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खुद खेती कर, मेकैनिकल इंजीनियर बना रहा 40 आर्गेनिक प्रोडक्ट्स, 250 लोगों को दिया रोज़गार!

2015 में इस बिजनेस के शुरू होने के बाद से उन्होंने अब तक 10 लाख से अधिक इकाइयां बेची हैं।

लिए आज अपनी आंखें बंद करके, खुद से एक सवाल करते हैं। अगर दुनिया में जीने के लिए पैसा एक महत्वपूर्ण चीज नहीं होती तब आप अपनी ज़िंदगी कैसे जीते? आंखें बंद करने पर मेरे सामने जो तस्वीर आ रही है, वह है दूर पहाड़ियों पर एक छोटा सा घर और घर के साथ खेती करने के लिए ज़मीन का बस एक टुकड़ा। उस ज़मीन परहरी-हरी साग-सब्जियां लगी हैं। किसी सपने जैसा लगता है नहीं? पर कोई है जिसने इस सपने को हकीकत में बदलकर दिखाया है।

नैनीताल में अपने खेत में रजनीश चावला

गुरुग्राम के रहनेवाले रजनीश चावला पेशे से एक मेकैनिकल इंजीनियर हैं। रजनीश का सपना था कि वो अपने परिवार और अपने आस-पास रहनेवाले लोगों को शुद्ध और स्वच्छ खाना उपलब्ध करा पाएं। अपने सपने को साकार करने का जोश लिए रजनीश ने 2012 में नैनीताल में 10 एकड़ ज़मीन खरीदी। 
52 साल के रजनीश कहते हैं, “बज़ार में मिलनेवाली सब्ज़ियों और फलों में केमिकल का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया था। ऑर्गेनिक खेती करने का मेरा मुख्य उद्देश्य खुद के लिए और आस-पास के लोगों के लिए शुद्ध, स्वच्छ और ताजा खाना उपलब्ध कराना था।”

ऑर्गेनिक खेती के साथ, रजनीश की रुची एपिकल्चर यानी मधुमक्खी पालन में भी बढ़ने लगी। रजनीश बताते हैं कि, “बाजार में मिलने वाले शहद को चखते ही हमें पता चल जाता है कि यह शुद्ध नहीं है। इसलिए कुछ स्थानीय लोगों ने जब रुची दिखाई और आगे बढ़कर सामने आए तब मैंने मधुमक्खी पालन करने का फैसला लिया।”

फार्म नैचुरलई स्थानीय समुदायों से शहद निकालते हैं और इसने 250 परिवारों को प्रभावित किया है।

जब उनके दोस्तों और परिवार ने इनमें से कुछ प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना शुरू किया, तो वे बहुत प्रभावित हुए। उनके जानने वालों ने उन्हें यह काम आगे बढ़ाने का प्रोत्साहन दिया। जो काम केमिकल-मुक्त खाना खाने की इच्छा से शुरु किया गया था, उसे 2015 में आधिकारिक तौर पर एक बिजनेस का रुप दिया गया, जिसे अब ‘फार्म नैचरल’ के नाम से जाना जाता है। यहां शहद, तेल, सिरका, और जूस जैसे नैतिक तरीके से निकाले गए और प्राकृतिक प्रोडक्ट्स मिलते हैं। रजनीश ने अलग-अलग प्रकार के शहद दूसरे राज्यों जैसे कि राजस्थान, जम्मू और कश्मीर और झारखंड से मंगाना शुरु किया है।

आज की तारीख में ‘फार्म नैचरल’ के पास करीब 40 प्रोडक्ट्स हैं। 2015 में बिजनेस शुरू होने के बाद से 10 लाख से अधिक इकाइयां बेची गयी हैं। इतना ही नहीं, इस पहल के ज़रिए 250 से ज्यादा लोगों को रोज़गार भी मिला है।

शून्य से कृषि व्यवसयाय की शुरुआत।

फाउंडर रजनीश चावला )

रजनीश के इंजीनियर से एक व्यवसायी बनने तक की यात्रा काफी दिलचस्प रही है। 1990 में, उन्होंने जयपुर के नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की।
1990 से 1999 के बीच, उन्होंने एचएएल लिमिटेड, मेकास्टर इंजीनियरिंग और ब्लूस्टार जैसी देश की नामचीन कंपनियों के साथ सेल्स और मार्केटिंग विभाग में काम किया। फिर 1999 के अंत में, उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ ‘44°.com’ नामक एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की स्थापना की।

इसके बारे में रजनीश ने हमें बताया, “यह औद्योगिक क्षेत्र में उपभोक्ताओं के लिए दस्ताने, फास्टनर, नट और बोल्ट जैसे उपकरण खरीदने के लिए एक मंच था। लेकिन, उस समय भारत में ई-कॉमर्स की अवधारणा बहुत नई थी और लोगों के मन में इंटरनेट पर खरीदारी करने को लेकर कई शंकाएं थीं। यही कारण है कि लगभग चार साल चलाने के बाद हमें इसे बंद करना पड़ा।”

उन्होंने तब औद्योगिक उपकरण बनाने वाली कंपनियों के साथ काम करना शुरू किया। उन्होंने इन कंपनियों को प्रोडक्ट्स के लिए बाजार और ग्राहक का आधार बनाने में मदद की।

जल्द ही रजनीश के दिमाग में ऑर्गेनिक फार्म प्रोडक्ट्स का बिजनेस शुरु करने का ख्याल आया। धीरे-धीरे इरादा मजबूत हुआ। फिर नौकरी के दौरान जमा की गई धनराशि से उन्होंने नैनीताल में 10 एकड़ जमीन खरीदी और इसके बाद जो हुआ, उसने इतिहास रच दिया।

मधुमक्खी पालन की ओर कदम

नैनीताल में ऑर्गेनिक खेती शुरु करने के दो साल बाद, 2014 में रजनीश ने मधुमक्खी पालन की ओर पहला कदम बढ़ाया। वह उन लोगों तक शुद्ध शहद की पहुंच आसान बनाना चाहते थे, जो अच्छी गुणवत्ता वाले शहद खरीदने के लिए बड़ी रकम खर्च कर रहे थे।

रजनीश बताते हैं, “नैनीताल से जिम कॉर्बेट की दूरी बहुत ज्यादा नहीं थी और यहाँ कई तरह के फूलों के पेड़ थे जो मधुमक्खी पालन के लिए उचित और सही हैं। फिर सारी जरुरी अनुमतियां लेने के बाद, मैंने वहां गांवों से कुछ लोगों को नियुक्त किया जो मधुमक्खियों को रखे जाने वाले बक्से की देख-रेख करें।”

आम तौर पर, इन बक्सों को फूलों के पेड़ों के नीचे रखा जाता है ताकि मधुक्खियां फूलों का रस निकाल सकें और कच्चा, स्वादिष्ट और बिना किसी मिलावट के शहद बन सके। वर्तमान में, शुद्ध शहद निकालने के लिए जिम कॉर्बेट में करीब 300 बक्से मौजूद हैं।

रजनीश आगे बताते हैं, “इन बक्सों के साथ हमें बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है। मार्च और अप्रैल के महीनों में हम उन्हें लीची जैसे पेड़ों के नीचे रखते हैं। जुलाई जैसे मॉनसून के महीनों में हम बेहद सावधान रहते हैं क्योंकि समय पर फूल नहीं आते हैं और बारिश शहद को खराब कर सकती है। एक विशेष क्षेत्र के फूलों की पैदावार को देखते हुए हम बक्सों की जगह भी बदलते हैं।”

अब ‘फार्म नैचरल’ में कई तरह के शहद उपलब्ध हैं। देशभर के स्थानीय किसानों की मदद से शहद में कई तरह के फ्लेवर डाले गए हैं। फ्लेवर के बारे में बात करते हुए रजनीश बताते हैं, “बबुल का शहद जम्मू-कश्मीर से आता है, वाइल्ड बेरी राजस्थान से और तुलसी का शहद झारखंड से आता है।”

शहद के अलावा, उनके पास खाना पकाने के तेल, सिरका और जूस जैसे दूसरे प्रोडक्ट भी हैं। जिम कॉर्बेट के पास रामनगर में स्थानीय मंडी से आने वाले प्रोडक्ट्स के साथ-साथ उनके उत्तराखंड के खेत में उगने वाली सरसों और तिल से खाना पकाने का तेल बनाया जाता है और फिर इसे गुड़गांव ले जाया जाता है जहां इसे पैक करके बेचा जाता है।

वे उन उत्पादन इकाइयों से भी तेल प्राप्त करते हैं, जिनके पास ऑर्गेनिक प्रमाणपत्र होते हैं और उनके ब्रांड नाम के तहत अपने प्रोडक्ट बेचते हैं। हर्बल जूस का उत्पादन जयपुर के एक आयुष-प्रमाणित कारखाने से किया जाता है। उसकी भी पैकिंग गुरुग्राम में होती है।

शहद की मीठी गुंजन


‘फार्म नैचरल’ के पास कई तरह के ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स हैं जिसे वे बनाते और बेचते हैं। लेकिन इनमें से सबसे प्रमुख है शहद, जिसने अपनी एक अलग पहचान बना ली है।

गुरुग्राम में रहने वाली रिटायर्ड आयरिश ब्यूरोक्रेट, मिनाक्षी बत्रा कहती हैं, “मैं और मेरे पति शहद पसंद करते हैं। हम एक गिलास गर्म पानी में शहद मिलाकर, उसमें थोड़ा सा नींबू का रस निचोड़कर पीते हैं। हम चाहते थे कि हमारा शहद ऑर्गेनिक हो और अच्छी गुणवत्ता वाला हो, यही वजह है कि अक्सर हमने विश्वसनीय विदेशी ब्रांडों द्वारा बनाए सामान की ओर रुख किया जो काफी महंगे थे।”

लेकिन, लगभग चार साल पहले, मिनाक्षी की दोस्त और रजनीश की पड़ोसी ने उन्हें रजनीश द्वारा बेचे जा रहे ऑर्गेनिक शहद के बारे में बताया। तब बत्रा और उनके पति ने रजनीश के आउटलेट पर जाने का फैसला किया। वहां पहुंचने पर बत्रा और उनके पति ने रजनीश से कुछ जानकारियां प्राप्त की, शहद कहां से आता है, क्या यह पूरी तरह से ऑर्गेनिक है, इसे कैसे बनाया जाता है? वगैरह

अब पिछले चार सालों से बत्रा दंपत्ति को दूसरा ब्रांड तलाशने की जरुरत नहीं पड़ी है। बत्रा मुस्कुराते हुए बताती हैं, “मेरे पति और मैं जंगली-शहद के बड़े फैन हैं। मै अदरक प्लेवर का शहद भी खरीदती हूँ जो मेरी माँ और बहन को भी पसंद है। चार साल पहले, मैं 250 ग्राम शहद के लिए 700 रुपये खर्च करती थी और अब 1 किलो ऑर्गेनिक शहद के लिए भी इतने ही पैसे खर्च करती हूँ।”

शहद के अलावा, बत्रा दंपत्ति यहां से एलोवेरा जेल, आंवला पाउडर और उनके खाना पकाने का तेल भी खरीदते हैं।

लड़ना और आगे बढ़ना

रजनीश का दिन, सुबह 5:30 की उनकी सैर से शुरु होती है। सैर के बाद , वह करीब 10:30 बजे तक काम करते हैं और फिर वह अपने दिनभर का प्लान बनाते हैं।

सुनने में रजनीश की कहानी सरल और सफल लग सकती है लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया है।

वह बताते हैं, “जैसा कि हम चाहते हैं कि हमारे प्रोडक्ट्स शुद्ध हों, इसलिए कई गुणवत्ता सही न होने पर हमें सप्लायर बदलना पड़ता है। बेहतर गुणवत्ता वाले प्रॉडक्ट बनाने का लगातार दबाव होता है और जैसा कि हम बिना किसी बाहरी मदद और पूंजी के यह काम कर रहे हैं, तो कैश फ्लो थोड़ा मुश्किल होता है।”

हालांकि, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ, वह इन चुनौतियों का सामना करने और इससे उबरने में सक्षम रहे।
अपने अनुभवों से, रजनीश नया बिजनेस शुरु करनेवालों को संदेश देना चाहते हैं।
वह कहते हैं, “हमेशा अपने संचालन की योजना बनाएं और बिना सोचे समझे कोई भी निर्णय न लें। कम से कम एक वर्ष का समय लें और यह सुनिश्चित करें कि आपके पास शुरुआती चरणों में संचालन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त धन है। आपको चुनौतियों और असफलता का सामना करना पड़ सकता है लेकिन यह व्यवसाय चलाने का एक हिस्सा है।
मजबूत रहें और काम करते रहें।”

तो, बतौर व्यवसायी अपने लिए कैसी भविष्य की कल्पना करते हैं?

रजनीश का कहना है कि वह ज्यादा खरीददारों के साथ-साथ और नए सप्लायरों के साथ भी काम करना चाहते हैं। वह सौंदर्य प्रसाधन से लेकर खाने की समाग्री जैसे कि पीनट बटर, नमक, और गुड़ पाउडर जैसे अन्य प्रोडक्ट्स पर भी काम करना चाहते हैं।
अंत में रजनीश कहते हैं, “बाजार तेजी से आर्टिफिशिअल प्रोडक्ट्स से ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रहा है। लोग प्रकृति की अच्छाई के बारे में अधिक से अधिक शिक्षित हो रहे हैं और यह हमारे लिए एक अच्छा संकेत है। हम अपने परिचालन को बढ़ाना चाहते हैं और ज्यादा किसानों के साथ काम करना चाहते हैं।”

रैपिड फायर –
* एक व्यवसायी जिसकी आप प्रशंसा करते हैं।
– रतन टाटा।

* नई तकनीक जो छोटे व्यवसायों के भविष्य को बदल सकती है?
– ऐसी तकनीक जो पानी का इस्तेमाल कम करने में मदद करे।

* एक जीवन-मूल्य जो छोटे व्यवसायों को बढ़ाने में मदद कर सकता है?
-बेहतर योजना और धैर्य

* आपकी पसंदीदा किताब?
-रिच डैड, पुअर डैड

* ख़ाली व़क्त में क्या करना पसंद करते हैं?
-किताब पढ़ना

* इस इंटरव्यू से पहले मैं ____ था?
ऑफिस में काम कर रहा था 🙂

* ऐसी चीज जो कॉलेज में नहीं पढ़ाई जाती लेकिन बिजनेस चलाने के लिए जरुरी है?
-सामाजिक कौशल

• एक सवाल जो मैं काम पर लोगों को रखते वक्त हमेशा पूछता हूँ?
-दो साल से अधिक समय तक कंपनी में काम करने के बाद वे खुद को कहां देखते हैं।

* सबसे अच्छी सलाह जो आपको मिली है वह क्या है?
-अति महत्वाकांक्षी नहीं होना चाहिए और कभी भी असफलता से हतोत्साहित नहीं होना चाहिए!

मूल लेख – अंगारिका गोगोई

संपादन – मानबी कटोच


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Written by पूजा दास

पूजा दास पिछले दस वर्षों से मीडिया से जुड़ी हैं। स्वास्थ्य और फैशन से जुड़े मुद्दों पर नियमित तौर पर लिखती रही हैं। पूजा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है और नेकवर्क 18 के हिंदी चैनल, आईबीएन7, प्रज्ञा टीवी, इंडियास्पेंड.कॉम में सक्रिय योगदान दिया है। लेखन के अलावा पूजा की दिलचस्पी यात्रा करने और खाना बनाने में है।

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