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कभी डॉक्टरों ने कहा था आर्मी छोड़ने को, आज सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में मिली पोस्टिंग!

लेफ्टिनेंट राजशेखर अपनी माँ कर भाई के साथ/ हिंदुस्तान टाइम्स

स रविवार को देहरादून में इंडियन मिलिट्री अकादमी से 27 वर्षीय कैडेट राजशेखर को इंडियन आर्मी का लेफ्टिनेंट नियुक्त किया गया। राजशेखर की यह नियुक्ति किसी चमत्कार से कम नहीं है।

दरअसल, अकादमी में अपनी ट्रेनिंग के दौरान राजशेखर अचानक बेहोश हो गए थे और जब उन्हें देहरादून मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया तो डॉक्टरों ने उनके बचने की आशा एकदम ना के बराबर बताई थी।

तमिलनाडु से आने वाले राजशेखर ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, ” मिलिट्री की ट्रेनिंग में पहलक़दम नामक एक अभ्यास होता है,जिसमें कैडेट को अपनी पीठ पर भारी वजन लादकर 10 किलोमीटर तक दौड़ना होता है। इसी अभ्यास के दौरान, डिहाईड्रेशन के चलते मैं अचानक बेहोश हो गया था।”

राजशेखर के किडनी और लीवर लगभग 70% तक खराब हो चुके थे। उन्होंने 40 दिन अस्पताल में बिताये, जिसके दौरान उन्हें 18 दिन आईसीयू और 22 दिन एचडीयु में रखा गया। डॉक्टरों ने उनके अधिकारीयों से कहा कि राजशेखर का बचना मुश्किल है।

जब राजशेखर थोड़ा ठीक होने लगे तो डॉक्टरों और उनके परिवार ने उनके स्वास्थ्य के चलते उन्हें मिलिट्री छोड़ देने की सलाह दी।

उन्होंने बताया, “मैं हार मानने के लिए तैयार नहीं था। मैंने जिम में रोज 4 घंटे वर्क आउट करना शुरू किया और आखिर मेरी मेहनत ज़ाया नहीं गयी। न सिर्फ मुझे एक नयी ज़िन्दगी मिली, बल्कि मैंने अपनी ट्रेनिंग भी समय पर पूरी की। इस मुश्किल समय के दौरान मेरे कंपनी कमांडर और पलटन कमांडर ने मेरा बहुत साथ दिया।”

अपनी नियुक्ति के दिन उन्हें ‘बेस्ट मोटिवेटर अवार्ड’ से भी नवाजा गया।

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तमिलनाडु के मदुरइ जिले के मैडनबट्टी गांव से ताल्लुक रखने वाले राजशेखर ने बचपन से ही मुश्किलों का सामना करना सीखा है। साल 2010 में, जब वे 10वीं क्लास में थे, तो उनके पिता की मृत्यु हो गयी। जिसके बाद उनकी माँ ने सिलाई का काम कर उनका व उनके भाई का पालन-पोषण किया।

राजशेखर की पहली पोस्टिंग सियाचिन में हुई है, जो दुनिया का सबसे ऊँचा युद्धक्षेत्र माना जाता है। एक कैडेट जिसे डॉक्टरों ने कभी मिलिट्री छोड़ने की सलाह दी थी, आज वह सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र से अपनी शुरुआत करने जा रहा है।

राजशेखर कहते हैं कि जिस तरह की मेडिकल स्थिति से लड़कर मैंने अपनी ट्रेनिंग पूरी की, यह उसके सामने कुछ नहीं है। निस्संदेह, राजशेखर आज बहुत से ऐसे लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो मुश्किलों से घबराकर जीने की तम्मना छोड़ देते हैं।

मूल लेख: रेमंड इंजीनियर

( संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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