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One Sun One World One Grid: भारत की सबसे भव्य सोलर ग्रिड के बारे में 10 ज़रूरी बातें

One Sun One World One Grid: भारत की सबसे भव्य सोलर ग्रिड के बारे में 10 ज़रूरी बातें

जरा सोचिए अगर पूरा विश्व ही सौर ऊर्जा से जुड़ जाए तो!

क्लीन और ग्रीन एनर्जी हमारी आज की ज़रूरत है और आने वाले कल की बेहतर नींव भी। जब हम क्लीन एनर्जी की बात करते हैं तो सबसे पहले दिमाग में सौर ऊर्जा का ख्याल आता है। बेशक, सौर ऊर्जा ग्रीन एनर्जी के साथ-साथ किफायती विकल्प भी है।

अच्छी बात यह है कि पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में भारत की स्थिति काफी मजबूत हुई है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2010 में भारत की कुल सौर क्षमता 10 मेगावॉट थी, जो 2016 में 600 गुना बढ़कर 6000 मेगावॉट तक पहुँच गई। पिछले तीन सालों में यह आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ा है। साल 2019 के मार्च महीने में जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की सौर क्षमता 30 गीगावॉट तक पहुंची है और यह सब संभव हुआ है सरकार की लगातार कोशिशों और बेहतर योजनाओं की वजह से।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में प्रशासन पूरा ध्यान केन्द्रित करके काम कर रहा है और इसका उदाहरण है भारत के कई बड़े महत्वाकांक्षी सोलर प्रोजेक्ट्स। दुनिया के पांच सबसे बड़े सोलर प्लांट्स में तीन भारत में हैं, जिनमें हाल ही में 750 मेगावॉट की क्षमता वाले रेवा सोलर पॉवर प्लांट का नाम भी शामिल हुआ है।

हमारे पास आज बहुत से उदाहरण हैं जहाँ सौर ऊर्जा की वजह से बिजली का खर्च बिल्कुल जीरो हो गया है, जैसे कोचीन और कोलकाता के एयरपोर्ट। इन दोनों एयरपोर्ट्स पर सोलर प्लांट लगाए गए हैं और मात्र 3-4 साल में ही इन प्लांट्स को लगाने की लागत वसूल हो गई और अब ये दोनों एयरपोर्ट्स ऊर्जा के लिए किसी पर भी निर्भर नहीं है।

बिज़नेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक घंटे में पूरी पृथ्वी को सूरज से जितनी ऊर्जा मिलती है, वह हमारे पूरे विश्व की साल भर की कुल ऊर्जा खपत से ज्यादा है!

इस एक फैक्ट से हम अंदाज़ा लगा सकते हैं कि सौर ऊर्जा हमारे लिए कितनी ज्यादा फायदेमंद है। फिर भी, भारत में कोयले से उत्पादित होने वाली बिजली का प्रतिशत ज्यादा है, क्यों?

इसके कुछ आसान से जवाब हैं: पहला, हम सौर ऊर्जा 24×7 नहीं ले सकते। दूसरा, सौर ऊर्जा डाईल्युटेड है, इसे सिर्फ किसी एक प्वाइंट पर इकट्ठा नहीं किया जा सकता और इसके लिए हमें बड़े सोलर पैनल की ज़रूरत होती है। जिनके लिए काफी जगह चाहिए। तीसरा, इसको स्टोर नहीं किया जा सकता, इसे लगातार सप्लाई करना पड़ता है।

इन सब समस्यायों का हल ही है भारत का मेगा सोलर प्लान– One Sun One World One Grid!

आखिर क्या है One Sun One World One Grid प्लान:

Mega Solar Plan

इसका सीधा-सा मतलब है एक सूरज, एक विश्व और एक ग्रिड। इसका मतलब है कि एक ट्रांस-नेशनल इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड से अलग-अलग देशों में सौर ऊर्जा सप्लाई की जाए। अलग-अलग देश अपने यहाँ उत्पन्न होने वाली सौर उर्जा को एक-दूसरे के यहाँ ज़रूरत के हिसाब से भेजें। साल 2018 में दूसरे ‘वैश्विक अक्षय ऊर्जा निवेश सम्मेलन’ के दौरान भरत सरकार द्वारा इस योजना की पहल की गई थी। भारत के प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा के महत्त्व पर जोर देते हुए वैश्विक स्तर पर 24×7 सौर ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये ‘OSOWOG’ के माध्यम से विश्व के सभी देशों से मिलकर कार्य करने का आह्वान किया था।

इस कार्यक्रम के तहत क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक दूसरे से जुड़े हुए ‘ग्रीन ग्रिड’ (Green Grid) की स्थापना के माध्यम से विभिन्न देशों के बीच ऊर्जा साझा करने तथा ऊर्जा आपूर्ति में संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। इस योजना पर मंत्रालय ने काम शुरू कर दिया है और इसके लिए एनर्जी कंसलटेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

आज द बेटर इंडिया आपको इस मेगा सोलर प्लान से जुडी महत्वपूर्ण बातें बता रहा है क्योंकि यह योजना सभी देशों के लिए बेहतर साबित हो सकती है।

1. सूरज कभी नहीं छिपता:

इस पूरे प्लान की अवधारणा इस एक तथ्य पर निर्भर हैं और सच भी है- The Sun Never Sets

जब भारत में रात होती है तो और बहुत से देशों जैसे ब्राज़ील में सुबह होती है। इस तरह से जब हमारे यहाँ सौर ऊर्जा उत्पादित नहीं हो सकती, तब किसी और देश में यह काम हो सकता है। इस तरह से हम 24*7 सौर ऊर्जा की सप्लाई ले सकते हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देश इस उर्जा का आदान-प्रदान करते रहें तो ऊर्जा की आपूर्ति करना आसान हो जाएगा।

2. तीन चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया:

इस कार्यक्रम को तीन चरणों में लागू किया जाएगा:

  • इसके पहले चरण के तहत भारत सौर उर्जा के लिए मध्य एशिया, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से जुड़ेगा।
  • दूसरे चरण के तहत अफ़्रीकी देशों को इससे जोड़ा जाएगा।
  • योजना के तीसरे चरण में पूरे विश्व को एक इंटरनेशनल क्लीन एनर्जी ग्रिड से जोड़ा जाएगा।

3. दो जोन में बंटा होगा सोलर ग्रिड

यह सोलर ग्रिड दो जोन में बंटा होगा। ईस्ट जोन में म्यांमार, वियतनाम, थाइलैंड, लाओ, कंबोडिया जैसे देश शामिल होंगे। वेस्ट जोन मिडिल ईस्ट और अफ्रीका क्षेत्र के देशों को कवर करेगा।

4. सतत विद्युत आपूर्ति:

इस एक योजना के माध्यम से से अलग-अलग देशों के ग्रिडों को जोड़कर 24×7 विद्युत् आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। इस योजना के तहत 140 देशों को आपस में जोड़ने का प्लान है। विश्व के अलग-अलग द्वीपों को भी इससे जोड़ा जा सकता है और वहाँ भी ऊर्जा की आपूर्ति की जा सकती है। इससे यक़ीनन कोयले आदि से बनने वाली बिजली पर सभी देशों की निर्भरता कम हो जाएगी।

5. सामूहिक स्वामित्त्व (Common Ownership):

यह कार्यक्रम सहभागिता और सामूहिक स्वामित्त्व के मूल्यों पर आधारित है, जहाँ इस पर सभी सदस्यों का सामूहिक अधिकार होगा। इससे देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे और दूसरे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ेगा।

6. नेतृत्त्व की भूमिका:

भारत ने वर्तमान वैश्विक ऊर्जा संकट के समाधान हेतु OSOWOG के माध्यम से विश्व के समक्ष अपनी नेतृत्त्व क्षमता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। पहली बार भारत विश्व में किसी समस्या के समाधान का नेतृत्व कर रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका मजबूत होगी।

7. लागत में कटौती:

इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए लागत भी काफी लगेगी। लेकिन अगर सभी देश सयुंक्त तौर पर इस लागत को वहन करेंगे तो आर्थिक चुनौती को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

8. स्थापित हो सकता है World Solar Bank

भारत द्वारा OSOWOG के सफल क्रियान्वयन हेतु वित्तीय चुनौतियों को देखते हुए ‘वर्ल्ड सोलर बैंक’ (World Solar Bank-WSB) की स्थापना पर विचार किया जा रहा है। WSB और विश्व बैंक के सहयोग से OSOWOG के लिये प्रतिवर्ष 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रबंध कर वित्तीय चुनौतियों को कम किया जा सकेगा।

9. कार्बन एमिशन होगा कम:

सौरा ऊर्जा के सबसे ज़्यादा अच्छा प्रभाव हमारे पर्यावरण पर होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर एक घर भी सौर ऊर्जा इस्तेमाल करता है तो वह 30 सालों में अपने घर से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को 100 टन तक कम करता है। अब जरा सोचिये अगर पूरा विश्व सौर ऊर्जा से जुड़ जाये तो यह आंकड़े कितने बढ़ सकते हैं।

10: रोज़गार:

इस योजना के क्रियान्वन से न सिर्फ भारत में बल्कि दूसरे देशों में भी काफी रोज़गार उत्पन्न होंगे। आज की तारीख में सोलर टेक्नोलॉजी के मामले में चीन सबसे आगे है लेकिन अगर इस योजना को भारत के युवा मौके की तरह ले तो स्थिति बदल सकती है। भारत में सोलर सेल बनाने पर कभी ज़्यादा फोकस ही नहीं हुआ। लेकिन इस योजना के तहत, सोलर सेल बनाने से लेकर, इसे लगाने और अलग-अलग जगह पहुँचाने की पूरी प्रक्रिया में बहुत से लोगों को रोज़गार मिल सकता है।

अक्सर हमारे सामने समस्या रही है कि पर्यावरण या फिर अर्थव्यवस्था। लेकिन इस मेगा सोलर प्लान से हम दोनों पर साथ में काम कर सकते हैं।


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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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