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1200 गाँवों में जाकर लगभग 4 लाख ग़रीब युवाओं को रोज़गार दिला चुकी है यह संस्था!


यह लेख आईसीआईसीआई फाउंडेशन के साथ साझेदारी में प्रकाशित किया गया है

सांगली जिले के बुधगाँव के रहने वाले महेश पाटिल की आँखों में आज भी उस दिन को याद करते हुए आँसू आ जाते हैं, जब उनकी बच्ची ने अपने पाँचवें जन्मदिन के लिए केक की फ़रमाइश की थी और वे उसे भी पूरा नहीं कर पाए थे। पर इस साल अपनी गुड़िया के जन्मदिन पर महेश उसके लिए सिर्फ़ केक ही नहीं लाए, बल्कि एक शानदार पार्टी भी दी।

“मेरे माता-पिता खेतों में मज़दूरी करते थे। मैंने किसी तरह बारहवीं तक की पढ़ाई तो की, पर दर-दर भटकने के बाद भी कोई नौकरी नहीं ढूंढ पाया। इसलिए किसी तरह खेतों में मज़दूरी करके मैं अपने परिवार का पेट पालने लगा। पर दिहाड़ी मज़दूरी रोज़ कहाँ मिलती है। कभी महीने में 12 दिन तो कभी सिर्फ़ 10 दिन! ऐसे में मैं, जो काम मिले वह करता, कभी चीनी की बोरियां ढोता, तो कभी किसी फ़ैक्टरी में काम कर लेता, पर दो बच्चे होने के बाद, दिन के सिर्फ़ 200-300 रूपये की कमाई से गुजारा मुश्किल होता जा रहा था,” महेश अपने पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक हो उठते हैं।

पर फिर ऐसा क्या हुआ जो उनकी दुनिया ही बदल गयी?

महेश पाटिल

“नरसोबा वाड़ी में आईसीआईसीआई अकादमी फॉर स्किल्स (आईएएस) खुला था। मुझे पता चला कि वह लोग मुफ़्त में कई कामों की ट्रेनिंग देते हैं। मैं वहां पहुँच गया और सबकी सलाह से कृषि-यंत्रो की रिपेयरिंग और सर्विसिंग का काम सीखा। साथ में मुझे अपना बिज़नेस शुरू करने की भी ट्रेनिंग मिली थी यहाँ। तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद अकादमी वालों ने ही मुझे सांगली की एक कंपनी में 15000 प्रति माह की पगार पर नौकरी दिला दी। यहीं से हमारी किस्मत बदल गयी,” महेश ने बताया।

महेश ने इस ट्रेनिंग में जो कुछ सीखा था, उससे अपना जीवन ही बदल दिया। उन्होंने इतनी लगन से काम किया कि उन्हें डेढ़ साल में ही तरक्की मिल गयी। साथ ही उन्होंने अपनी पत्नी के लिए एक किराने की दुकान लगवा दी, जिससे वह हर महीने 3-4 हज़ार रूपये कमा लेती है।

“इस बार मुझे प्रोमोशन के बाद कोल्हापुर भेज दिया गया है। आप यकीन करेंगे कि कभी दिहाड़ी मज़दूरी करने वाला एक आदमी अब इस नए कोल्हापुर ब्रांच का मैनेजर होगा?” महेश मुस्कुराते हुए पूछते हैं!

भारत के हर हिस्से के दूर-दराज़ इलाकों में जाकर अपने कुल 24 प्रशिक्षण केंद्रों और 12 अलग-अलग विषयों की ट्रेनिंग के ज़रिए आईसीआईसीआई अकादमी, महेश जैसे क़रीब 1.14 लाख से भी ज़्यादा ज़रूरतमंद लोगों को अब तक नया जीवन दे चुकी है, जिनमें 46,000 महिलाएं भी शामिल हैं।

अकादमी ने हाल ही में 22 फ़रवरी को उत्तराखंड के देहरादून में अपना 25वां केंद्र खोला है, जिसके ज़रिए वह और युवाओं को प्रशिक्षित कर, साल 2020 तक 1.5 लाख युवाओं को रोज़गार देने के अपने लक्ष्य को पूरा करना चाहती है।

 

कैसे हुई शुरुआत –

‘आईसीआईसीआई अकादमी फॉर स्किल्स’, ‘आईसीआईसीआई फाउंडेशन फॉर इंक्लूसिव ग्रोथ’ का हिस्सा है, जो अब तक देश के 1200 से भी ज़्यादा गाँवों में पहुँचकर 3.87 लाख लोगों को अपने विविध कार्यक्रमों के ज़रिए प्रशिक्षण देकर, रोज़गार हासिल करने में मदद कर चुकी है। साल 2020 तक यह आंकड़ा 5 लाख तक पहुंचाने के लिए आईसीआईसीआई  फाउंडेशन पूरी कोशिश में जुटा हुआ है।

“पिछले 15-20 सालों में भारत में काम करते हुए हमने आईसीआईसीआई में ही यह महसूस किया कि जब कोई कंपनी प्रगति करती है, तो उसे बहुत से कर्मचारियों की ज़रूरत पड़ती है। और हमारे देश में ऐसे प्रगतिशील उद्योगो की कोई कमी नहीं है। फिर भी यहाँ बेरोज़गारी इतना बड़ा मुद्दा क्यूँ है?

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ध्यान देने पर हमारी समझ में आया कि दरअसल हर किसी को प्रोफेशनल लोग चाहिए होते है। इसीलिए कई बार काबिलियत होने पर भी सिर्फ़ प्रशिक्षण की कमी की वजह से युवाओं को नौकरी नहीं मिल पाती और दूसरी तरफ़ ज़रूरत होने पर भी अक्सर काम देने वाले उन्हीं युवाओं की तलाश में रहते हैं, जिन्हें काम के तरीके और व्यापार के सलीके आते हो। ऐसे में हमने सोचा, क्यूँ न हम इन दोनों के बीच का सेतु बने,” आईसीआईसीआई फाउंडेशन फॉर इंक्लूसिव ग्रोथ के प्रेसिडेंट सौरभ सिंह ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए बताया।

देहरादून के इस केंद्र को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के अंतर्गत उत्तराखंड सरकार के स्किल डेवलपमेंट एंड एजुकेशन विभाग के साथ मिलकर चलाया जाएगा।

सौरभ ने आगे देहरादून केंद्र के बारे में बताते हुए कहा कि देहरादून में उत्तराखंड के दूर-दराज़ इलाके से भी बच्चे पढ़ने आते हैं। साथ ही यह एक प्रगतिशील राज्य है और यहाँ कई उद्योगों का विस्तार हो रहा है, जहाँ रोज़गार के विकल्प हमेशा मौजूद होते हैं, इसलिए संस्था ने देहरादून को अपना अगला पड़ाव चुना।

संस्था ने कुल 1300 ऐसे छोटे- बड़े उद्योगों को अपना इंडस्ट्री पार्टनर बनाया है, जहाँ प्रशिक्षण के बाद इन युवाओं को नौकरी दी जाती है।

इससे पहले के सभी 24 प्रशिक्षण केंद्रों में अब तक 100% योग्य विद्यार्थियों को नौकरी दी जा चुकी है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

देहरादून केंद्र में होगा यह सब –

1. 12 हफ़्तों की इस ट्रेनिंग में यह प्रशिक्षण केंद्र, युवाओं को चीज़े बेचने की कला (selling skills) और दफ़्तर-प्रबंधन (office administration) का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ शिष्टाचार से पेश आने, सलीके से तैयार होने और बातचीत करने के अलावा अंग्रेज़ी का भी प्रशिक्षण देगी।

2.  ज़रूरतमंद लोगों को अकादमी केवल निःशुल्क प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि वर्दी, खाना और कोर्स के लिए लगने वाली सभी किताबें मुफ़्त में प्रदान करेगी।

3. इस कोर्स में भर्ती होने के लिए मापदंड है – 1) आप आर्थिक तौर पर ज़रूरतमंद हो तथा, 2) आप कम-से-कम दसवीं पास हो।

4. केंद्र ने फ़िलहाल दफ़्तर-प्रबंधन के कोर्स को ‘टैली सोलुशंस’ के साथ मिलकर तैयार किया है। इसके अलावा भी संस्था के 10 और नोलेज पार्टनर हैं।

5. बिक्री-कला सिखाने के कोर्स को संस्था के विशेषज्ञों द्वारा ही तैयार किया गया है।

6. कोर्स के अंत में परीक्षा होगी, और सफ़ल छात्रों को सर्टिफ़िकेट भी दिया जायेगा।

“इस सत्र में हम करीब 550 छात्रों को प्रशिक्षित करेंगे। छात्रों के चयन के लिए केवल दो ही मापदंड हैं कि वे आर्थिक रूप से ज़रूरतमंद हो और दसवीं पास हो, इसके अलावा हमारे कोई भी मापदंड नहीं हैं। ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर हम इन छात्रों को लेंगे। आवेदन देने वाले बाकी सभी छात्रों के भी नाम लिख लिए जायेंगे और तीन महीने बाद होने वाले अगले बैच में उन्हें ले लिया जायेगा। इस तरह यहाँ से कोई भी, कभी भी निराश नहीं लौटेगा,” सौरभ सिंह ने बताया।

एक बेहतर भारत की ओर –

देहरादून की इस अकादमी में अभी से कई युवाओं के आवेदन आने लगे हैं। पहले ही सत्र में भर्ती हो चुकी रेखा के पिता सब्जी बेच कर किसी तरह अपने परिवार का पेट पालते हैं। ऐसे में रेखा ने बड़ी मेहनत से ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी की, पर उसे अब तक कोई नौकरी नहीं मिली। पर अब यहाँ रेखा टैली सीख रही है और 3 महीने के भीतर इस कोर्स को करके नौकरी पाने के ख्याल से ही वह रोमांचित हो उठती है।

यदि आप भी ऐसे किसी व्यक्ति को जानते हैं, जो काबिल तो है, पर इस तरह के प्रशिक्षण लेने में आर्थिक रूप से अक्षम है, तो उन्हें ‘आईसीआईसीआई अकादमी फॉर स्किल्स’ के बारे में ज़रूर बताएं। आइए साथ मिलकर देश के युवाओं को सही दिशा दिखाए, ताकि वे आगे चलकर भारत को एक बेहतर भविष्य दे सके!

 


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Written by मानबी कटोच

मानबी बच्चर कटोच एक पूर्व अभियंता है तथा विप्रो और फ्रांकफिंन जैसी कंपनियो के साथ काम कर चुकी है. मानबी को बचपन से ही लिखने का शौक था और अब ये शौक ही उनका जीवन बन गया है. मानबी के निजी ब्लॉग्स पढ़ने के लिए उन्हे ट्विटर पर फॉलो करे @manabi5

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