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लखनऊ: बागवानी से बालकनी को दिया ऐसा रूप कि रास्ते में रुककर निहारते हैं लोग

उनके घर में प्लास्टिक की बोतलों से लेकर आटे और तेल की थैलियों तक, सभी कुछ गार्डनिंग के लिए इस्तेमाल होता है!

लखनऊ का जब भी जिक्र आता है, तो हमें बस यही याद आता- ‘मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं।’ आज हम गार्डनगिरी में लखनऊ के ऐसे घर की कहानी सुना रहे हैं, जिसका हर एक कोना फूल-पौधौं से गुलजार है और यही वजह है कि इस घर की बालकनी को देखकर हर किसी का मन खुश हो जाता है।

लखनऊ में रहने वाली विद्या भारतीय के घर की बालकनी हरियाली का दूसरा नाम है। यहाँ हर तरह के फूल आपको मिल जाएंगे। उन्होंने एक एक्सपर्ट की तरह बालकनी को गमलों से सजाया है। विद्या ने द बेटर इंडिया को बताया कि उन्होंने किसी भी लैंडस्केप डिज़ाइनर या फिर माली की सहायता से अपने बालकनी को गार्डन में तब्दील नहीं किया है बल्कि यह 17 साल की मेहनत का नतीजा है। हर मौसम में कुछ नया लगाने वाली विद्या के घर बालकनी से लेकर छत तक, हर जगह आपको हरियाली दिखेगी।

विद्या ने बताया, “मेरे घर में सिर्फ मुझे ही पेड़-पौधों का इतना शौक है। मैं पुराने पेड़ों में कटिंग लगाकर नए पौधे बनाती रहती हूँ। बालकनी में भी कभी कोई लता तो कभी कोई हैंगिंग प्लांटर बनाकर लटकाना मेरा शौक है। हर कोने में हरियाली हो, इस पर काम करती रहती हूँ।”

Vidya Bharatiya

विद्या पेड़-पौधों को परिवार के सदस्य की तरह रखती हैं। उन्होंने बालकनी को खूबसूरती से मैनेज किया हुआ है। बागवानी के काम में वह किसी की मदद नहीं लेती है। जैसे ही वक़्त मिलता है, वह अपने पेड़ों के पास पहुँच जाती हैं। उनका मानना है कि प्रकृति के करीब रहकर आपको ख़ुशी और सुकून मिलता है।

उन्होंने कहा, “आपके चारों तरफ हरियाली रहती है तो शुद्ध हवा आपको मिलती है और एक सकारात्मक वातावरण बना रहता है। फूलों के और अलग-अलग ओरनामेंटल पेड़ और लताएँ, मेरे यहाँ खूब है। अब तो मुझे याद भी नहीं कि कितने पेड़-पौधे हैं। एक अंदाज़ा है कि 200 से तो ज्यादा ही होंगे। इन सबका ख्याल मैं अकेले ही रखती हूँ और अपने एक भी पेड़ को सूखने नहीं देती।”

विद्या, पेड़ों के लिए गमले/प्लांटर्स और खाद आदि भी खुद ही घर पर बनाती हैं। वह कहती हैं कि उनकी कोशिश है कि उनके घर से कम से कम कचरा बाहर जाए। खासतौर पर गीला कचरा और पेड़ों के सूखे पत्ते आदि। इन सबको इस्तेमाल करके वह खाद बनाती हैं। घर पर बना खाद ही वह अपने पेड़ों को देती हैं। विद्या प्रयास करती हैं कि उन्हें गार्डनिंग के लिए बाहर ज्यादा खर्च न करना पड़े।

इसके साथ-साथ, वह घर की पुरानी प्लास्टिक की बोतलों से प्लांटर्स बनाती हैं। उन्होंने प्लास्टिक की बोतलों से दीवार पर एक वर्टीकल गार्डन भी लगाया है। अपने घर में आने वाले आटे या तेल के पैकेट्स को भी वह प्लांटर्स की तरह इस्तेमाल करती हैं।

Her Vertical Garden

वह कहती हैं, “कभी-कभी तो बालकनी हरियाली से बिल्कुल ही ढक जाती है। इसे मैनेज करना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन अच्छा भी लगता है, जब लोग कहते हैं कि आपकी बालकनी बहुत सुंदर लगती है। इससे ही हमारे घर में चार चाँद लगे रहते हैं। कोई भी मेहमान आए वह एक बार तो बालकनी में ज़रूर घूमता है। अब इससे ज्यादा और क्या चाहिए कि हम प्रकृति के करीब भी हैं और हमें तारीफ भी मिल रही है।”

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विद्या के घर में टेरेस गार्डन से लेकर बालकनी और वर्टिकल गार्डन तक, सभी कुछ है। वह सिर्फ अपने शौक के लिए नहीं बल्कि पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी के अहसास से भी पेड़ -पौधे लगाती हैं। उनका कहना है कि एक माँ ने हमें जन्म दिया और एक धरती माँ हैं, जिसकी मिट्टी में हम पले-बढे, खेले- कूदे। इसके पेड़ों की छाँव में उसकी हरियाली का एहसास होता है।

“इसलिए हम सबको पेड़- पौधों की रक्षा करनी चाहिए और सब लोगों को मिलकर पेड़ लगाने चाहिए। जिससे हमारी धरती माँ को भी खुशी मिले कि उसके बच्चों ने उन्हें अनमोल तोहफा दिया है। उनके आँचल को हरा-भरा करने की ज़िम्मेदारी भी हमारी है,” उन्होंने कहा।

विद्या ने इस मौसम से सब्जियों के पौधे भी लगाना शुरू किया है। यह उनकी गार्डनिंग का नया सफर है, जिस पर वह आगे बढ़ने के लिए सबकी शुभकामनाएं चाहती हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि वह सब्ज़ियाँ उगाने में भी सफल रहेंगी।

अगर आपको भी है बागवानी का शौक और आपने भी अपने घर की बालकनी, किचन या फिर छत को बना रखा है पेड़-पौधों का ठिकाना, तो हमारे साथ साझा करें अपनी #गार्डनगिरी की कहानी। तस्वीरों और सम्पर्क सूत्र के साथ हमें लिख भेजिए अपनी कहानी hindi@thebetterindia.com पर!

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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