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इंजीनियर ने बनाई नई तकनीक, 12 घंटे में 250 किलो फल प्रोसेस कर कमा सकते हैं करोड़ों

महाराष्ट्र के नितिन खाडे की बनाई इस मशीन से आप 500 से ज़्यादा प्राकृतिक उत्पाद बना सकते हैं।

महाराष्ट्र के सांगली में पेड गाँव के नितिन खाड़े ने पढ़ाई भले ही इंजीनियरिंग की है लेकिन उनका मन खेती से जुड़े काम में लगता है। कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करते हुए, उन्होंने जैविक खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग से जुड़े कई सर्टिफिकेट कोर्स भी किए हैं। इन दिनों वह फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं।

नितिन ने 2012 में अपनी फ़ूड प्रोसेसिंग कंपनी, ‘महाराष्ट्र फ़ूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजीज’ की नींव रखी। इसके ज़रिए वह अंगूर, हल्दी, मोरिंगा, मिर्च जैसी फसलों की प्रोसेसिंग करके किशमिश, हल्दी पाउडर, मोरिंगा पाउडर, तरह-तरह के फलैक्स आदि बना रहे हैं।

नितिन खड़े के काम की खास बात यह है कि जिस तकनीक से वह फ़ूड प्रोसेसिंग करते हैं, उसे उन्होंने खुद तैयार किया है और इसका पेटेंट भी हासिल कर लिया है। उन्होंने द बेटर इंडिया को अपने सफ़र के बारे में विस्तार से बताया।

“मैं शुरू से ही फूड प्रोसेसिंग में तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट करता था। हम जहाँ रहते हैं वह इलाका अंगूर की खेती के लिए मशहूर है लेकिन यहाँ शायद ही कोई किसान हो जो खुद अंगूर की प्रोसेसिंग करता हो। मुझे लगा कि क्यों न हम अंगूर की प्रोसेसिंग करके देखें। लेकिन मेरे सामने एक समस्या थी। दरअसल अंगूर की खेती में पेस्टीसाइड स्प्रे का सबसे अधिक उपयोग होता है और फिर उनकी प्रोसेसिंग में लगभग 15-20 दिन लगते हैं। इसके बाद ही किशमिश बनती है। यह किशमिश भी पेस्टीसाइड्स की वजह से उत्तम गुणवत्ता की नहीं होती,” नितिन ने कहा।

इसके बाद नितिन ने एक ऐसी तकनीक इजाद करने पर ध्यान दिया, जिससे कि अंगूर से माइक्रोओर्गानिस्म और केमिकल्स को अच्छे से हटाकर, उसकी जल्दी से जल्दी प्रोसेसिंग की जाए। इसके लिए उन्होंने पहले से उपलब्ध तकनीक और मशीन में थोड़े बदलाव किए। कई कोशिशों के बाद , आखिरकार उन्होंने एक प्रक्रिया इजाद कर ही ली, जिससे वह पूर्ण रूप से प्राकृतिक तरीकों से किसी भी फसल को प्रोसेस करके उत्पाद बनाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें सिर्फ 12 घंटे लगते हैं।

Maharashtra Engineer Nitin Khade
Nitin Khade, Maharashtra Food Processing Technologies

क्या है प्रक्रिया:

नितिन बताते हैं कि उन्होंने फसल के हिसाब से यह तकनीक बनाई है। सबसे पहले ज़रूरी है कि अंगूर को अच्छी तरह से साफ़ किया जाए यानी कि उन पर छिड़के गए केमिकल्स आदि को हटाया जाए। इसके लिए उन्होंने ओज़ोनाइजर प्रक्रिया को अपनाया हुआ है। इस इलेक्ट्रिक डिवाइस की मदद से हवा में मौजूद ऑक्सीजन और ओज़ोन को पानी में घोलकर अंगूरों को साफ किया जाता है।

“ओज़ोन की खासियत यह है कि वह हानिकारक माइक्रोओर्गानिस्म को खत्म कर देती है। बाज़ार में उपलब्ध ओज़ोनाइजर अलग-अलग कामों में इस्तेमाल होते हैं लेकिन हमने इसे फ़ूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल किया। अंगूर को धोने के बाद हम ड्रायर में रखते हैं। इस ड्रायर मशीन को भी पहले ओज़ोनाइजर से साफ़ किया जाता है और फिर इसमें अंगूर को रखा जाता है,” उन्होंने आगे कहा।

ड्रायर मशीन का तापमान 25 डिग्री से 34 डिग्री तक रखा जाता है और इसके साथ ही, इसमें नमी बनाए रखने के लिए एक दूसरी मशीन से हवा दी जाती है। इसके बारे में नितिन कहते हैं, “हमारा उद्देश्य सिर्फ किशमिश बनाना नहीं है बल्कि हम चाहते हैं कि अंगूर पोषण भी बरक़रार रहे। अगर बहुत ज्यादा तापमान पर अंगूर को सुखाया जाए तो इसका पोषण खत्म हो सकता है। इसलिए हमने नमी बनाए रखने की प्रक्रिया को शामिल किया है।”

Maharashtra Engineer Nitin Khade
Dehydration of Grapes

ड्रायर में अंगूर को 12 घंटे तक रखा जाता है और इन 12 घंटों में डीहाइड्रेशन के बाद ये अंगूर किशमिश में परिवर्तित हो जाते हैं। ये किशमिश रंग में एक जैसे और खाने में काफी स्वादिष्ट होते हैं। इनमें कोई भी रसायन नहीं होता।

वहीं अगर अंगूरों को सामान्य तौर पर डीहाइड्रेट किया जाए तो किशमिश बनने में लगभग 15 से 20 दिन का समय लगता है।

नितिन कहते हैं कि जब एक बार उन्हें अपनी इस प्रक्रिया में सफलता मिल गई तो उन्होंने अपनी ज़रूरत के हिसाब से एक मशीन डिज़ाइन कराई। उनकी यह मशीन एक चैम्बर की तरह है, जहां पर वह लगभग 250 किलोग्राम अंगूर की प्रोसेसिंग एक साथ कर सकते हैं। 250 किलोग्राम अंगूर से उन्हें लगभग 70 किलो किशमिश मिलती हैं।

“आप अपनी क्षमता के हिसाब से अंगूर से किशमिश बना सकते हैं और वह भी बहुत ही कम समय में। इससे आपकी मेहनत भी बचती है और बिजली जैसे साधन भी,” नितिन ने कहा।

मशीन भी बना रहे हैं नितिन

फ़ूड प्रोसेसिंग के साथ-साथ उन्होंने मशीनरी पर भी काम करना शुरू किया। वह 24 किलोग्राम की क्षमता से लेकर 250 किलोग्राम की क्षमता तक की मशीन बना रहे हैं। वह कहते हैं कि उनका सपना है कि हमारे देश के किसान खुद अपनी फसल को प्रोसेस करें और ग्राहकों तक पहुंचाए।

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“किसानों की तरक्की तभी हो सकती है जब उन्हें उनकी फसल के सही दाम मिलेंगे। जिस शतावर को हम किसानों से 10 रूपये किलों में खरीद रहे हैं, उसे प्रोसेस करके उसका पाउडर 100 रूपये किलो से ऊपर जाता है। लेकिन अगर यही प्रोसेसिंग किसान खुद करे तो उसे बहुत ज़्यादा फायदा होगा,” उन्होंने आगे बताया।

Maharashtra Engineer Nitin Khade
Machine Set-up

नितिन के मुताबिक उनकी इस एक मशीन और तकनीक से ही आप लगभग 500 तरह के प्रोडक्ट्स बना सकते हैं। फ्लेक्स से लेकर ड्रिंक पाउडर तक, आप जो बनाना चाहें बना सकते हैं। अच्छी बात यह है कि यह उत्पादों का रंग, टेक्सचर, स्वाद, और पोषण जैसे गुणों को बरकरार रखती है।

नितिन खुद किशमिश के अलावा हल्दी पाउडर, मोरिंगा पाउडर, प्याज-टमाटर के फ्लैक्स, मेथी पाउडर, धनिया पाउडर, शतावर पाउडर जैसे सैकड़ों प्रोडक्ट्स बना रहे हैं। उनके यह प्रोडक्ट्स दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में सप्लाई होते हैं। बहुत सी आयुर्वेदिक कंपनियां और हर्बल फर्म्स उनसे प्रोडक्ट्स खरीदती हैं।

उनकी इस प्रोसेसिंग यूनिट से बहुत से किसानों की भी मदद हो रही है। वह बताते हैं कि मौसम के हिसाब से वह अलग-अलग फसलों की प्रोसेसिंग करते हैं। जिसके लिए वह लगातार अलग-अलग फसल उत्पादन करने वाले 10-15 किसानों के संपर्क में रहते हैं।

फ़ूड प्रोसेसिंग बना सकता है देश को आत्मनिर्भर

“किसानी की सच्चाई यही है कि मेहनत किसान करता है लेकिन पैसा एजेंट्स को मिलता है, क्योंकि हमारे यहां लोकल लेवल पर फ़ूड प्रोसेसिंग नहीं होती है। अगर लोकल लेवल पर फ़ूड प्रोसेसिंग हो तो किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलेगा और ट्रांसपोर्टेशन या स्टोरेज के अभाव में फसल खराब भी नहीं होगी क्योंकि फिर किसान इसे सीधा प्रोसेस कर पाएंगे,” उन्होंने कहा।

नितिन कहते हैं कि लॉकडाउन में बहुत से लोगों ने संपर्क किया जो इस उद्यम में आना चाहते हैं। मशीन बनाने के ऑर्डर्स भी मिले हैं, जिन पर वह काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, अगर कोई अपना उद्यम शुरू करना चाहता है तो फ़ूड प्रोसेसिंग में करे क्योंकि यह ऐसा उद्यम है जिसमें आप अपनी इन्वेस्टमेंट को मात्र 2-3 साल में वापस कमा लेते हैं, वह भी लाभ के साथ।

Maharashtra Engineer Nitin Khade

वह किसानों को सलाह देते हैं कि अगर समूह बनाकर प्रोसेसिंग यूनिट सेट-अप किया जाए तो किसानों को अधिक लाभ मिलेगा। सरकार भी फ़ूड प्रोसेसिंग के उद्यम को बढ़ावा दे रही है। इसलिए किसानों को आगे बढ़कर इस मौके का फायदा उठाना चाहिए।

अपनी फ़ूड प्रोसेसिंग और मशीन मैनुफक्चरिंग के काम से नितिन खाड़े का टर्नओवर करोड़ों में है। वह कहते हैं, “रिस्क हर जगह है लेकिन अपने अनुभव से मैं फ़ूड प्रोसेसिंग के सेक्टर के बारे में दावे से कह सकता हूँ कि इसमें आप सफल हो सकते हैं। प्रोसेस करके बनाये उत्पादों को अगर अच्छी पैकेजिंग में रखा जाये तो एक साल तक यह चल जाते हैं। लेकिन आप अंगूर को रॉ फॉर्म में कितने दिन रख सकते हैं? इसलिए आज की ज़रूरत फ़ूड प्रोसेसिंग है और किसान को यह समझना ही होगा।”

अगर आप फूड प्रोसेसिंग के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो नितिन से 7738102261 पर संपर्क कर सकते हैं!


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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