐसी जगह काम करते हैं जहाँ हेल्थ और फिटनेस को लेकर हर कोई सजग है। इसलिए वह खुद को ऐसी एक्टिविटी में बिजी रखते हैं जो उन्हें तनाव रहित और स्वस्थ रखे। इसके अलावा, पेड़-पौधों और खेती के प्रति लगाव उन्हें अपने पुरखों से विरासत में मिला है।

किसान परिवार से आने वाले सुरेश ने द बेटर इंडिया को बताया, “हालांकि मैं शहर में ही पला-बढ़ा लेकिन मेरी माँ को गार्डनिंग का बहुत शौक था। वह हमेशा घर पर उगाई सब्जियां ही परिवार को खिलाती थी। उनसे ही मैंने भी गार्डनिंग का हुनर सीखा। उम्र के साथ जब उनकी तबियत खराब रहने लगी तो साग-सब्जियां लगाने और उगाने का ज़िम्मा मैंने अपने सिर पर ले लिया। आज हमारे घर की लगभग सारी ज़रूरत हमारे गार्डन से ही पूरी हो जाती हैं।”

 

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Suresh Rao

सुरेश के घर में ही ग्राउंड फ्लोर पर ही काफी खाली जगह है, जहाँ वह पेड़-पौधे उगाते हैं। कुछ पेड़-पौधे वह छत पर भी लगाते हैं। उन्होंने अपनी खाली जगह को साग-सब्जियों और फूलों के लिए अलग-अलग हिस्सों में बांटा हुआ है। एक हिस्से में वह सिर्फ फूल उगाते हैं और एक में साग-सब्जियां। मौसमी सब्जी उगाने के साथ-साथ सुरेश एग्जोटिक किस्में भी उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने अपने घर की ज़रूरत को समझा कि रसोई में कौन-सी सब्जियों की कितनी खपत है।

इसके बाद उन्होंने तीन अलग-अलग कैटेगरी में सब्जियां लगाना शुरू किया। सबसे पहले वैसी सब्जियां जिनकी ज़रूरत साल भर रहती है जैसे टमाटर, हरी मिर्च, बीन्स, धनिया, पुदीना, भिन्डी, लौकी-कद्दू आदि। दूसरी मौसमी सब्जियां जैसे पत्तागोभी, फूलगोभी, गाजर, मूली, चकुंदर, शिमला मिर्च, मटर आदि। इनके अलावा, वह कुछ एग्जोटिक किस्में जैसे असम की स्पेशलिटी भूत झोलोकिया मिर्च, टमाटर की विदेशी किस्में भी लगाते हैं।

 

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His Garden

घर में सब्जियां और अन्य पेड़-पौधे उगाने के लिए वह कुछ गमले और ग्रो बैग और बाकी मिट्टी के बेड बनाकर इस्तेमाल करते हैं। सुरेश बताते हैं, “पौधे लगाने के लिए मिट्टी की ऊँची बेड बनाते हैं। इसमें मिट्टी और खाद का लेयरिंग तरीका इस्तेमाल करता हूँ। गोबर की खाद, वर्मीकंपोस्ट, और घर पर गीले कचरे व पत्तों आदि से बनी खाद का इस्तेमाल करता हूँ। बेड बनाने के लिए एक लेयर मिट्टी की तो एक लेयर फिर खाद की डाली जाती है। इस तरह बेड तैयार होने के बाद उसमें बीज डाला जाता है।”

इसके बाद जब पौधे बढ़ने लगते हैं तो सुरेश उनमें खाद नहीं देते हैं। तब वह सिर्फ लिक्विड फ़र्टिलाइज़र का इस्तेमाल करते हैं। घर पर ही वह गौमूत्र और गोबर से जीवामृत, केले और प्याज के छिलकों से पोषण बनाते हैं। इसे पौधों में देने से मिट्टी के सूक्षम जीव एक्टिव होते हैं जो मिट्टी और खाद के पोषण को पेड़ों तक पहुँचाते हैं। पेस्ट-मैनेजमेंट के लिए साग-सब्ज़ियों के पौधों के साथ गेंदे, अदरक और प्याज आदि के पौधे लगाते हैं ताकि कीड़े सब्जियों को छोड़कर दूसरे पौधों की तरफ आकर्षित हों।

 

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His harvest

अनाथालय में तैयार किया टैरेस गार्डन

अपने घर में गार्डनिंग करने के साथ-साथ उन्होंने बेंगलुरू में एक अनाथ-आश्रम की छत पर भी गार्डन लगाया है और वह भी बिना किसी चार्ज के। सुरेश ने बताया कि उन्हें अपने एक दोस्त के ज़रिए पता चला कि अनाथ-आश्रम में टैरेस गार्डन लगाना है।

इसके बारे में सुरेश ने बताया, “गार्डन सेट-अप करना आसान काम नहीं था क्योंकि वहाँ सब कुछ जीरो लेवल से शुरू करना था। मैंने वहाँ भी छत पर गार्डन के लिए बेड तैयार किया। जुलाई 2019 में गार्डन को हमने पूरी तरह से तैयार कर दिया था और अब अनाथ-आश्रम में इस गार्डन से अच्छी-खासी सब्जियां मिल रही हैं। इस काम से मुझे सबसे अधिक संतुष्टि मिली।”

 

Balya Project

सुरेश जो भी स्थानीय और विदेशी किस्म उगाते हैं, उनके बीज इकट्ठा करते हैं। इन बीजों को वह खुद के गार्डन में लगाते हैं और कुछ अपने जैसे ही गार्डनर को बांटते हैं। वह कहते हैं कि आपको अपने पौधों की देखभाल बच्चों की तरह करनी चाहिए। घर पर पौधे उगाने से और खाद बनाने से आप अपने पर्यावरण के लिए अच्छा ही करते थे। आपका एक अच्छा कदम आपकी आने वाली पीढ़ी का भी भविष्य संवार सकता है।

अगर आपको भी है बागवानी का शौक और आपने भी अपने घर की बालकनी, किचन या फिर छत को बना रखा है पेड़-पौधों का ठिकाना, तो हमारे साथ साझा करें अपनी #गार्डनगिरी की कहानी। तस्वीरों और सम्पर्क सूत्र के साथ हमें लिख भेजिए अपनी कहानी hindi@thebetterindia.com पर!

यह भी पढ़ें: इस जोड़ी ने रिटायरमेंट के बाद शुरू की खेती, उगाते हैं 50 तरह के फल और सब्जियां

संपादन: जी. एन. झा


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बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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