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कभी बाढ़-प्रभावित रहे इस गाँव में आज लगे हैं 1 लाख से भी ज़्यादा पेड़!

गाँव में 10 किमी लम्बी नहर का निर्माण भी हुआ है, जिससे गाँव की 3, 000 एकड़ ज़मीन की सिंचाई अच्छे से हो रही है!

हते हैं कि जब तक आप खुद, खुद की मदद नहीं करते तब तक कोई और भी आपकी मदद नहीं कर पाएगा। बिहार के समस्तीपुर जिले का एक गाँव, हरपूर बोचहा इस बात का एक सटीक उदाहरण है। सालों से बाढ़ और सूखे की मार झेलने वाला यह गाँव, जब तक सरकार और प्रशासन के भरोसे रहा, तब तक गाँव का कोई विकास नहीं हुआ।

गाँव का मुख्य व्यवसाय है कृषि और जैसे-जैसे सूखे की समस्या हर साल बढ़ती रही, वैसे-वैसे गाँव के किसानों के लिए एक फसल भी सही से ले पाना मुश्किल हो गया। ज़मीन बंज़र होती जा रही थी और गरीबी-भुखमरी बढ़ती जा रही थी। लेकिन फिर गाँव के लोगों ने खुद अपनी किस्मत बदलने की ठानी और आज आलम यह है कि पूरे भारत में इस गाँव की तारीफ हो रही है।

गाँव के मुखिया, प्रेम शंकर सिंह ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए बताया,

“लगातार आने वाली बाढ़ और सूखे के चलते गाँव में हरियाली मानों खत्म ही हो गई थी। जब मैं साल 2001 में सरपंच बना, तब भी गाँव की हालत बहुत ही बेकार थी। उस वक़्त मैंने ठान लिया कि कुछ तो करना पड़ेगा, जिससे कि कुछ बदलाव हो। इसलिए सबसे पहले हमनें पेड़ लगाने पर काम किया। जो सिलसिला उस वक़्त शुरू किया था, उसका परिणाम अब मिला है।”

प्रेम शंकर के नेतृत्व में गाँव के लोगों ने जगह-जगह पेड़ लगाना शुरू किया और साथ ही, उनकी देखभाल भी की। यह उसी पहल का नतीजा है कि आज गाँव में 1 लाख से भी ऊपर पेड़- पौधे हैं। इतना ही नहीं, यह पहल गाँव के लोगों के लिए रोज़गार की तरह भी उभरी।

गाँव में नहर के दोनों किनारों पर लगे पेड़

“मनरेगा योजना के तहत गाँव के ही सैंकड़ों लोगों को पौधारोपण का कार्यभार सौंपा गया। इससे गाँव में हरियाली बढ़ी और साथ ही, उनकी आमदनी भी। यहाँ हर एक व्यक्ति पर पौधों की देखभाल की ज़िम्मेदारी है। इससे गाँव में अब भरपूर हरियाली है और साथ ही, यहाँ पानी की समस्या भी खत्म हो गई है,” प्रेम शंकर ने बताया।

पौधारोपण के साथ-साथ ग्राम पंचायत ने गाँव में कुएं, तालाब और नहर खोदने का काम भी किया। उन्होंने गाँव में 10 किमी लम्बी नहर का निर्माण करवाया है और इसकी वाटर सप्लाई, वाया नदी से होती है। पानी के इन सभी स्त्रोतों को बनाते हुए ध्यान रखा गया है कि पानी की निकासी सही तरह से हो। इस नहर से आज गाँव की 3, 000 एकड़ ज़मीन की सिंचाई अच्छे से हो रही है।

इस नहर के निर्माण के लिए गाँव के लगभग 300 किसानों ने भी अपनी ज़मीन में से कुछ-कुछ ज़मीन ग्राम पंचायत को दी। लोगों को ऐसा करने को मनाने के लिए प्रेम शंकर ने घर-घर जाकर लोगों को समझाया कि अगर आज वे थोड़ी-सी ज़मीन इस नहर के लिए छोड़ते हैं तो आगे उन्हें गाँव नहीं छोड़ना पड़ेगा।

नहर निर्माण कार्य में ग्रामीणों को ही मिला था रोज़गार

गाँव के निवासी, राम बाबु चौरसिया ने बताया कि अब गाँव में पानी की कोई कमी नहीं है। किसानों को सिंचाई के लिए समय पर भरपूर पानी मिल रहा है। इसके चलते, किसानों की उपज में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है और उनकी आमदनी में भी लगभग दोगुना इजाफा हुआ है।

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साथ ही, नहर के पास एक मनरेगा पार्क भी तैयार किया गया है। यहाँ आपको सैकड़ों फलदार, छायादार और घने पेड़ दिखाई देंगे। इस पार्क को ग्राम पंचायत ने स्थानीय लोगों के लिए टूरिस्ट प्लेस की तरह इजाद किया है। यहाँ हरपूर बोचहा और आस-पास के गांवों के लोग छुट्टी वाले दिन पिकनिक आदि मनाने आते हैं।

हरपूर बोचहा गाँव की इन पहलों के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम ग्राम पंचायत’ अवॉर्ड से नवाज़ा गया है। इलाके के कई प्रशासनिक अधिकारियों ने बोचहा गाँव के विकास-कर्यों का कई बार जायजा भी लिया है। सभी ने ग्राम पंचायत और गाँव के लोगों के साहस और हौसले की तारीफ की।

अवॉर्ड लेते हुए सरपंच प्रेम शंकर (बीच में)

इसके अलावा, गाँव में बिजली का काम पूरा हो गया है और स्वच्छ पेय जल योजना पर काम अभी चल रहा है। साथ ही, ग्राम पंचायत गाँव का स्तर ऊँचा उठाने के लिए तरह-तरह के कदम उठा रही है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत गाँव के सरकारी स्कूल में चल रहे मिड डे मील के तहत मिल रहे खाने को ग्राम पंचायत के सदस्य समय-समय पर जाकर चेक करते हैं।

अंत में प्रेम शंकर सिर्फ़ इतना ही कहते हैं कि अब उनका फोकस ‘प्लास्टिक-फ्री गाँव’ पर होगा। सरकार के स्वच्छता अभियान में उन्हें अपने गाँव को मिसाल बनाना है। इसलिए उनकी योजना है कि अब हर घर में शौचालय होगा और साथ ही, गाँव के लोगों को डस्टबिन और कचरा-प्रबंधन का महत्व सिखाने की पहल भी होगी।

द बेटर इंडिया, हरपूर बोचहा गाँव की सामुदायिक सहभागिता की तारीफ करता है और उम्मीद है कि यह गाँव पूरे देश और देशवासियों के लिए एक प्रेरणा बनेगा।

संपादन: भगवती लाल तेली


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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