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“पत्नी के रेपिस्ट को सज़ा दिलाकर रहूँगा,” रेप पीड़िता से शादी कर इस पति ने ली शपथ

“पत्नी के रेपिस्ट को सज़ा दिलाकर रहूँगा,” रेप पीड़िता से शादी कर इस पति ने ली शपथ

यह कहानी है हरियाणा के जींद जिले के एक पूर्व खाप नेता जितेन्द्र छत्तर की, जिन्होंने साल 2012 में एक बयान दिया था – “चाऊमीन खाने से शरीर का हार्मोन असंतुलित होता है और इसके फलस्वरूप बलात्कार करने की इच्छा होती है।” जानिए कैसे यह शख्स इतना बदल गया कि रेप पीड़िता से शादी कर उसके लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ने लगा।

देश में बलात्कार की घटनाएँ दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं, भय और असुरक्षा का वातावरण बनाया जा रहा है, इस वजह से लड़कियों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। लेकिन, आज हम आपको एक ऐसी कहानी से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं, जिससे समाज में उम्मीद की एक नई किरण झलकती है।

यह कहानी है हरियाणा के जींद जिले के एक पूर्व खाप नेता जितेन्द्र छत्तर की, जिन्होंने साल 2012 में एक बयान दिया था, “चाऊमीन खाने से शरीर का हार्मोन असंतुलित होता है और इसके फलस्वरूप बलात्कार करने की इच्छा होती है।”

इस विवादित बयान ने राष्ट्रीय सुर्खियाँ बटोरीं और दिल्ली में निर्भया कांड के बाद समाज का महिलाओं के प्रति व्यवहार और उनकी सुरक्षा के विषय में एक नए विमर्श को जन्म दिया।

जितेन्द्र, उन नेताओं में से एक थे, जो अपने बेतुके बयानों के लिए जाने जाते हैं, जैसे किसी ने कहा, “महिलाओं के जींस पहनने से बलात्कार की घटना को बढ़ावा मिलता है”, तो किसी ने कहा “मोबाइल फोन का उपयोग करने से ऐसी घटनाएँ होती हैं।”

लेकिन, जितेन्द्र ने वक्त के साथ अपने विचारों को बदला है। अब वह बिल्कुल अलग इंसान हैं, क्योंकि 5 वर्ष पहले उन्होंने पूजा (काल्पनिक नाम) से शादी की थी, जो एक बलात्कार पीड़िता हैं और जितेन्द्र अपनी पत्नी को इंसाफ दिलाने के लिए लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं।

कभी पितृसत्ता में यकीन रखने वाले इस इंसान ने समाज के सामने एक मिसाल कायम की है।

पितृसत्ता को दी चुनौती

हरियाणा में भ्रूण हत्या अपने चरम पर है, यहाँ का लिंग अनुपात 920:1000 है। राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, हरियाणा में हर दिन पाँच बलात्कार और हर दूसरे दिन एक गैंगरेप की घटना होती है। ये सिर्फ वो आंकड़ें हैं, जिसकी वास्तव में रिपोर्टिंग की गई है।

इसके साथ ही, राज्य में खाप पंचायतों की उपस्थिति और वर्चस्व के कारण परिस्थितियाँ और भी विकट हो जाती हैं।

एक किसान परिवार से आने वाले जितेन्द्र ऐसे ही समाज में बड़े हुए, जहाँ महिलाओं की भूमिका सिर्फ बच्चे पैदा करने और घर को संभालने तक सीमित है और जितेन्द्र भी इन्हीं विचारों से प्रभावित थे, लेकिन उनकी परवरिश में कुछ अंतर था।

जितेन्द्र ने द बेटर इंडिया को बताया, “मेरी माँ काफी सशक्त महिला हैं, जो यह मानती हैं कि ईश्वर की नजर में स्त्री और पुरुष, दोनों समान हैं। उन्होंने मेरी बहन को कभी भी मुझसे कम नहीं समझा। उन्होंने हमें हमेशा स्वतंत्र रूप से सोचने और सही रास्ते पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया। मुझे अहसास था कि मैंने 2012 में जो बयान दिया था, वह कई मायनों में गलत था और मैं इसे अपने कार्यों से सुधारना चाहता था।”

इसके बाद, जितेन्द्र ने थुआ खाप पंचायत के साथ जींद के 24 गाँवों में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूकता फैलाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही, वह पुरुषों को नारीवाद के बारे में शिक्षित करने और महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को विकसित करने की पहल में भी सक्रिय रूप से शामिल थे।

जितेन्द्र ‘यूथ अगेंस्ट रेप’ के भी एक सक्रिय सदस्य हैं, जो हरियाणा के वकीलों, नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक संगठन है। मुफ्त कानूनी सलाह प्रदान करने, महिलाओं को प्राथमिकी दर्ज करने में मदद करने से लेकर स्कूलों में अधिकारों के विषय में जागरूकता फैलाने तक, यह संस्था धीरे-धीरे पितृसत्ता की हर बेड़ियों को तोड़ रही है।

इस विषय में पेशे से एक वकील और संगठन के सदस्य दर्शन ढांडा बताते हैं, “अधिकांश महिलाएँ सामाजिक कलंक और जागरूकता के अभाव में, अपने इंसाफ के लिए कानूनी प्रक्रिया से डरती हैं। हम लड़कों और लड़कियों को आत्मरक्षा और कानूनी मदद के बारे में शिक्षित करने के लिए स्कूलों और गाँवों में कार्यशालाएं आयोजित करते हैं। जितेन्द्र इस संगठन के सक्रिय हिस्सा रहे हैं। वह महिलाओं के मुद्दों पर काफी मुखर हैं और अपने जीवन के अनुभवों का अक्सर एक उदाहरण के तौर पर जिक्र करते हैं।”

एक बलात्कार पीड़िता से शादी

Haryana leader Married rape survivor
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“मैं आपके लायक नहीं हूँ, आप चाहें तो यह शादी तोड़ सकते हैं। मेरा गैंगरेप हुआ था, जब मैं 19 साल की थी और ये शायद आपके परिवार की इज्जत के लिए अच्छा नहीं होगा”, जब पूजा ने सगाई से कुछ हफ्ते पहले निर्भीक होकर अपने गुजरे हुए कल की कहानी सुनाई, तो जितेन्द्र कुछ क्षणों के लिए निःशब्द रह गए और फिर कमरे से बाहर चले गए।
एक घंटे के बाद, कुछ अकल्पनीय हुआ। जितेन्द्र पूजा से शादी के लिए तैयार हो गए और पूजा के माता-पिता से उनकी बेटी को इंसाफ दिलाने का वादा किया।

जितेन्द्र बताते हैं, “जब पूजा ने मुझे इस घटना के बारे में बताया, तो मैंने उनपर कोई सवाल नहीं उठाया। मैंने तय किया कि इस जघन्य अपराध को जिन्होंने अंजाम दिया है, उन्हें उनके किये की सजा जरूर मिलेगी।”

पूजा से शादी करने को लेकर, जितेन्द्र को जान से मारने की धमकी भी मिली, लेकिन वह पीछे नहीं हटे। बकायदा, समाज को संदेश देने के लिए उन्होंने सभी समारोहों में पूरे गाँव को आमंत्रित किया।

उनकी शादी को पाँच साल हो गए हैं। पूजा कहती हैं, “हम एक-दूसरे की निजता का सम्मान करते हैं, दोस्तों की तरह एक-दूसरे से लड़ते और मदद करते हैं। अपने साथ हुए वीभत्स घटना के बाद, मैंने कॉलेज को छोड़ दिया, लेकिन जितेन्द्र की जिद पर, मैंने शादी के बाद ऑर्ट्स में ग्रेजुएशन कर लिया।”

न्याय के लिए लड़ाई

पूजा के अपराधियों ने दुष्कर्म के दौरान तस्वीरें और वीडियो लेते हुए, धमकी दी थी कि यदि वह पुलिस के पास गई तो उसे बदनाम कर दिया जाएगा। वह लगभग डेढ़ वर्षों तक पूजा के साथ बलात्कार करते रहे, जब तक कि उन्होंने पुलिस में इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई।

लेकिन, पुलिस ने भी मदद के बहाने पूजा का बलात्कार किया। इस तरह, अब पूजा को कानून व्यवस्था से कोई उम्मीद नहीं थी, जब तक कि जितेन्द्र उनकी जिंदगी में नहीं आ गए।

FIR दर्ज किए हुए 5 वर्ष हो गए, लेकिन वह इंसाफ के लिए अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। फिर भी तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए भी उन्हें देश की न्याय प्रणाली पर भरोसा है।

यह जोड़ी आरोपियों द्वारा जान से मारने की धमकी और सबूतों से छेड़छाड़ के खिलाफ सख्ती से लड़ रही है।

इस विषय में जितेन्द्र बताते हैं, “हमें कई बार जान से मारने की धमकी मिलने के साथ-साथ कई मौकों पर केस वापस लेने के लिए पैसे के भी ऑफर हुए। जब भी हम कोर्ट से बाहर निकलते हैं, हमें डर लगता है। घर से कोर्ट आना काफी कठिन होता है और हमें हमेशा भय रहता है कि हमारी गाड़ी पर हमला किया जाएगा। मेरे खिलाफ झूठा मुकदमा दायर किया गया है। इन्हीं सब चीजों के बीच, आरोपियों के राजनीतिक संबंधों ने सबूतों को प्रभावित किया है। इसी वजह से पुलिस ने कई तस्वीरों और वीडियो को डिलीट कर दिया है। जिससे पूजा के केस पर काफी असर हुआ है।”

पूजा के अनुसार, कुछ मौकों पर अदालती कार्यवाही भी पक्षपाती रही है। वहीं, उनके द्वारा हायर किए गए दो वकीलों को केस हारने के लिए रिश्वत दी गई थी।

वह कहती हैं, “मैंने अपने बयान को कई बार दिया और जब मैं गर्भवती थी, तो भी मुझे समन किया गया। कभी आरोपी जमानत पर होते हैं, कभी उनके वकील देर से आते हैं, तो कभी सबूत नहीं होते हैं। मेरी न्यायपालिका से काफी कम उम्मीदें बची हैं।”

इन मुश्किल हालातों में टूटने के बजाय, जितेन्द्र ने प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए कानून की पढ़ाई की। वह कहते हैं, “जिला अदालत ने अभियुक्तों को सिर्फ इसलिए बरी कर दिया, क्योंकि आरोपियों ने हमारे वकील को रिश्वत दी थी और उन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ की। चूंकि, मैं काम नहीं कर रहा हूँ और पूर्णतः अदालत के कार्यों में व्यस्त हूँ, इस वजह से मुझे अपने खेत बेचने पड़े, ताकि मुकदमा लड़ा जा सके।”

एक लंबे अर्से के संघर्ष के बाद, इस मामले को चंडीगढ़ हाई कोर्ट के समक्ष लाया जा सका है, जिसमें मुख्य आरोपी नीरज को नामजद करने के साथ ही, पूरे मामले की फिर से जाँच करने की अपील की गई है।

इस केस को लड़ने के लिए दंपत्ति ने चंडीगढ़ के क्रिमिनल लॉयर अमनपाल को हायर किया है।

भले ही, इंसाफ मिलना दूर की कौड़ी नजर आती हो। लेकिन, दो बच्चों के माता-पिता, जितेन्द्र और पूजा ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। वह कहते हैं, “हम या तो आगे बढ़ कर एक नई शुरूआत कर सकते हैं, या बिना किसी परिणाम की चिंता किए अपनी लड़ाई जारी रख सकते हैं। हमने एक मुश्किल रास्ता चुना है। हम कोई ऐसा उदाहरण नहीं बनना चाहते थे, जो देश में अराजकता की पुष्टि करता हो। हम चाहते हैं कि हर बलात्कार पीड़िता को उम्मीद और साहस मिले। हम उन अपराधियों को आसानी से बचने नहीं देंगे।”

भले ही यह दंपत्ति न्याय की आस में हो, लेकिन यह स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प से जिस ढंग से हर खतरों और चुनौतियों का सामना किया है, वह कई मायनों में उल्लेखनीय है।

मूल लेख- GOPI KARELIA

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कुमार देवांशु देव

राजनीतिक और सामाजिक मामलों में गहरी रुचि रखनेवाले देवांशु, शोध और हिन्दी लेखन में दक्ष हैं। इसके अलावा, उन्हें घूमने-फिरने का भी काफी शौक है।
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