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किसानों को बिजली के करंट से बचा रहा है इस इंजीनियर का इनोवेशन!

किसानों को बिजली के करंट से बचा रहा है इस इंजीनियर का इनोवेशन!

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल 10 हज़ार से भी ज्यादा लोगों की मौत बिजली का करंट लगने से होती है, जिनमें ज़्यादातर किसान होते हैं!

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के मुताबिक साल 2017 में भारत में 14 हज़ार मौते करंट लगने से हुईं और हर साल बिजली का करंट लगने से होने वाली मौतों का यह आंकड़ा बढ़ता है। खासतौर पर किसान इस तरह की घटनाओं का शिकार होते हैं। खेतों पर कभी वाटर पंप चलाते समय झटका लग जाता है तो कभी बंद करते समय। इतना ही नहीं अगर कभी वाटर पंप की तारें खेतों के चारों तरफ लगी फेंसिंग के संपर्क में आ जाएं तब भी इंसानों और जानवरों को झटका लगने का खतरा रहता है। वजह, सालों-सालों तक बिजली के उपकरणों को न तो बदला जाता है और न ही उनका ठीक से रख-रखाव होता है।

“अगर आप किसी किसान से कहें कि वह नियमित तौर पर वाटर पंप स्टार्टर या फिर तारों को बदलवाते रहें तो उनका जवाब होगा कि वही पैसा वे अपनी खेती में न लगा लें। किसानों की यही लापरवाही उनके लिए जानलेवा साबित होती है। लेकिन हम पूरी तरह से उन्हें भी ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते क्योंकि किसानों के देश में क्या हालात हैं ये हम सब जानते हैं,” यह कहना है हैदराबाद के रहने वाले सत्या इल्ला का।

सत्या इल्ला एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, आविष्कारक हैं और एक उद्यमी भी। उन्होंने किसानों की इन सभी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए एक ‘इलेक्ट्रिकल पंप मोटर स्टार्टर’ बनाया है जो हर तरह से किसानों के लिए सुरक्षित है। यदि किसान इसे अपने खेतों में लगाते हैं तो इससे न तो उन्हें करंट लगेगा और न ही उनकी मोटर खराब होने की दिक्कत होगी।

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Satya Illa

कैसे हुई शुरूआत:

सत्या ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैं 6 साल का था और मकर संक्रांति का त्यौहार था। हम बच्चे अपनी पतंगों के साथ खेल रहे थे। फिर मैंने अपनी छत से नीचे देखा तो रास्ते पर बहुत भीड़ लगी हुई थी। बाद में, मुझे पता चला कि मेरे एक दोस्त की पतंग बिजली की तारों में फंस गयी थी, जिसे निकलते समय उसे करंट लग गया और उसकी मौत हो गई। आज भी मेरे मन से उसकी तस्वीर नहीं जाती।”

इस घटना ने सत्या के मासूम मन को हिला कर रख दिया। हमेशा खुश रहने वाला सत्या अचानक से शांत हो गया और उनके मन में एक डर बैठ गया। सत्या कहते हैं कि वक़्त के साथ जब वह बाहर निकले, स्कूल-कॉलेज में नए लोगों से मिले तो उनके मन का डर चला गया। लेकिन एक बात जो उनके जहन से कभी नहीं गई वही थी बिजली। उन्होंने ठान लिया था कि वह इसके बारे में पढ़ेंगे, जानेंगे और समझेंगे कि क्यों उनके दोस्त की मौत ऐसे हो गई। स्कूल के बाद उन्होंने कॉलेज में इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और इलेक्ट्रिकल स्ट्रीम चुनी।

सत्या ने कहा, “कॉलेज में हमारे एक प्रोफेसर ने क्लास में पूछा कि हम सब लोग आगे चलकर क्या करना चाहते हैं? सबने अलग-अलग जवाब दिए किसी को जॉब करनी थी, कोई सरकारी पद हासिल करना चाहता था। मैंने उनसे कहा कि मैं उद्यमी बनूँगा और अपना कुछ शुरू करूँगा। मुझे पहले लगा था कि सब मुझ पर हसेंगे लेकिन मेरे प्रोफेसर ने मुझ पर भरोसा दिखाया और कहा कि तुम कर सकते हो।”

Visiting Electricity Substation

सत्या के प्रोफेसर, डॉ. हफीज़ बाशा ने इसके बाद उनका हर कदम पर मार्गदर्शन किया। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्हें इंस्टिट्यूट ऑफ़ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स का कॉलेज चेयरमैन बनने का मौका मिला और यहीं से उनका इनोवेशन का सफ़र शुरू हुआ। सत्या बताते हैं कि उन्हें प्रैक्टिकल्स करने के मौके मिले और यहीं पर उन्हें किसानों के साथ हो रही दुर्घटनाओं के बारे में जानने की राह भी मिली। उन्होंने अपनी रिसर्च के दौरान गाँव-गाँव जाकर किसान परिवारों से मुलाक़ात की और उन्हें पता चला कि हर साल सिर्फ तेलंगाना में लगभग 4000 मौतें बिजली के कारण होती हैं।

“मुझे समझ में आ गया कि यह समस्या कोई छोटी समस्या नहीं है। लेकिन अब सवाल था कि आखिर मैं कैसे इसका हल निकालूं। मैंने अपने मेंटर के मार्गदर्शन में इस दिशा में काम करना शुरू किया और एक ऐसा सिस्टम बनाया जिससे कि खेतों पर मोटर पंप चालू या बंद करते समय होने वाले हादसों को रोका जा सके।”

सत्या का आविष्कार:

वह आगे कहते हैं कि किसानों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं के लिए दो कारण हैं- सबसे पहला जागरूकता की कमी और दूसरा, उनकी अनदेखी। किसान पुराने उपकरणों को बदलते नहीं है क्योंकि इसमें काफी पैसा खर्च होता है। इसलिए सत्या ने साल 2016 में एक ‘इलेक्ट्रिकल पंप मोटर स्टार्टर’ बनाया। इसकी खासियत है कि यह ग्लास फाइबर का बना है, जिसमें से करंट पास नहीं होता। साथ ही, इसमें एक खास सुरक्षा उपकरण लगाया गया है जिससे कि हैवी लोड के समय भी मोटर खराब न हो और न ही किसान को कोई नुकसान पहुंचे।

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His Innovation

इस डिवाइस की सबसे खास बात है इसका इंटरनल सर्किट, जिसे सत्या ने इस तरह से डिजाईन किया है कि किसी को भी कोई बिजली का झटका न लगे। साथ ही, मोटर को चालू और बंद करने का बटन भी डिवाइस के बॉक्स के बाहर लगाया गया है। सत्या के इनोवेशन को बाल विकास इन्क्यूबेशन सेंटर से पहचान मिली और उनके ज़रिए ही उन्होंने किसानों तक पहुँचने की ठानी।

सत्या बताते हैं कि उन्होंने डिवाइस तो बना लिया लेकिन इसे किसानों तक पहुँचाना आसान नहीं था। क्योंकि सबसे पहले किसानों की जागरूक करने की ज़रूरत थी। इसके लिए उन्होंने अपनी सोशल एंटरप्राइज की शुरुआत की।

‘कांति’ सोशल एंटरप्राइज:

साल 2018 में सत्या ने अपनी सोशल एंटरप्राइज, कांति की शुरुआत की, जिसका मतलब होता है ‘लाइट/उजाला’! इसके ज़रिये उन्होंने गांवों में जागरूकता अभियान चलाया। गाँव के किसानों को समझाया गया कि जिस तरह हम अपने फ़ोन, टीवी, घर के बाकी उपकरण जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन को अपडेट करते हैं। वैसे ही ज़रूरी है कि हम अपने खेतों की वायरिंग और मोटर पंप को भी अपडेट करे।

सत्या बताते हैं, ” किसानों को समझाना और उन्हें बदलना बिल्कुल भी आसान नहीं है। इसलिए मैंने कभी उनसे अपने इनोवेशन के बारे में बात नहीं की बल्कि उन्हें सबसे पहले उन समस्याओं के बारे में समझाया गया जो वो हर रोज़ झेलते हैं। उन्हें समझाया गया कि वे कहाँ गलत हैं और उन्हें कहाँ ध्यान देने की ज़रूरत है। फिर जब वे हमसे इसका हल पूछते हैं तब मैं उन्हें मेरे डिवाइस के बारे में बताता हूँ।”

हालांकि, किसान बहुत सोच-विचारने के बाद ही उनका डिवाइस खरीदते हैं और अपने खेतों में लगाते हैं।

Awareness Camp for Villagers and Farmers

उनके डिवाइस की कीमत सात हज़ार रुपये है। लेकिन किसान इसे आसानी से खरीद पाएं इसलिए सत्या उनके लिए सब्सिडी रखते हैं। वह अलग-अलग संगठनों से बात करके किसानों के लिए इस डिवाइस को 50% सब्सिडी पर उपलब्ध करा रहे हैं। अब तक उन्होंने 350 से ज्यादा डिवाइस बेचे हैं। लेकिन जागरूकता के मामले में उनकी पहुँच 9 हज़ार से भी ज्यादा किसानों तक है। वह कहते हैं कि अब तक जहां भी उनका डिवाइस लगा है,वहाँ से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है।

इसके अलावा, किसानों की मदद के लिए उन्होंने गाँव के स्तर पर ही कुछ लोगों को ट्रेनिंग देना शुरू किया है। उनसे ट्रेनिंग लेकर ये लोग गाँव के किसानों की बिजली से संबंधित परेशानियों को हल करते हैं। फ़िलहाल, सत्या का काम तेलंगाना और आंध्र-प्रदेश में ही चल रहा है। लेकिन धीरे-धीरे वह अन्य राज्यों में भी कदम रख रहे हैं।

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Creating Awareness and Making an Impact

अपने उद्यम को सम्भालने के अलावा, सत्या नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन से जुड़े हुए हैं। वह हैदराबाद के ही एक स्कूल में बच्चों को तरह-तरह की तकनीक के बारे में पढ़ाते हैं और यहाँ कि अटल टिंकरिंग लैब संभालते हैं। उन्हें उनके इनोवेशन के लिए ब्रिटिश कॉमनवेल्थ ने सम्मान से नवाज़ा है।

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अगर आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है और आप सत्या इल्ला से बात करना चाहते हैं तो 8143645625 पर कॉल कर सकते हैं।


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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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