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मुंबई: सफाई कर्मचारियों को रेनकोट, गमबूट्स और सुरक्षा उपकरण बांट रहीं हैं 15 वर्षीय संजना!

इससे पहले उन्होंने अपने स्कूल के एक प्रोजेक्ट के तहत पैरों से दिव्यांग लोगों के प्रोस्थेटिक लिंब (कृत्रिम पैर) ऑपरेशन के लिए भी कैंपेन चलाया था।

हाराष्ट्र के मुम्बई की रहने वाली 15 वर्षीय संजना रुनवाल, बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में दसवीं कक्षा की छात्रा हैं। अक्सर इस उम्र में बच्चे अपनी पढ़ाई और मस्ती में खोये रहते हैं। ज़्यादातर उनकी दुनिया स्कूल और घर में ही सिमटी होती है। पर संजना इस छोटी-सी उम्र से ही दुनिया में बदलाव के लिए काम कर रही हैं। वे अपने साथ-साथ अपने आस-पास के ज़रूरतमंद लोग जैसे कि कूड़ा बीनने वाले और सफाई कर्मचारियों के जीवन को भी संवार रही हैं।

मुंबई के एक एनजीओ ‘क्लीन-अप फाउंडेशन’ के साथ मिलकर संजना शहर में कूड़ा-कचरा बीनने वालों के हित में अभियान चला रहीं हैं। इस एनजीओ को उनके अपने भाई, सिद्धार्थ रुनवाल ने शुरू किया है। और इस संस्था के मुख्य उद्देश्यों में से एक हमारे समाज में हमेशा अनदेखा किये जाने वाले वर्ग- सफाई कर्मचारी और कूड़ा बीनने वालों- के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।

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हर दिन ये लोग हमारी सड़कों, सार्वजानिक स्थानों, शौचालयों आदि की सफाई करते हैं, हर तरह के कूड़े-कचरे- प्लास्टिक बोतल, पॉलिथीन, पेपर, बचा-कुचा खाना, सब्ज़ी-फलों के छिलके आदि को उठाते हैं और फिर उन्हें अलग-अलग करके कचरा प्रबंधन के लिए देते हैं।

हमारा शहर इन लोगों की वजह से ही साफ़-सुथरा और स्वच्छ रहता है। जबकि ये लोग एक अच्छी और स्वस्थ ज़िंदगी जीने के लिए हर दिन संघर्ष करते हैं। और इसीलिए संजना चाहती हैं कि उनके छोटे-छोटे मगर ठोस कदम इन लोगों को एक बेहतर जीवन जीने में सहायक हों।

इसकी शुरुआत उन्होंने मुफ़्त में ‘सुरक्षा उपकरण’ बांटने से की। संजना और उनकी फाउंडेशन ने एक फंडरेज़र के ज़रिए पैसे इकट्ठा करके इन लोगों के लिए रेनकोट और गमबूट्स खरीदकर बांटे और वह भी बिल्कुल मुफ्त में। इसके अलावा वे इन कचरा बीनने वालों को साफ़ और स्वच्छ खाना व पीने का पानी भी मुहैया करवा रही हैं। उन्होंने बताया कि इस फाउंडेशन ने बृहन्मुम्बई नगर निगम के कई वार्ड ऑफिस में वाटर प्योरीफायर लगवाएं हैं और इससे लगभग 12, 000 कर्मचारियों को साफ़ पानी मिल रहा है।

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इसके साथ ही संजना ने ‘केयर फ़ॉर क्लीनर्स’ नाम से भी एक अभियान चलाया और इससे उन्हें जो भी फंड्स मिले, उन्हें वह इन लोगों की बेहतरी के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। संजना कहती हैं कि उनके अभियानों में उन्हें बीएमसी वार्ड ऑफिसर, चंद्रकांत ताम्बे का काफ़ी सहयोग मिला। उनकी मदद के चलते ही उनके अभियान सफल हो पाए।

वैसे यह कोई पहला सामाजिक कार्य नहीं है जो संजना कर रही हैं। इससे पहले उन्होंने अपने स्कूल के एक प्रोजेक्ट के तहत पैरों से दिव्यांग लोगों के प्रोस्थेटिक लिंब (कृत्रिम पैर) ऑपरेशन के लिए भी कैंपेन चलाया था। तब वे नौवीं कक्षा में थीं। आगे चलकर वकालत की पढ़ाई करने की चाह रखने वाली संजना ने अपने इस अभियान से लगभग 84, 000 रुपये इकट्ठा किये थे और इस फंड से लगभग 8-9 लोग फिर से अपने पैरों पर खड़े हो पाए।

संजना अपनी पढ़ाई के साथ-साथ यह सब मैनेज करती हैं। वह अपने दिन के दो घंटे सामाजिक कार्यों के लिए देती हैं और बाकी समय पढ़ाई, खेल आदि पर फोकस करती हैं। और उनका कोई इरादा नहीं है कि वे अपने इस काम को छोड़ेंगी। बल्कि उनकी कोशिश है कि वे पूरे देश में कचरा बीनने वालों की मदद कर पाएं।

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फ़िलहाल, संजना की कोशिश है कि वे समाज के इस उपेक्षित तबके के लिए ‘मेडिकल इंश्योरेंस’ जैसी पॉलिसी प्रदान कराएँ और इसके लिए वे पैसे इकट्ठा कर रहीं हैं। हर दिन गन्दगी के संपर्क में आने की वजह से ये लोग गंभीर बिमारियों का शिकार हो जाते हैं। और इनके पास इतने पैसे नहीं कि वे बड़े अस्पतालों में इलाज करवा सकें।

संजना के परिवार को उन पर गर्व है, ख़ासकर उनके भाई सिद्धार्थ को क्योंकि वह इतनी कम उम्र में इतना कुछ करने की हिम्मत रखती हैं।

संजना के हौसले और जज़्बे को द बेटर इंडिया का सलाम। उम्मीद है कि बच्चों से लेकर बुजूर्ग तक इस बच्ची से प्रेरणा लेकर अपने देश के हित के लिए छोटे-छोटे कदम उठायेंगें!

संजना रुनवाल से संपर्क करने के लिए ‘क्लीन-अप फाउंडेशन‘ के फेसबुक पेज पर जाएँ!


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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