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2 इन 1 सोलर पैनल तकनीक: बिजली उत्पादन के साथ होगा पानी भी गरम!

इस तकनीक से एक दिन में लगभग 300 वॉट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। साथ ही, हर दिन आप 100 लीटर पानी भी गर्म कर सकते हैं!

भारत का लक्ष्य साल 2022 तक देश की नवीनीकरण ऊर्जा की क्षमता को 175 गीगावाट तक पहुँचाना है। जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा, 100 गीगावाट सौर ऊर्जा का है। पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र में जिस तरह से काम हो रहा है, उम्मीद है कि भारत अपना लक्ष्य पूरा कर पाएगा।

जैसे-जैसे हम सौर ऊर्जा में आगे बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे ही सौर ऊर्जा संचित करने वाली तकनीक में भी बदलाव हो रहा है। सोलर टेक्नोलॉजी में नए-नए आविष्कार हो रहे हैं और अच्छी बात यह है कि देश के युवा इस क्षेत्र में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

इन युवाओं का एक ही उद्देश्य है अपने देश को ऊर्जा के क्षेत्र में शीर्ष पर देखना। हैदराबाद के प्रणीत पिल्लारीसेट्टी और हर्ष वर्धन रेड्डी का नाम भी इन युवाओं की फेहरिस्त में शामिल होता है। इन दोनों ने मिलकर एक सोलर स्टार्टअप, ‘बर्ड्स आई एनर्जी’ की शुरुआत की है।

अपने स्टार्टअप के ज़रिए उन्होंने ऐसा ‘सोलर डुप्लेक्स’ डिजाइन किया है जो सोलर पैनल और सोलर हीटर, दोनों का काम करता है। भारत में यह इस तरह का पहला इनोवेशन है!

Solar Energy in India
Praneeth Pillarisetti and Harsha Vardhan Reddy

प्रणीत ने IIT मद्रास से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में अपनी ग्रैजुएशन की और यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ्लोरिडा से रिन्यूअल एनर्जी में मास्टर्स की डिग्री ली। अपना स्टार्टअप शुरू करने से पहले उन्होंने ग्रीन एनर्जी के सेक्टर में काफी काम भी किया। IIT मद्रास में हर्षा, प्रणीत के बैचमेट थे और उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में अपनी बी. टेक की। बाद में, IIM अहमदाबाद से एमबीए और फिर कई सालों तक फाइनेंस सेक्टर में काम किया।

प्रणीत बताते हैं, “मास्टर्स के दौरान ही मुझे आइडिया आया था कि ऊर्जा के क्षेत्र में अपना कुछ करना है और जो भी मैं करूंगा, वो पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ कॉन्सेप्ट होगा।”

आईडिया पर किया काम

लगभग एक दशक तक ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने के बाद प्रणीत ने अपने आईडिया को हक़ीक़त में बदलने का फैसला किया। काफी रिसर्च करने के बाद उन्होंने सौर ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने की ठानी। उनके इस सफर में हर्षा भी उनके साथ जुड़ गए और उन दोनों ने मिलकर साल 2016 में अपना स्टार्टअप शुरू किया।

किसी भी स्टार्टअप के लिए आइडिया के साथ-साथ फंडिंग भी बहुत ज़रूरी होती है। प्रणीत और हर्षा के लिए भी सबसे पहली चुनौती यही बनी। इस बारे में प्रणीत कहते हैं, ” हमारे दोस्तों का जो ग्रुप है, उसमें हम एक-दूसरे की सोच को समझते हैं। हम सब कुछ न कुछ नया करना चाहते हैं, कुछ ऐसा जो भारत को अच्छा बनाए। हमारे काम में भी सबसे ज़्यादा मदद दोस्तों से मिली। हमारे 8-9 दोस्तों ने स्टार्टअप में इन्वेस्टमेंट किया।”

They developed 2 in 1 Solar Technology

प्रणीत बताते हैं कि रिसर्च के दौरान उन्होंने सौर ऊर्जा के हर एक पहलू को अच्छे से समझा था। उन्होंने सोलर पैनल, सोलर हीटर आदि की क्षमता, लागत, उनके फायदे और रोज़मर्रा के तौर पर आम नागरिकों की जो समस्याएँ हैं, उस हर बात को गहनता से समझने की कोशिश की।

उन्हें समझ में आया कि हमारे देश में सोलर एनर्जी का जितना उपयोग होना चाहिए, उतना हो नहीं रहा है। सभी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने प्रोडक्ट पर काम करना शुरू किया। इस प्रोजेक्ट के लिए उन्हें IIT मद्रास और CSIR से मदद मिली।

“IIT मद्रास के पास इस तरह का एक मॉडल था, जिससे प्रेरणा लेकर हमने अपने प्रोडक्ट पर काम किया। साल 2017 में हमने भारतीय नागरिकों की ज़रूरत के हिसाब से अपना प्रोटोटाइप तैयार किया। साल 2018 में इस प्रोडक्ट की टेस्टिंग हुई और सभी तरह की प्रक्रिया पूरी करने के बाद हमने 2019 की शुरुआत में अपने सोलर डुप्लेक्स को लॉन्च किया,” उन्होंने आगे कहा।

प्रणीत कहते हैं कि पहले दिन से ही उनका सिर्फ एक लक्ष्य था ‘वर्ल्ड-क्लास इनोवेशन’ यानी कुछ ऐसा बनाना जिसे हम बाहर के देशों में भारत से एक्सपोर्ट कर सकें।

क्या है सोलर डुप्लेक्स:

पारम्परिक तौर पर दो तरह के सोलर पैनल का इस्तेमाल किया जाता है- एक बिजली के लिए और एक पानी गर्म करने के लिए। कई इंडस्ट्री, होटल, कंपनी, हॉस्टल आदि में इन दोनों की ही ज़रूरत होती है। सोलर पैनल और सोलर हीटर को साथ में लगवाने पर काफी खर्च आता है। कई बार दोनों को लगाने के लिए छत पर उपयुक्त जगह भी नहीं मिल पाती है।

“हमने ऐसा सोलर पैनल तैयार किया है जो 2 इन 1 है, मतलब इससे बिजली भी बनती है और पानी भी गर्म होता है। इसके दोनों ही पैनल साथ काम करते हैं। साथ ही, इसकी डिजाइनिंग ऐसे की गयी है कि यह बहुत ही कम जगह लेता है,” प्रणीत ने बताया।

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बर्ड्स आई एनर्जी सोलर डुप्लेक्स की क्षमता एक दिन में 300 वाट बिजली बनाने और लगभग 100 लीटर पानी प्रति दिन गर्म करने की है!

प्रणीत आगे बताते हैं कि उनके डुप्लेक्स का लाइफटाइम 25 साल है और इसे बहुत कम रख- रखाव की ज़रूरत है। आपको 3 साल में एक बार इसकी सर्विसिंग करानी पड़ती है। एक सोलर डुप्लेक्स इंस्टॉल कराने की लागत 20 हज़ार रुपये है।

चुनौतियों से लड़कर बनाई पहचान:

उन्होंने शुरुआत से ही बजट काफी सीमित रखा ताकि इन्वेस्टमेंट का एक पैसा भी बर्बाद न हो। बहुत बार उन दोनों ने खुद तकनीशियन के साथ मिलकर काम किया क्योंकि उनके पास साधन कम थे। इसके अलावा, रिसर्च और डेवलपमेंट में उन्होंने काफी वक़्त दिया।

“हम नहीं चाहते थे कि हमारे प्रोडक्ट में कोई भी कमी हो। हमने काफी फील्ड रिसर्च किया जो बिल्कुल भी आसान नहीं था। इस सबके साथ सबसे ज्यादा मुश्किल था लोगों का भरोसा जीतना।”

प्रणीत और हर्षा ने कभी भी हार नहीं मानी बल्कि उनका लक्ष्य बहुत ही स्पष्ट था कि उन्हें ‘सोलर डुप्लेक्स’ को सिर्फ भारत के ही नहीं, बल्कि यूरोपियन देशों के स्टैण्डर्ड के हिसाब से बनाना है। उनका सपना है कि उनका यह प्रोडक्ट जो पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ है, बाहर के देशों में भी अपनी जगह बनाए।

बर्ड्स आई एनर्जी ने अपना पहला प्रोजेक्ट उत्तराखंड के बनवासा गाँव में एक अनाथ आश्रम के लिए किया। इस आश्रम में उन्होंने 5 किलोवाट बिजली और 1000 लीटर पानी गर्म करने वाला सिस्टम लगाया है। उत्तरी भारत में यह उनका एक ही प्रोजेक्ट है क्योंकि फिलहाल उनका फोकस दक्षिण भारत में अपना मार्केट बढ़ाने पर है।

“फिलहाल हम 5 राज्यों में 12 प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं और आने वाले समय में हमारी योजना देश के बाहर पायलट स्टडी करने की भी है।”

इसके साथ ही उन्होंने ‘नेट जीरो होम्स’ की शुरुआत भी की है। यह उनका रेसीडेंशियल प्रोजेक्ट है। इस बारे में वह बताते हैं, “हमारे यहाँ बिजली के लिए ग्रिड सिस्टम है और उससे बहुत प्रदुषण होता है। इसलिए हम ‘नेट जीरो होम्स’ प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं ताकि हम घरों में इस तरह से सोलर डुप्लेक्स लगाएं कि अगले 25 सालों के लिए उन्हें बाहर से बिजली लेनी ही न पड़े। इससे प्रदुषण बिल्कुल भी नहीं होगा।”

बर्ड्स आई एनर्जी स्टार्टअप को बहुत-सी जगह सराहा और सम्मानित किया गया है। उन्हें यूनाइटेड नेशन द्वारा ‘नयी तकनीक’ के क्षेत्र में सराहा गया है और सीईओ इनसाइट द्वारा 2019 की बेस्ट 10 ग्रीन एनर्जी कंपनियों में शामिल किया गया है।

अक्सर लोगों को लगता है कि सोलर पैनल लगवाना उन्हें महंगा पड़ेगा जबकि अगर आने वाले समय में बिजली की खपत और लागत का हिसाब किया जाए, ये बहुत सस्ता है। लोगों को अपनी इस सोच को बदलने की ज़रूरत है।

प्रणीत और हर्षा की पहल न सिर्फ समाज के लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी बहुत उम्दा है। उनकी इस पहल को सफल बनाने की ज़िम्मेदारी हम नागरिकों पर भी है, इसलिए हमें भी ग्रीन एनर्जी का विकल्प चुनने की कोशिश करनी चाहिए। उनका सोलर डुप्लेक्स, गाँव-शहर, हर जगह कामयाब हो रहा है। हमें भी बस एक छोटा-सा कदम उठाना है जिससे हम अपने घर, दफ्तर आदि में सोलर पैनल लगवाने में सफल हो सकें।

यदि आपको इस कहानी ने प्रभावित किया और आप भी अपने यहाँ सोलर ‘डुप्लेक्स’ लगवाना चाहते हैं तो 9100625112 पर सम्पर्क करके सभी जानकारी ले सकते हैं!

संपादन – अर्चना गुप्ता

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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