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युवती का अनोखा स्टार्टअप, किसानों के लिए खेतों में बनाए 12 हज़ार से ज्यादा तालाब

महाराष्ट्र के मुंबई में रहने वाली मैथिली की कंपनी सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पानी की समस्या से जूझ रहे किसानों के लिए सस्ते और टिकाऊ, आर्टिफिशियल तालाब, जलसंचय बना रही है!

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बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता शाहरूख खान की फिल्म स्वदेस तो आपको याद ही होगी, जिसमें नायक अमेरिका से अपने गाँव आता है लेकिन कहानी कुछ ऐसी ही होती है कि वह गाँव में ही रह जाता है। आज द बेटर इंडिया आपको एक ऐसी ही कहानी सुनाने जा रहा है, जहाँ एक रिसर्चर आती तो है शोध के लिए, लेकिन गाँव के किसानों की सिंचाई संबंधी समस्या को देखकर कुछ ऐसा काम कर जाती है, जिस वजह से किसानों का जीवन ही बदल जाता है।

देश में किसानों के लिए पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है। लेकिन विडंबना यह है कि पानी की कमी बारिश की कमी के कारण नहीं है बल्कि इस वजह से है क्योंकि किसानों के पास बारिश या फिर नहर से मिलने वाले पानी को इकट्ठा करके रखने के साधन नहीं है। इसलिए ही ज्यादा बारिश के दौरान गाँव के गाँव बाढ़ में डूब जाते हैं और गर्मियों के मौसम में वही गाँव पानी के तरसते हैं।

किसानों की इन्हीं समस्यायों को देखते हुए महाराष्ट्र की एक युवा बेटी ने उनके लिए कुछ करने की ठानी और पिछले दो-तीन सालों में ही हजारों किसानों की मदद की है।

यह कहानी है महाराष्ट्र के मुंबई में रहने वाली 23 वर्षीय मैथिली अप्पलवार की। एक बिज़नेस परिवार से आने वाली मैथिली ने अपनी पढ़ाई अमेरिका के जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से की। अपने एक रिसर्च प्रोजेक्ट के दौरान उन्हें राज्य के यवतमाल में रहने का मौका मिला। यहाँ की दुनिया मैथिली की दुनिया से बहुत अलग थी और पहली बार मैथिली ने किसानों की परेशानियों को करीब से जाना। उन्होंने देखा कि कैसे छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए किसानों को संघर्ष करना पड़ता है।

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Maithili Appalwar

“यवतमाल में रहकर मैंने देखा कि हमारी छोटी-सी कोशिश किसानों के लिए बड़ी मुश्किलें हल कर सकती है। इसलिए मैंने ठान लिया कि मैं किसानों के लिए खेतों में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों को सस्ता और अच्छा बनाने पर काम करुँगी। वहाँ मैंने देखा कि सबसे ज्यादा परेशानी पानी की है। पानी को सहेज कर रखने के लिए उनके पास कोई सस्ता साधन नहीं हैं,” मैथिली ने बताया।

इसलिए, साल 2016 में जब उन्होंने मुम्बई में (Mumbai Startup) अपनी कंपनी अवाना की शुरुआत की तो सबसे पहले किसानों के लिए सस्ते और टिकाऊ तालाब बनाने पर काम किया।

मैथिली ने अपने स्टार्टअप (Mumbai Startup) के ज़रिए ‘जलसंचय’ लॉन्च किया, जो एक आर्टिफीसियल तालाब है। किसानों के खेत में सबसे पहले एक गड्ढा खोदा जाता है और फिर इसमें एक खास पॉलीमर शीट बिछाई जाती है। यह तालाब बारिश के पानी, नहर-नदियों से आने वाले एक्स्ट्रा पानी को इकट्ठा करके रखता है। जिसे बाद में किसान सिंचाई के लिए उपयोग में ले सकते हैं।

“हम फ़िलहाल जिस साइज़ का तालाब बना रहे हैं वह 50-60 लाख लीटर पानी सहेजता है और यह 5 एकड़ की सिंचाई के लिए पर्याप्त रहता है। फ़िलहाल तालाब को बनाने की लागत 2.15 लाख रुपये है लेकिन यह सीमेंट के टैंक की लागत से दस गुना कम है। क्योंकि किसानों के लिए एक साथ 10-20 लाख रुपये जुटा पाना बहुत मुश्किल होता है,” उन्होंने आगे कहा।

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They are making artificial ponds

जलसंचय तालाब बनने के बाद किसानों की आर्थिक दशा में काफी अंतर आया है। उनके मुताबिक, किसानों की कमाई में 98.7% तक की बढ़ोतरी हुई है। जो किसान पहले सिर्फ एक ही मौसम में फसल लेते थे, अब पानी की आपूर्ति से वह तीन मौसम की फसलें लेते हैं। बहुत से इलाकों में लोग अपनी पूरी ज़मीन पर खेती नहीं कर पाते थे क्योंकि पानी नहीं होता था। पर, अब यह समस्या भी समाप्त हो गई है। मैथिली कहतीं हैं कि पहले सिर्फ उन इलाकों के किसान उनके पास आते थे जिनके यहाँ पानी की समस्या थी।

लेकिन, अब ऐसे किसान उनसे तालाब बनवा रहे हैं जो मछली पालन या फिर मोती पालन करना चाहते हैं। औरंगाबाद के परमेश्वर कांबले ने उनसे जो तालाब बनवाया उसमें मछली पालन भी किया। उन्हें इससे काफी अच्छा मुनाफा हुआ। इसी तरह उन्होंने सतारा के दुधनवाड़ी गाँव में लगभग सभी किसानों के खेत में यह तालाब बनाये हैं, जिससे आज पूरे गाँव की तस्वीर ही बदल गयी है। तालाब बनने के एक साल के भीतर ही गाँव में किसानों की आय दुगुनी हो गयी।

तालाब के बाद मैथिली ने पशुपालन कर रहे किसानों पर ध्यान दिया। उन्होंने देखा कि डेयरी किसान पशुओं को फरमेंट करके चारा देते हैं, ताकि उनके दूध में पोषण ज़्यादा हो। फिर भी उनके पशु कई तरह की बिमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं और कई बार उनकी जल्दी ही मौत हो जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण उन्होंने पाया कि पशुओं का चारा जिन बैग्स में तैयार किया जाता है, वह ज़्यादातर रसायनिक खादों के होते हैं। इन्हें किसान बाज़ार से सस्ते दामों में खरीदते हैं।

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‘Jalasanchaya’ Pond made by Avana Company

इसलिए मैथिली ने ऐसे बैग बनाए हैं जो एकदम सुरक्षित और ज़्यादा समय तक चलने वाले हैं। साथ ही, इन बैग को किसी भी चूहे या बिल्ली फाड़ नहीं सकते हैं। इससे पशुओं को स्वस्थ और सुरक्षित चारा दिया जा सकता है।

“हमारे बैग की कीमत बाजार में मिलने वाले पुराने और सस्ते बैग से ज़्यादा है। इसलिए पहले हमें लगा था कि इसे किसानों तक पहुँचाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी। लेकिन जब हमने यह प्रोडक्ट ल़ॉन्च किया तो कुछ ही दिनों में हमारे लगभग 40 हज़ार बैग बिक गए और हम आउट ऑफ़ स्टॉक थे,” मैथिली ने बताया।

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अपने सफर में आने वाली चुनौतियों के बारे में बताते हुए मैथिली कहतीं हैं कि उनके परिवार का अपना बिज़नेस होने से उन्हें फंडिंग में परेशानी नहीं हुई। उन्हें कहीं और पैसे के लिए नहीं भटकना पड़ा और इस वजह से उनकी शुरुआत आसान रही। लेकिन किसानों के बीच पहुँचकर अपनी बात समझाना और उन्हें जागरूक करना बहुत मुश्किल काम था। इसलिए उन्होंने यवतमाल से ही शुरुआत की क्योंकि वह वहीं रहतीं थीं तो उनके परिवेश को समझतीं थीं।

“एक सबसे बड़ी चुनौती रही कि इस क्षेत्र में आपको महिलाएं ज्यादा नहीं मिलेंगी। इसलिए बहुत बार लोग यह स्वीकार नहीं कर पाते कि कोई लड़की उनके लिए कुछ बना रही है। लेकिन, हमारा उद्देश्य स्पष्ट था और मुझे आम लोगों के लिए काम करना था और यही ईमानदारी हमें यहाँ तक लेकर आई है। अक्सर बिज़नेस शब्द सुनते ही हम करोड़ों और अरबों की बात सोचने लगते हैं और दिमाग में आता है कि ज़रूर बेईमानी करते होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है, आप अच्छे काम के लिए बिज़नेस कर सकते हैं और इसमें अच्छा कमा भी सकते हैं,” उन्होंने कहा।

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Maithili with the wives of Farmers

आने वाले समय में अवाना कंपनी किसानों के लिए और भी प्रोडक्ट्स लॉन्च करने जा रही है। मैथिली का कहना है कि उनकी कंपनी का उद्देश्य किसानों के जीवन की दशा को सुधारना है। उनकी कंपनी अब तक अलग-अलग राज्यों में 12 हज़ार से ज्यादा किसानों के यहाँ जलसंचय तालाब बना चुकीं हैं। उनके इन तालाबों से 80 हज़ार से ज्यादा लोगों के जीवन में प्रभाव आया है। इसके साथ ही, इन तालाबों के ज़रिए उन्होंने 54 करोड़ लीटर पानी भी बचाया है।

अंत में, मैथिली सिर्फ इतना कहतीं हैं कि ग्रामीण भारत में बहुत से मौके हैं, जिन पर यदि काम किया जाए तो हम देश की तस्वीर बदल सकते हैं। हमारी एक छोटी-सी कोशिश भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इसलिए पढ़े-लिखे युवा जिनके पास साधन हैं, उन्हें अपने गांवों और किसानों के बारे में सोचना चाहिए।

अगर आप मैथिली अप्पलवार और उनकी कंपनी के बारे में जानना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें- https://avana.co.in/

वीडियो देखें:

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संपादन – जी. एन झा


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