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महाराष्ट्र: जानिए किन-किन प्लास्टिक वस्तुओं पर लगा है प्रतिबन्ध और कौन-सी वस्तु है बाहर!

फोटो: मुंबई लाइव

साल 2022 तक प्लास्टिक मुक्त होने के भारत के प्रण की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। राज्य के पश्चिमी भाग में प्लास्टिक बैग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। 23 जून से यह प्रतिबन्ध लागू होगा और उम्मीद जताई जा रही है कि इसके चलते प्लास्टिक का उपयोग बहुत हद तक कम किया जायेगा।

तो आज हम आपको बता रहे हैं कि प्लास्टिक और उससे बनी किन वस्तुओं को इस प्रतिबन्ध के दायरे में रखा गया है और किन वस्तुओं को लेकर रियायत बरती गयी है और क्यों।

इन पर लगा है प्रतिबन्ध,

  • सबसे पहले तो प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाई गयी है। क्योंकि रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल होने वाला यह पॉलिथीन पर्यावरण में सर्वाधिक प्रदूषण फैलता है। इसके अपघटन में भी लगभग 500 वर्षों का समय लगता है। इसलिए, इस पर प्रतिबन्ध अत्यंत आवश्यक है।
  • प्लास्टिक प्लेट, ग्लास, कप, कांटे और चम्मच सहित डिस्पोजेबल कटलरी भी इस प्रतिबंध के दायरे में आ सकती है।
  • इसके अलावा, 500 एमएल से कम की पीईटी (पोलीएथीलीन टेरेपथलेट) बोतलों के उपयोग को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।
  • इसके साथ ही थर्माकोल (पॉलीस्टीरिन) के उपयोग पर भी रोक लगाई जाएगी।
  • महाराष्ट्र राज्य सरकार ने तरल पदार्थ की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक पाउच के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का भी फैसला किया है।
  • इसके अलावा यदि कोई होटल/भोजनालय प्लास्टिक में खाने-पीने की वस्तु पैक कर रहा है तो यह भी जुर्म के अंतर्गत आएगा।

इनको रखा गया है प्रतिबन्ध के दायरे से बाहर,

  • दवाइयों की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक का उपयोग जारी रहेगा क्योंकि दवाएं बहुत ही संवेदनशील उत्पाद हैं, तो उनकी सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक अन्य प्लास्टिक पदार्थों की मात्रा में ना के बराबर है।
  • कृषि, बागवानी, और नर्सरी में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक बैगों को भी प्रतिबन्ध से बाहर रखा गया है क्योंकि ये प्लास्टिक बैग बायोडिग्रेडेबल होते हैं और मिटटी को भी कोई हानि नहीं पहुँचाते।
  • सामान के निर्यात में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक
  • निर्माण उद्योग में किसी भी उत्पाद/पदार्थ के निर्माण के दौरान, उसके अलग-अलग हिस्सों/पार्ट्स को ढकने के लिए भी जिस प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है, उसे प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
  • खाद्य पदार्थों जैसे कि दूध को पैक करने के लिए जिस 50 मिलीमीटर से भी पतली प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है, उसे भी प्रतिबन्ध से बाहर रखा गया है।

इसके साथ ही यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि महाराष्ट्र प्लास्टिक प्रतिबंध के उल्लंघन करने पर, पहली बार पकड़े जाने पर अपराध के लिए 5000 रुपये और दूसरी बार 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है। तीसरी बार पकड़े जाने पर 25,000 रुपये जुर्माना और तीन महीने की जेल हो सकती है।

हम उम्मीद करते हैं कि महाराष्ट्र की यह कोशिश रंग लाये और जल्द ही बाकी देश में भी प्लास्टिक का इस्तेमाल ना के बराबर हो।


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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