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5000 किमी का सफ़र तय किया बाइक से, रास्ते में नज़र आ रहे कूड़े-कचरे को भी लगातीं हैं ठिकाने!

दिल्ली की सोनिया जैन 100 से भी ज़्यादा विंटेज और मॉर्डन बाइक्स चलाकर लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुकी हैं!

‘बाइक लड़कियों के लिए नहीं होती!’ यह वाक्य आपने कई बार और बहुत से लोगों के मुंह से सुना होगा। बाइक्स और लड़कियों का कोई मेल नहीं, ऐसा आज भी हमारे भारतीय समाज की मान्यता है। लेकिन इस मान्यता को तोड़ कर समाज के सामने एक मिसाल कायम की है सोनिया जैन ने। जो एक, दो या दस नहीं, बल्कि सौ से भी ज़्यादा बाइक्स चला कर देश के रास्तों पर अपनी कामयाबी की छाप छोड़ चुकी हैं। आइये जानते हैं सोनिया कैसे देश की लड़कियों को अपने सीमित दायरों को लांघने की प्रेरणा दे रही हैं।

 

ज़रुरत से शुरू हुआ बाइक्स की दुनिया का यह सफ़र!

सोनिया जैन, जो 100 से भी ज़्यादा विंटेज और मॉर्डन बाइक्स चलाकर लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुकी हैं, कहती हैं कि बाइक्स से उनका लगाव उनकी ज़रूरतों से शुरू हुआ था। दिल्ली में जन्मी और पाली बढ़ी सोनिया को किसी भी सामान्य लड़की की ही तरह देर रात बाहर जाने के लिए घरवालों का सहारा लेना पड़ता था। उन्हें एक ऐसे साधन की ज़रुरत थी, जो जल्द से जल्द उन्हें किसी भी स्थान पर पहुंचा सके।

हालांकि, यह सवाल अक्सर सामने आया कि लड़कियों के लिए स्कूटर अच्छा विकल्प हो सकता था, तो उसकी जगह बाइक को सोनिया ने क्यों चुना?

इसका जवाब देते हुए सोनिया कहती हैं “मुझे हमेशा लम्बी दूरी तय करनी होती थी, जिसके लिए स्कूटर मेरे लिए मुश्किल विकल्प था, ज़ाहिर है बाइक के लिए मुझे घर के बड़ों की सहायता लेनी पड़ती थी। यही वजह है कि मैंने परिवारजनों के सामने बाइक सीखने की इच्छा ज़ाहिर की।”

शुरू में सोनिया को कठिनाइयों का सामना ज़रूर करना पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद को परिवार के सामने साबित करके दिखाया। धीरे-धीरे बाइक से उनकी यह ज़रुरत, लगाव में बदलती चली गई और फिर बाइक्स के साथ उनका नाता गहरा होता गया।

 

तीन देशों का सफर, वो भी बाइक से!

एक मध्यमवर्गीय परिवार का हिस्सा रहीं सोनिया को जहां एक ओर रात को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी, वहीं बाइक्स के प्रति उनके प्यार ने उन्हें अकेले तीन देशों का सफर तय करने की हिम्मत दी।

सोनिया ने सरकार द्वारा बनाए गए ट्राइलेट्रल हाइवे के ज़रिये तीन देशों का सफर तय किया है। अपनी बाइक के साथ उन्होंने दिल्ली से म्यांमार होते हुए थाईलैंड तक का सफर तय किया। लगभग 5600 किमी का यह सफर उन्होंने महज़ 22 दिनों में तय किया। इन तीनों देशों की अलग-अलग संस्कृतियों को उन्होंने नज़दीक से देखा और इन खूबसूरत देशों की खूबसूरत यादें खुद में समेट लीं। जहां आज सामान्य महिलाएं अकेले ड्राइव पर निकलने से कतराती हैं, वहीं सोनिया ने उनके सामने एक मिसाल कायम की है।

 

अलग-अलग देशों से मिले अनोखे अनुभव!

बाइक्स से प्यार और देश से भी

म्यांमार, बैंकॉक और थाईलैंड की यादें ताज़ा करते हुए सोनिया कहती हैं, “मुझे हिमाचल से हमेशा से ही बेहद लगाव रहा है, लेकिन म्यांमार एक ऐसी जगह है, जहां की खूबसूरती का एहसास मुझे वहां कदम रखने के बाद हुआ।”

सोनिया के मुताबिक म्यांमार एक छोटा-सा देश होने के बावजूद यहां महिलाएं पुरुषों से कहीं ज्यादा आगे हैं। यहां के लोग बेहद सहृदय हैं।

“एक छोटी सी चाय की दुकान का मालिक अपनी रोजगारी, मेहमान नवाजी के लिए छोड़ने को तैयार था, क्योंकि वह एक भारतीय मेहमान से चाय के पैसे नहीं लेना चाहता था,” वह आगे बताती हैं।

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वहीं सिर्फ एक हॉलिडे डेस्टिनेशन की तरह प्रोजेक्ट किये जाने वाले थाईलैंड और बैंकॉक,जैसी जगहों पर सोनिया ने कुछ ऐसा देखा जो हमारी कल्पना के बाहर है।

यहाँ हुए अनुभव के बारे में बात करते हुए सोनिया बताती हैं, “मैं न सिर्फ यहां की खूबसूरती से, बल्कि लोगों के आध्यात्मिक जुड़ाव से भी प्रेरित हुई। मुझे सबसे ज़्यादा चौंकाया थाईलैंड के व्हाइट टेंपल ने, जहां मंदिर के अंदर मार्वल्स के सुपर हीरोज़ की तस्वीरें लगाई गई थीं। जिसका अर्थ था हमें अनदेखे भगवान में नहीं, बल्कि अपने अंदर के सुपर पावर में विश्वास करना चाहिए।”

 

जब आती है बाइक्स की बात

देश के साथ-साथ दुनिया का भी सफर तय करने की चाहत

जब बात आती है बाइक्स की, तो सोनिया का नाम 2300 सीसी की भारी-भरकम ट्रायम्फ रॉकेट से लेकर 1956 की लेफ्ट हैंड क्लचवाली बीमडब्ल्यू चलाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने 50 सीसी की छोटी सी सनी के अलावा सुपर फ़ास्ट रेसिंग बाइक, 400 किलो की रोड मास्टर और विंटेज सनी भी चलाई है। इन्हें चलाना अपने आप में एक उपलब्धि मानी जाती है। सोनिया के अनुसार इनके साथ उनका अनुभव बेहद ख़ास रहा है, जिसे चलाने के बाद कोई भी खुद पर नाज़ कर सकता है।

 

स्वच्छता से जोड़ दिया अपने इस सफ़र को!

जब बात आती है ट्रेवलिंग की, तो भारत में खूबसूरत जगहें हैं।  लेकिन जब भारी मात्रा में टूरिस्ट यहाँ पहुँचते हैं तो  इन जगहों को प्लास्टिक की खान बनते देर नहीं लगती।

सोनिया ने खीरगंगा जैसी खूबसूरत जगह की यात्रा का वृतांत सुनाते हुए कहा, “खीरगंगा लोगों के बीच कितना प्रचलित है, लेकिन मेरा दिल यह देख कर टूट गया कि लोगों ने वहां प्लास्टिक की खान बना रखी है। खीरगंगा की यात्रा के दौरान मैंने अपने साथ एक बड़ा सा बोरा रखा था। मैं जहां भी जाती, वहां से प्लास्टिक की बोतलें इकठ्ठा कर ले आती। मुझे देख कर वहां आए लोगों ने भी ऐसा करना शुरू कर दिया था। इसलिए मुझे लगता है कि आपको किसी भी काम को शुरू करने की ज़रुरत है और लोग उसी काम को अपनाने लगेंगे। सूत्रपात करिये, लोग साथ ज़रूर देंगे।”

आज भी सोनिया खीरगंगा की ही तरह देश की तमाम खूबसूरत जगहों को बेहतर बनाने के प्रयास में जुटी हैं। कमाल की बात यह है कि उन्हें देख कर लोग उनके साथ जुड़ते चले जाते हैं। आज के दौर में सोनिया न सिर्फ लोगों को प्लास्टिक प्रदुषण को कम करने की प्रेरणा दे रही हैं, बल्कि वे लड़कियों को आगे आकर अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलने की हिदायत भी दे रही हैं।

 

यदि मैं 100 बाइक्स चला सकती हूँ, तो आप 10 तो चला ही सकती हैं!

लीक से हट कर करें कुछ काम

अंत में सोनिया लड़कियों से सिर्फ इतना कहना चाहती हैं, “बाइक के इस्तेमाल में जेंडर का कोई रोल नहीं है। यदि मैं 100 बाइक्स चला सकती हूँ, तो आप कम से कम 10 तो चला ही सकती हैं। हमारे समाज में जहां हर काम को करने से पहले खुद को साबित करना पड़ता है, वहीं यदि हम अपने मन का काम करें, तो उसे पूरा करने में आपको ज़्यादा कठिनाई नहीं होगी। अपने पसंदीदा काम को करने के लिए यदि आपको 12 घंटे लगातार समय देना पड़े, तो आप कुंठित नहीं होंगी। इसलिए खुद को साबित कीजिये और सामाजिक दायरों में मत बंधिए।”

क्या आप भी बाइक्स को देख कर ये सोचती हैं कि ‘काश! आप इसे चला पाती?’ तो देर मत कीजिये, हो सकता है आपके भविष्य के सफर में ये आपकी साथी बन जाए!

यदि आप सोनिया से जुड़ना चाहते हैं तो उन्हें उनके फेसबुक पेज के ज़रिये संपर्क कर सकते हैं!

संपादन – मानबी कटोच 

Summary – Sonia Jain is a competitive motorcyclist and long distance bike rider. In August 2018, Jain embarked on a 5000 km Tri-National ride from Delhi to Bangkok, Thailand via Myanmar.


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Written by तोषिनी राठौड़

लेखन से गहरा जुड़ाव रखने वाली तोषिनी राठौड़ लंबे समय से मीडिया में कार्यरत है। संगीत से लगाव और अपने प्राणी-प्रेम के लिए लोगों के बीच पहचान रखती तोषिनी एक गायिका तो हैं ही , इसके साथ ही वह कई एनीमल एनजीओ के साथ काम भी करती हैं। बचपन से किताबी कीड़ा रह चुकी तोषिनी के लिए उनका लेखन एक मेडिटेशन की तरह काम करता है।

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