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उत्तराखंड के इस सरकारी स्कूल को इस शिक्षक ने बनाया ‘पहाड़ का ऑक्सफोर्ड’!

अब तक 40 हजार से अधिक पेड़ लगा चुके रुद्रप्रयाग जनपद के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कोट तल्ला के शिक्षक सतेंद्र सिंह भंडारी ने पर्यावरण संरक्षण का जो अभियान शुरू किया, वह आज भी जारी है।

ज हम आपको एक ऐसे शिक्षक से रू-ब-रू करवाते हैं, जिनके प्रयासों और नि:स्वार्थ सेवा-भाव से आज उनका विद्यालय अग्रणी पंक्ति में खड़ा है। अब तक 40 हजार से अधिक पेड़ लगा चुके रुद्रप्रयाग जनपद के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कोट तल्ला के शिक्षक सतेंद्र सिंह भंडारी ने पर्यावरण संरक्षण का जो अभियान शुरू किया, वह आज भी जारी है।

प्राइवेट स्कूलों से मीलों आगे है यह विद्यालय, प्रोजेक्टर के ज़रिए होती है पढ़ाई!

शिक्षक सतेंद्र सिंह भंडारी छात्रों को पढ़ाते हुए

 

आजकल जहाँ एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर के कारण लोगों का भरोसा उन पर से खत्म होता जा रहा है, वहीं हमारे बीच ऐसे भी शिक्षक हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की बेहतरीन व्यवस्था बनाई है। सतेंद्र सिंह भंडारी ऐसे ही एक शिक्षक हैं। अपने प्रयासों से उन्होंने विद्यालय की तस्वीर बदल कर रख दी है। सतेंद्र सिंह भंडारी आज शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल बन चुके हैं। इनके प्रयासों से लोगों का एक बार फिर सरकारी व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है।

यह इनकी कोशिशों का ही परिणाम है कि आज रुद्रप्रयाग जनपद के कोट तल्ला का प्राथमिक विद्यालय हर मामले में देहरादून तक के प्राइवेट स्कूलों से मीलों आगे है।

कोट तल्ला का प्राथमिक विद्यालय

यहाँ प्रोजेक्टर के ज़रिए शिक्षा दी जाती है। यह जिले का पहला प्राथमिक विद्यालय है, जिसमें कम्प्यूटर की शिक्षा दी जा रही है। जबकि पर्यावरण से जुड़े विषयों के बारे में भंडारी बच्चों को डॉक्युमेंट्री फ़िल्मों और फोटो एल्बम के ज़रिए भी जानकारी देते हैं। पहले जहाँ विद्यालय में छात्रों की संख्या नहीं के बराबर थी, वहीं अब यहाँ छात्रों की संख्या 40 के पार हो गई है। इस स्कूल की ख़ासियत को देखते हुए इसे पहाड़ का ऑक्सफोर्ड स्कूल भी कहा जाने लगा है।

 

अक्षर ज्ञान के साथ मिलती है पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा!

 

रानीगढ़ पट्टी के कोटतल्ला का प्राथमिक विद्यालय सतेंद्र भंडारी के समर्पण भाव की बदौलत ही आज रुद्रप्रयाग जनपद ही नहीं, पूरे प्रदेश का आदर्श विद्यालय बन चुका है। यहाँ पर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दीक्षा भी दी जाती है। यहाँ बेहतर शैक्षणिक माहौल के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों और खेलकूद पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।

 

अब तक लगा चुके हैं 40 हजार से अधिक पेड़, गाँव की बंजर भूमि में तैयार कर रहे हैं जंगल!

शिक्षा के साथ-साथ भंडारी ने वर्षों से पर्यावरण संरक्षण का भी बीड़ा उठाया हुआ है। पर्यावरण गोष्ठियों और जंगल बचाओ पेड़ लगाओ अभियानों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। वे अब तक लगभग 40 हजार से अधिक पेड़ लगा चुके हैं। विद्यालय परिसर में पेड़ लगाने के अलावा गाँव की बंजर भूमि में वे जंगल तैयार कर रहे हैं। गाँव के पास अलकनंदा नदी के पास त्रिफला वन व फलपट्टी में ग्रामीणों के सहयोग से उन्होंने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए हैं।

 

कौन हैं सतेंद्र सिंह भंडारी

सतेंद्र सिंह भंडारी

 

कोटतल्ला प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत सतेंद्र सिंह भंडारी रुद्रप्रयाग जनपद के भटवाड़ी (कोटगी), घोलतीर के रहने वाले हैं। बीएस.सी., एम.ए. और बी.एड. की डिग्री हासिल कर चुके सतेंद्र सिंह भंडारी का उनकी पत्नी अनीता देवी ने हर कदम पर साथ दिया। सतेंद्र सिंह भंडारी नमामि गंगे सहित दर्जनों कार्यक्रमों के सफल संचालन में भी सहयोग करते हैं। इन्हें विभिन्न अवसरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। पर्यावरण संरक्षण के लिए इन्हें अभी तक दो दर्जन से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं। कोटतल्ला प्राथमिक विद्यालय में जो भी अतिथि आते हैं, उनसे वे एक पेड़ जरूर लगवाते हैं। वहीं, विभिन्न महत्वपूर्ण तिथियों पर और शहीदों के नाम पर भी वे पौधरोपण करते हैं।

 

पत्नी अनीता देवी ने हर कदम पर साथ दिया

 

प्रशिक्षण संस्थान और संग्रहालय जैसा नजर आता है विद्यालय परिसर व भवन!

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कोटतल्ला प्राथमिक विद्यालय किसी प्रशिक्षण संस्थान और संग्रहालय जैसा दिखाई देता है। पूरा परिसर फलदार पेड़ों से भरा हुआ है। स्कूल की दीवारों पर वीरों, वीरांगनाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र लगाए गए हैं। कक्षाओं में प्रवेश करते ही वहाँ का नजारा अभिभूत कर देता है। कतारबद्ध मेजें, कुर्सी और दीवारों पर की गई पेंटिंग बहुत कुछ कह देती हैं। 

 

 

अनूठी पहल – विद्यालय में प्रवेश लेने वाले नौनिहालों से कराते हैं पौधरोपण!

 

सतेंद्र सिंह भंडारी ने विद्यालय में एक अनूठी पहल की है। वे कक्षा 1 और 2 में प्रवेश लेने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों से नामांकन लेने के दिन स्कूल परिसर में पौधरोपण करवाते हैं। पौधों का नाम भी उन्हें लगाने वाले छात्र-छात्राओं के नाम पर रखा जाता है। प्रवेश लेने वाले बच्चे को ही इन पौधों की देखभाल करनी होती है। इससे बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

 

विद्यालय परिसर में लगाए फलदार पेड़, नर्सरी में उपलब्ध हैं 15 हजार से अधिक पौधे!

 

सतेंद्र सिंह भंडारी के प्रयासों से विद्यालय परिसर में फलदार पेड़ लगाए गए। इनमें अमरूद, संतरा सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। कई पेड़ तो फल भी देने लगे हैं ये फल विद्यालय में ही छात्रों को वितरित किए जाते हैं। वहीं, दूसरी ओर ग्रामीणों द्वारा विद्यालय को दान में दी गई करीब तीन नाली भूमि पर नर्सरी विकसित कर विभिन्न प्रजाति के बीज रोपे गए हैं फ़िलहाल, विद्यालय की नर्सरी में 16 हजार पौधे उपलब्ध हैं, जिनकी देखभाल ग्रामीणों के साथ ही स्कूली बच्चे कर रहे हैं। नर्सरी में बांज, संतरा, नींबू, पदम, रीठा, हेडा, बहेड़ा, मोरपंखी, अमरूद सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे हैं। इन पौधों को स्थानीय ग्रामीण और अन्य लोग अपने-अपने गाँवों में पौधरोपण के लिए ले जाते हैं।

 

आपदा से क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन का करवाया पुनर्निर्माण, पेयजल व शौचालय की सुविधा है मौजूद!

 

सतेंद्र सिंह भंडारी की तैनाती कोटतल्ला प्राथमिक विद्यालय में वर्ष 2013 में हुई थी। उस समय विद्यालय आपदा की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया था इसके बाद विद्यालय का संचालन गाँव के पंचायत भवन के एक कमरे में हो रहा था। पांच कक्षाओं का एक कमरे में संचालन होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। ऐसे में, सतेंद्र सिंह भंडारी ने विद्यालय के पुनर्निर्माण के लिए गुहार लगाई। आखिरकार, आज विद्यालय का नया भवन बनकर तैयार हो गया है, जिसमें सुचारु रूप से पठन-पाठन चल रहा है। विद्यालय में शौचालय से लेकर पेयजल तक की व्यवस्था है।

 

विद्यालय में व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ सिखाए जाते हैं स्वरोजगार के गुर!

 

राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कोटतल्ला बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है और स्वरोजगार के गुर सिखाए जाते हैं। स्कूल में बच्चों को संगीत की शिक्षा भी दी जाती है। स्थानीय हस्त-शिल्पियों के माध्यम से बच्चों को रिंगाल से टोकरी, कलमदान आदि बनाना सिखाया जा रहा है। वहीं मालू के पत्तों से पत्तल, कटोरी इत्यादि बनाने का प्रशिक्षण भी समय-समय पर दिया जाता है। हर महीने काफ़ी लोग इस विद्यालय को देखने आते हैं

सतेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि यदि हमें अपना जीवन सुरक्षित रखना है तो पढ़ाई के साथ-साथ हमें पेड़-पौधों की रक्षा भी करनी होगी। जब पेड़ होंगे, तभी जीवन का अस्तित्व बचा रहेगा। पेड़ रहेंगे तो वन सुरक्षित रहेंगे, वन रहेंगे तो जैव विविधता रहेगी, जैव विविधता रहेगी तो जल, जंगल, जमीन, जलवायु और जन सुरक्षित रहेंगे।

 

संपादन – मनोज झा 


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Written by Sanjay Chauhan

संजय चौहान, उत्तराखंड राज्य के सीमांत जनपद चमोली के पीपलकोटी के निवासी हैं। ये विगत 16 बरसों से पत्रकारिता के क्षेत्र में है। पत्रकारिता के लिए इन्हें 2016 का उमेश डोभाल पत्रकारिता पुरस्कार (सोशल मीडिया) सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। उत्तराखंड में जनसरोकारों की पत्रकारिता के ये मजबूत स्तम्भ हैं। पत्रकारिता, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान में डिग्री हासिल करने वाले संजय चौहान नें लेखनी के जरिए कई गुमनाम प्रतिभाओं को पहचान दिलाई है। ग्राउंड जीरो से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और जनसरोकारों पर इनके द्वारा लिखे जाने वाले आर्टिकल का हर किसी को इंतजार रहता है। पहाड़ में रहकर इन्होंने पत्रकारिता को नयी पहचान दिलाई है। ये वर्तमान में फ़्री लांस जर्नलिस्ट्स के रूप में कार्य करते हैं।

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