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गाँव-गाँव घूम महिलाओं को कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक करती हैं दिल्ली की विदुषी

लॉ के कोर्स में दाखिला लेने के बाद विदुषी ने जाना कि भारत के संविधान में ऐसे बहुत से कानून हैं जो महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाये गए हैं लेकिन ज़मीनी स्तर पर महिलाओं को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है जो भारतीयों को कई तरह के अधिकार देता है। इसमें समानता का अधिकार, भाषा और विचार प्रकट करने की स्‍वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, आस्‍था एवं अन्‍त:करण की स्‍वतंत्रता का अधिकार और अपनी संस्‍कृति सुरक्षित रखने, भाषा बचाए रखने और अल्‍पसंख्‍यकों को अपनी पसंद की शैक्षणिक संस्‍थाएं चलाने का अधिकार शामिल है। ज़रा सोचिये इतने अधिकारों के होते हुए भी अगर हमें यही नहीं पता हो या इस बात की समझ ही नहीं हो कि हमारे अधिकार क्या हैं? या फिर हमारे साथ जो भी घट रहा है क्या वह हमारे अधिकारों के खिलाफ है या नहीं? तो भला ऐसे अधिकारों का क्या फायदा। जरुरी है कि अगर अधिकार हैं तो उनसे जुड़ी जागरूकता भी हो। कुछ ऐसी ही सोच रखती हैं दिल्ली में रहने वाली वकील विदुषी बाजपेई, जो भारत के कई राज्यों में कानूनी जागरूकता अभियान के जरिये ख़ास तौर पर महिलाओं और किशोरियों में उनके अधिकारों से जुड़ी समझ पैदा करने का एक प्रयास कर रही हैं।

स्कूल में किशोरियों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देतीं विदुषी

उत्तर प्रदेश के एक स्कूल से शुरू हुआ कानूनी जागरूकता अभियान

लॉ के कोर्स में दाखिला लेने के बाद विदुषी ने जाना कि भारत के संविधान में ऐसे बहुत से कानून हैं जो महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाये गए हैं लेकिन ज़मीनी स्तर पर महिलाओं को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। विदुषी ने तभी यह ठान लिया था कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह प्रैक्टिस के साथ-साथ महिलाओं को जागरूक भी बनाएंगी। साल 2017 में अपनी लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2018 में विदुषी ने उत्तर प्रदेश के एक स्कूल में अपना पहला कानूनी जागरूकता अभियान शुरू किया।

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स्टैंड अलोन कैंप के दौरान ग्रामीण महिलाओं के बीच विदुषी

दादी और नाना जी से मिली एक बड़ी सीख

विदुषी के प्रेरणासोत्र हैं उनकी दादी और नाना जी, जिन्होंने लड़कियों की स्कूली पढ़ाई के लिए अपने समय में एक लंबी जंग लड़ी। जहां हरदोई के एक स्कूल में प्रिंसिपल के तौर इनकी दादी ने लड़कियों की शिक्षा के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया वहीं इनके नाना जी, जो राजनीति से जुड़े रहे अपने समय में खासतौर पर लड़कियों की शिक्षा के लिए स्कूल बनवाये और उनका हमेशा से यही मानना रहा कि अगर घर की लड़की नहीं पढ़ी लिखी होगी तो समाज कैसे बदलेगा। विदुषी कहती हैं उन्होंने अपनी लॉ की पढ़ाई के दौरान महिलाओं से जुड़े  ऐसे बहुत से अधिकारों के बारे में जाना जिनका उन्हें पहले कुछ पता नहीं था और तभी उन्हें यह एहसास हुआ कि अगर अपने स्तर पर इन बातों का पता उन्हें अपनी पढ़ाई के दौरान चला तो उन ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों का क्या जिन्हें शायद उनके अधिकार से जुड़ा कोई भी ज्ञान नहीं है, उनतक ये बातें आखिर कौन पहुंचाता होगा। यही से पैदा हुई क़ानूनी जागरूकता अभियान की सोच।

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स्कूली छात्राओं के बीच क़ानूनी जागरूकता अभियान

शक्ति विधि से पहुंचेगी हर महिला व बच्ची तक कानून की जानकारी

विदुषी ने क़ानूनी जागरूकता अभियान मिशन का नाम शक्ति विधि रखा है। इस अभियान का लक्ष्य है कि कानून आखिर महिलाओं को कैसे मजबूत बनाता है या भविष्य में होने वाली किसी भी तरह की अनहोनी से कैसे बचा जा सकता है। अपने इसी लक्ष्य के साथ विदुषी ग्रामीण इलाके में एक स्कूल चुनती हैं और वहां जाकर कक्षा आठ से लेकर बारहवीं तक की छात्राओं को उनके अधिकारों को समझाते हुए उन्हें जागरूक करती हैं और कानून में दी गई उनकी शक्तियों से वाकिफ कराती हैं। इस दौरान वहाँ अध्यापिकाएं भी मौजूद रहती हैं जिससे ये बच्चियाँ खुल कर अपनी बात रख सकें और अपने सवाल पूछ सकें। अपने मिशन शक्ति विधि को फिलहाल विदुषी अकेले ही संभाल रही हैं। भविष्य में वह शक्ति विधि मिशन के लिए एक टीम बनाना चाहती हैं।

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महात्मा मेमोरियल इंटर कॉलेज, लखनऊ में कानूनी जागरूकता अभियान

हर व्यक्ति आसान भाषा में जानें क्या हैं उनके क़ानूनी अधिकार

संविधान में शामिल मौलिक अधिकारों के बारे में कहा जाता है कि ये ऐसे अधिकार हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिये जरुरी। विदुषी कहती हैं ये अपने आप में कुछ अहम अधिकार हैं जिनके बारे में हर व्यक्ति को आसान भाषा में पता होना ही चाहिए। जरुरी नहीं है कि अधिकारों की समझ के लिए हम सभी लॉ की ही पढ़ाई करें लेकिन स्कूली स्तर पर भी बच्चों को अधिकारों के बारे में बाताना चाहिए। शक्ति विधि के अपने मिशन के दौरान विदुषी को कई जगहों पर जाकर लोगों के बीच कानून से जुड़ी जागरूकता फैलाने का मौका मिला। विदुषी कहती हैं कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में बांगरमऊ के ज्वाला देवी स्कूल में उनका अनुभव काफी अच्छा रहा। किसी भी जगह पर अपने क़ानूनी जागरूकता अभियान से पहले विदुषी वहां के क्रिमिनल केस से जुड़ी सारी जानकारी जुटा कर जाती हैं और अपने अभियान के दौरान उसे जोड़ कर अधिकारों की जानकारी देती हैं। ज्वाला देवी स्कूल में विदुषी को ऐसे बच्चे मिले जिन्हें पहले से ही अपने इलाके से जुड़े सारे अपराधों की पूरी जानकारी थी। वहीं महिलाओं से जुड़े अपने अनुभव के बारे में विदुषी का कहना है आज भी कहीं-कहीं पर महिलाओं में कोर्ट या कानून को लेकर एक डर बना हुआ है। टूटती शादी हो या हिंसा की घटना, उन्हें लगता है पति को एक डांट लगाकर ही मामले का हल निकाला जा सकता है। विदुषी का मानना है अदालत में महिलाओं या बच्चियों से जुड़े केस का जल्द से जल्द निपटारा फास्ट ट्रैक कोर्ट में होना चाहिए।

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अपने परिवार संग विदुषी

वकालत से एक बेहतर समाज बनाना भी है जरुरी

भारत में प्रसव पूर्व लिंग जांच को अवैध बनाने के लिए एक विशिष्ट कानून होने के बावजूद, यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड की रिपोर्ट 2020 में, भारत में प्रसव पूर्व लिंग जांच के केस सामने आये हैं। लिंग जांच के कारण विश्व स्तर पर गायब तीन लड़कियों में से एक, प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर, दोनों भारत से हैं – कुल 142 मिलियन में से 46 मिलियन ऐसे केस अकेले भारत में। इसके खिलाफ पहला कदम जागरूकता पैदा करना होगा और शक्ति विधि मिशन का यही प्रयास है।  विदुषी कहती हैं छोटे से छोटा अपराध भी एक बड़ा रूप ले सकता है अगर सही समय पर उसके खिलाफ आवाज़ ना उठाई जाए। देश में हमारे लिए बने कानूनों का हमें पूरा फायदा उठाना चाहिए, अगर कहीं भी आपके खिलाफ कुछ गलत हो रहा है तो एक जिम्मेदार नागरिक की तरह उसे रोकना आपका फर्ज है। विदुषी को अपने इस प्रयास में अपने पति और परिवार का सहयोग मिलता है।

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Written by ईश्वरी शुक्ला

ईश्वरी शुक्ला एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में द बेटर इंडिया के साथ जुड़ी हैं।

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