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यूपीएससी: आईएएस नम्रता जैन ने शेयर किये नोट्स बनाने के टिप्स!

यूपीएससी परीक्षा के अपने पहले प्रयास में उनकी रैंक 99 थी और उन्हें आईपीएस की पोस्ट मिली। लेकिन उन्होंने 2018 में फिर से एक बार परीक्षा दी और इस बार उनकी ऑल इंडिया रैंक 12 थी!

म्रता जैन को सिविल सर्विस ज्वाइन करने के लिए एक आईएएस अफसर ने प्रेरित किया। “इस आईएएस अफसर ने अपने भाषण में बताया कि कैसे एक प्रशासनिक अधिकारी बदलाव ला सकता है और यह बात मेरे ज़ेहन में बैठ गयी। भले ही यह बहुत पहले की बात है, जब मैं स्कूल में थी, लेकिन मेरे मन में सिविल सर्विस करने के बीज तभी से पड़ गए थे,” 25 वर्षीया नम्रता जैन ने हँसते हुए कहा।

नम्रता साल 2018 के बैच की आईएएस अफसर हैं। बचपन से ही नम्रता ने ठान लिया था कि उन्हें सिविल सर्विसेस में ही जाना है। यूपीएससी परीक्षा के अपने पहले प्रयास में उनकी 99 रैंक आई थी और उन्हें आईपीएस की पोस्ट मिली। लेकिन उन्होंने 2018 में फिर से एक बार परीक्षा दी और इस बार उनकी ऑल इंडिया रैंक 12 थी। भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में शामिल होने का उनका सपना आख़िरकार पूरा हुआ।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए नम्रता ने इस परीक्षा की तैयारी के लिए अपनी स्ट्रेटेजी शेयर की।

Namrata Jain, who got 99 rank in UPSC and secured IPS position in her 2nd attempt

नम्रता ने अपनी शुरूआती पढ़ाई छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से की, जो अपनी नक्सली गतिविधिओं के लिए बदनाम है।

उन्होंने बताया, “मैंने अपनी दसवीं तक की पढ़ाई दंतेवाड़ा से की। वहां सीखने का ज़्यादा कोई माहौल नहीं था। क्योंकि यहां लगातार कुछ न कुछ होते रहता, जिस वजह से स्कूल बंद हो जाते। मैं भले ही कितनी भी प्रोत्साहित थी, लेकिन इस इलाके की परिस्थितियों में यह होना बहुत मुश्किल था।”

लेकिन, जैसे-तैसे नम्रता मेहनत करती रहीं और उन्होंने अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकॉम इंजीनियरिंग, भिलाई इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से पास की। उन्हें एक पब्लिक सेक्टर कंपनी में जॉब भी मिली, लेकिन उन्होंने तो पहले ही यूपीएससी की तैयारी करने का मन बना लिया था।

जब उन्होंने पहली बार, यूपीएससी की परीक्षा दी तो वे प्रिलिम्स भी पास नहीं कर पायीं थीं, लेकिन अपने दूसरे अटेम्पट में उन्होंने 99वीं रैंक हासिल की।

उन्होंने साल 2018 में एक बार फिर से परीक्षा दी और इस बार उन्होंने 12वीं रैंक हासिल करके न सिर्फ अपने माता-पिता, बल्कि पुरे दंतेवाड़ा का नाम रौशन किया।

उन्होंने अपने तीसरे अटेम्पट के लिए क्या अलग तैयारी की या स्ट्रेटेजी बनायी, इस बारे में पूछने पर उन्होंने बताया, “जितने भी प्रतिभागी, जो एक बार फिर से पेपर अटेम्पट कर रहे हैं, मुझे नहीं लगता कि उन्हें अपनी तैयारी या स्ट्रेटेजी में कोई बदलाव करने की ज़रूरत है। अगर आपकी एक बार रैंक आ गयी है तो आपको अपने अगले अटेम्पट में बस वैल्यू एडीशन करना है।”

उन्होंने आगे कहा कि जब उनकी 99वीं रैंक आयी थी, तो उस बार अगर सिर्फ मेंस पेपर की बात हो तो उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया था। इसलिए उन्हें पता था कि मेंस के लिए उनकी तैयारी अच्छी है और उन्हें अपने इंटरव्यू पर काम करना है, जिसमें उनके मार्क्स कम थे।

नम्रता ने समझा कि किन विषयों पर, टॉपिक्स पर वे अच्छी हैं और कहाँ उन्हें और मेहनत करने की ज़रूरत है और उसके बाद उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

Namrata Jain celebrating in her hometown

 

मेंस की तैयारी 

“एक चीज़ जिसने मेरी मदद की, वह थी कि मैं सभी प्रश्नों के जवाबों की प्रैक्टिस लिखकर कर रही थी। जितना ज्यादा मैं लिखती, उतना ही मेरा आत्म-विश्वास बढ़ रहा था और फिर विषयों पर जानकारी भी बहुत अच्छी हो रही थी,” उन्होंने बताया।

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मेंस में उनके अच्छे प्रदर्शन की एक वजह थी करंट अफेयर्स की अच्छी तैयारी।

“पेपर में हर एक स्टेज पर करंट अफेयर्स बहुत महत्वपूर्ण हैं- प्रीलिम्स से लेकर मेंस तक, और फिर इंटरव्यू में भी। मैंने इस पर बहुत काम किया।”

 

करंट अफेयर्स के बनाये नोट्स 

नम्रता ने अपनी नोट्स बनाने की स्ट्रेटेजी और उन विषयों के बारे में बताया, जिन पर उन्होंने नोट्स बनाये।

“मुझे बहुत ज्यादा गहनता से पढ़ने की आदत हो गयी और साथ ही, लिखने की भी। जो भी न्यूज़ आर्टिकल या स्टोरी मैं पढ़ती, उसे थोड़ा वक़्त लेकर समझकर, प्रश्न-उत्तर के फॉर्मेट में लिखती।”

इसके अलावा, वे जिस भी विषय पर कोई आर्टिकल पढ़तीं, उस पर बाद में इन्टरनेट से भी और जानकारी इकट्ठा करतीं। “उदहारण के लिए, अगर मैंने एक नज़रिए से कोई आर्टिकल पढ़ा है तो उसी खबर पर किसी और पब्लिकेशन का आर्टिकल, दूसरे पॉइंट ऑफ़ व्यू से पढ़ती ताकि एक बैलेंस्ड जानकारी मिले उस टॉपिक पर। इस सब जानकारी को इकट्ठा करके फिर मैं अपने नोट्स बनाती,” उन्होंने कहा।

अपने सेकंड अटेम्पट के बाद उन्होंने हर दिन नोट्स बनाना बंद कर दिया और वे 4-5 दिन में एक बार नोट्स बनातीं।

“दूसरे अटेम्पट के लिए मैंने आर्टिकल्स इकट्ठा करना शुरू किया और फिर बैठकर इन्हें साथ में कम्पाइल करती। मैं सभी प्रतिभागियों को नोट्स बनाने की सलाह दूंगी क्योंकि इससे मेंस का पेपर लिखने में काफी मदद मिलती है।”

 

“नोट्स ऐसे बनायें जो आपको समझ में आए”

नम्रता इस बात पर भी जोर डालती हैं कि नोट्स ऐसे होने चाहिए, जोकि आपको समझ में आए बाद में। बहुत ही स्पष्टता से पॉइंट्स में लिखिए और अगर बाद में आपने कुछ जोड़ा है तो वो भी स्पष्ट रूप से समझ में आए। इधर-उधर, बिखरे-बिखरे लिखे गये नोट्स से बाद में कंफ्यूजन होती है।

“नोट्स ऐसे बनाने चाहिए कि आप एक बार देखें और आपको समझ में आ जाए। मेरे नोट्स में आमतौर पर बुलेट पॉइंट्स, फ्लो-चार्ट्स और डायग्राम्स आदि होते थे।”

नोट्स बनाते समय आपको बहुत इनोवेटिव होना चाहिए।

“नोट्स बनाने का मतलब सिर्फ इतना नहीं कि आप पहले से उपलब्ध चीजों को ही लिखें। बल्कि इसमें आपको अपने विचार, अपने नज़रिए को भी साथ में लिखना चाहिए,” उन्होंने आगे कहा।

 

NCERT किताबें- ज़रूरी हैं?

नम्रता कहती हैं कि अपने तैयारी के दौरान अपने बेसिक्स क्लियर करने के लिए उन्होंने NCERT की किताबों पर काफी भरोसा किया। “मेरे हर एक विषय के लिए मैंने NCERT की किताबों से ही शुरू किया। भूगोल मैंने स्कूल के बाद कभी नहीं पढ़ा था, तो मैंने इसके लिए छठी कक्षा की टेक्स्ट बुक से शुरू किया, जिससे मुझे बहुत से टॉपिक्स को समझने में आसनी हुई,” नम्रता ने कहा।

बाकी सभी विषयों के लिए उन्होंने 9वीं और 10वीं कक्षा की NCERT किताबों से शुरुआत की, जिससे उनका बेस काफी बेहतर हुआ।

“मैंने NCERT की किताबों से कोई नोट्स नहीं बनाए, बस उसी में किनारों पर पॉइंट्स लिख लिए और इससे बाद में रिवाइज़ करने में आसानी हुई।”

इसके अलावा उन्होंने सोशियोलॉजी को अपना ऑप्शनल पेपर चुना और यह ह्यूमैनिटीज़ का विषय है जबकि उनका अपना बैकग्राउंड इंजीनियरिंग का रहा। ऐसे में 11वीं-12वीं की किताबों ने उनकी इस विषय को समझने में काफी मदद की।

आगे उन्होंने कहा कि अपना ऑप्शनल विषय चुनते समय भी वक़्त लेना चाहिए।

“सभी विकल्पों पर ध्यान दो और फिर वही चुनों, जोकि आपको लगता है आप अच्छे से कर पाएंगे।”

किसी भी कॉम्पिटीटिव एग्जाम की तैयारी करना बहुत व्यक्तिगत चीज़ है। यह आपकी इच्छा, आपके सपने और आपके प्रयासों के बारे में है। अपने बेसिक्स क्लियर करना हमेशा एक अच्छी शुरुआत है। भले ही इसके लिए आपको छठी कक्षा की भूगोल की किताब ही क्यों न पढ़नी पड़े। हर एक किताब में कुछ न कुछ ज़रूरी जानकारी होती है और इसलिए आईएएस की परीक्षा के लिए गहराई से पढ़ना बेहद ज़रूरी है!

मूल लेख: विद्या राजा

संपादन – मानबी कटोच 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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