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इस व्यक्ति की मदद से बिना बिजली बिल भरे आप वातानुकूलित घर में रह सकते हैं!

गाडी कर्नाटक का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है और इस दिन को अवकाश के रूप में पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है। पर इस दिन बेंगलुरु के दिनेश पगारिया के पास और भी कारण है उल्लास के!

गृहप्रवेश और पूजा के लिए सजा यह घर केवल इसी वजह से ख़ास नहीं था। गृहप्रवेश के पहले से ही अपनी अनोखी पहल के कारण दिनेश का घर आकर्षण का केंद्र बना रहा।

दिनेश के इस नए घर ने आरम्भ से सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया है और इसके लिए इन्हें एक बार भी अस्थायी बेस्कॉम कनेक्शन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी। 

इसी शहर के रहने वाले और ज़मीन जायदाद के काम से जुड़े दिनेश को हमेशा ही पर्यावरण ने आकर्षित किया है। बिजली रहित ऑफिस की व्यवस्था हो या फिर बिना पेट्रोल के चलने वाली वाली कार। ये मानते हैं, “ मैं हमेशा से ही अपने हर काम को नवीकरणीय(renewable) ऊर्जा के मापदंड पर तौलता हूँ।” सौर्य उर्जा में इन्होने अपनी दिलचस्पी देखी और दो साल पहले अपने भाई का घर बनाते हुए इन्हें इस तकनीक का इस्तेमाल करने का मौका मिला।

ये बताते हैं, “ हम हमेशा सोचते थे की क्यूँ हमे बार बार बिजली विभाग से बिजली लेने की आवश्यकता पड़ती है ।हम क्यूँ नहीं खुद के लिए बिजली उत्पादन करें? मेरे भाई का घर थोडा छोटा है और मुझे लगता था कि मैं  किसी भी त्रुटी को बेहतर तरीके से दूर कर पाऊंगा ”

वहां कोई त्रुटी नहीं हुई और इसकी सफलता ने इस बिल्डर को और महत्वकांक्षी परियोजनाओं के लिए प्रेरित किया। इन्होने ठाना कि यह बेंगलुरु के जयनगर इलाके में अपना नया घर, सौर उर्जा के इसी सिद्धांत पर बनायेंगे।

12 महीने में बने इस घर ने हरित निर्माण में नए मापदण्ड तय किये जिसमे आरम्भ से ही सोलर यूनिट लगा दिया गया था।

सोलर यूनिट की स्थापना वैसे तो कई पर्यावरण प्रेमी लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है पर निर्माण कार्य के समय इसका इस्तेमाल शायद ही देखने मिले। हालांकि  बिल्डर और वास्तुकार इस हरित वास्तु को ले कर संशय में रहते है । सौभाग्य से, दिनेश को स्टूडियो 69 के गणेश कुमार में एक ऐसा साथी मिला, जिसने इन्हें इस प्रोजेक्ट में आने वाली कठिनाइयों को भूल कर इस प्रोजेक्ट में आगे बढ़ने को प्रोत्साहित किया।

गणेश बताते हैं, “ मैं हमेशा ही अपनी बिल्डिंग को प्रकृति अनुकूल बनाने की कोशिश करता हूँ । अगर वहां कोई पेड़ है, तो मैं उसके इर्द गिर्द निर्माण करता हूँ । दिनेश मेरे द्वारा बनाये गए कुछ घरों को देख कर मेरे पास आये थे । उनके पास बहुत सुन्दर ज़मीन थी – मेरे दिमाग में शुरू से ही सौर्य ऊर्जा और पेड़ों का ख्याल था। यह इतना भी मुश्किल नहीं था क्यूंकि वे जानते थे कि उन्हें क्या चाहिए|”

काम की शुरुआत मजदूरों के छावनी पर एक छोटे से पॉवर प्लांट को लगा कर की गयी। जैसे-जैसे बिल्डिंग का निर्माण बढ़ा, उस पॉवर प्लांट का भी स्थान परिवर्तन कर दिया गया और आखिर में घर बनाने के बाद इसे घर के ऊपर जगह दे दी गयी।

इसके बाद, दिनेश और उसकी टीम ने व्यवसायिक तौर पर उपयोग में आने वाले पतले सोलर पैनल लगाये, जिससे धूप न निकलने पर भी बिजली मिल सकती है। इन पतले पैनल पर चला भी जा सकता है। इंजीनियरिंग की टीम ने ऐसे 100 पैनल छत पर लगाये जिनसे अपेक्षित बिजली मिल पाए।

दिनेश के अनुसार इस महत्वकांक्षी कार्य को आरम्भ करने में इकलौती चुनौती उनकी सोच थी।

खुद को एलोन मस्क का फैन मानने वाले दिनेश कहते हैं की इस कार्य में एक चुनौती इसे आरम्भ करने में होने वाली हिचक थी। “ शुरुआत में यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य लग रहा था पर मेरे आर्किटेक्ट ने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया और धीरे धीरे सब आसान होता चला गया। हमने इसे एक साल में पूरा करने की उम्मीद की थी और ऐसा हुआ भी। आज हमारे पास पूरी तरह से वातानूकूलित घर है जो नवीकरणीय उर्जा पर चलता है।”

इस सोलर वेंचर की सफलता के बाद दिनेश ने जेजेजे  सोलर की खोज की। यह एक ऐसा नवीकरणीय उर्जा प्रतिष्ठान है जहाँ इनके जैसी सोच वाले और भी विशेषज्ञ है, जिनके साथ दिनेश पहले भी काम कर चुके हैं। अपने पर्यावरण अनुकूल सिद्धांत में निवेश कर ये उम्मीद करते हैं कि अधिक से अधिक लोगों को नवीकरणीय उर्जा पर शिक्षित करें और उनके साथ मिल कर व्यावसायिक और अव्यवसायिक जगहों को सौर्य उर्जा से संचालित करने योग्य बनाए।

जे जे जे सोलर में दिनेश पगरिया की टीम से आप यहाँ संपर्क कर सकते हैं।

मूल लेख – सोहिनी दे 


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Written by निधि निहार दत्ता

निधि निहार दत्ता राँची के एक कोचिंग सेंटर, 'स्टडी लाइन' की संचालिका रह चुकी है. हिन्दी साहित्य मे उनकी ख़ास रूचि रही है. एक बेहतरीन लेखिका होने के साथ साथ वे एक कुशल गृहणी भी है तथा पाक कला मे भी परिपक्व है.

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