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सैनिक पिता को श्रद्धांजलि : भारतीय सेना की कुछ असाधारण और अविश्वसनीय तस्वीरें!

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

र्जुन मेनन के पिता भारतीय सेना के एविएशन विभाग के साथ एक हेलीकॉप्टर पायलट थे और वे अर्जुन के लिए किसी हीरो से कम नहीं थे।

“कल्पना करें कि एक दम ख़राब मौसम में आपको एक भारी मेटल की मशीन को उड़ाना है,” अर्जुन ने उन पहाड़ों, जंगलों और रेगिस्तानों का उदाहरण देते हुए कहा, जहाँ उनके पिता ने कॉम्बैट और पैराट्रूपर का प्रशिक्षण लिया था।

“बचपन से ही ‘जीआई जो’ मेरा पसंदीदा कार्टून हुआ करता था। लेकिन मैं हमेशा सोचता था कि मेरे पापा हर दिन ये सब करते हैं, वो भी इसे कोई बड़ी बात समझे बिना,” अर्जुन ने द बेटर इंडिया से कहा।

सोलह साल पहले, अर्जुन ने एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में अपने हीरो को खो दिया।

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

अर्जुन अब एक ट्रेवल फोटोग्राफर हैं और वे हमेशा से अपने पिता के सम्मान में कुछ करना चाहते थे। सिर्फ़ इतना ही नहीं बल्कि वे भारतीय सेना के अफ़सरों की ज़िंदगी को आम लोगों तक लाना चाहते थे – वे जिन भी परिस्थितियों से गुज़रते हैं, जैसे इलाकों में रहते हैं और इस दौरान वे जो भी मुश्किलें झेलते हैं, पर फिर भी हर चुनौती को पार कर वे जीतते हैं।

“भारतीय सेना दुनिया के सबसे ज्यादा बहुमुखी सशस्त्र बलों में से एक है और मैं अपने प्रोजेक्ट के द्वारा यह बताना चाहता था कि आख़िर वो क्या बातें हैं, जो भारतीय सेना में शामिल हर एक पुरुष, महिलाओं या फिर मशीनों को असाधारण बनाती हैं,” अर्जुन ने बताया।

इस प्रकार, भारतीय सेना पर आधारित यह फोटो सीरीज़, ‘द एक्स्ट्राऑर्डिनरी’ (असाधारण) बनी।

कॉन्डे नास्ट ट्रैवलर से बात करते हुए, अर्जुन ने कहा कि शुरू में सेना के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को लेकर निश्चिन्त नहीं थे। उनके मन में संदेह था।

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

“मैं इसमें उनको गलत नहीं मानता। क्योंकि मैं बस एक फोटोग्राफर था जो उनसे कहा रहा था कि मुझे फोटो लेने के लिए वे अपने गुप्त ठिकानों और बेस पर भेज दें। उन्हें इस प्रोजेक्ट पर बात करने में कुछ समय लगा लेकिन उन्होंने मुझे उत्तर दिया। फिर, अपने इस प्रोजेक्ट पर और विचार-विमर्श करने के लिए मैं कई बार दिल्ली गया। फिर जब उन्हें लग गया कि मैं वाकई भारतीय सेना के लिए कुछ करना चाहता हूँ तो उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया और हर संभव तरीके से मेरी मदद की। पैराट्रूपिंग सेशन से लेकर हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ड्रिल की व्यवस्था करने तक, उन्होंने इस प्रोजेक्ट में उतनी ही सिद्दत दिखाई जितनी मुझमें थी।”

अर्जुन ने इस प्रोजेक्ट पर अकेले काम किया और इसकी फंडिंग भी उन्होंने खुद की। इस प्रोजेक्ट के लिए अर्जुन ने भारतीय सेना के अफ़सरों और सैनिकों की बहुत जीवंत फोटो खींचीं हैं।

इस फोटो-सीरीज़ की कुछ तस्वीरें आप आगे देख सकते हैं।

1. हम आम नागरिकों के लिए भले ही आर्मी का जीवन बहुत आकर्षक हो लेकिन उनकी ज़िंदगी के ऐसे बहुत से पहलू हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं। एक आर्मी अफ़सर के लिए हमारे दिल में गर्व और सम्मान की भावना आती है, लेकिन हम सब उनकी नौकरी के बारे में कितने अच्छे तरीके से जानते हैं?

अर्जुन ने अपनी इस फोटो-सीरीज़ के जरिये इन सब सवालों का जबाव तलाशने की कोशिश की है।

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

2. “कहीं न कहीं मैं इस बात पर ध्यान लाना चाहता था कि आर्मी में इन लोगों के लिए ज़िंदगी क्या है। मैं ऐसा कुछ बनाना चाहता था जो कि आर्मी के दिल और उर्जा का प्रतिनिधित्व करे,” अर्जुन ने कहा।

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

3. “भारतीय सेना में हमेशा ही अफ़सर और सैनिकों की भर्ती में कमी रही है। यहाँ तक कि, साल 2018 तक, भारतीय सेना में 52,000 से अधिक सैनिकों की कमी है। सेना में अकेले अधिकारियों के 7600 से अधिक पद खाली पड़े हैं,” अर्जुन ने बताया और उन्होंने आगे कहा कि मुझे उम्मीद है कि मैं अपने लेंस के माध्यम से लोगों को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकूँ।

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

4. सीएन ट्रैवलर से बात करते हुए अर्जुन ने कहा कि वह इन सब जगहों के नाम नहीं बता सकते लेकिन उन्होंने भारत के पहाड़ी, रेगिस्तान और बहुत दूरगामी इलाकों में शूटिंग की है। सही स्थान का चयन करने के लिए टीम ने बहुत मेहनत की ताकि सभी तस्वीरें ठीक आयें।

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

5. रेस्क्यू ड्रिल और छद्म/झूठी युद्ध स्थितियों को फिर से बनाना आसान नहीं था, और इस सबमें सबसे ज्यादा दबाव अर्जुन पर था। लेकिन उन्होंने ठान रखा था कि हर मुश्किल को पार कर उन्हें एक दम मुग्ध कर देने वाली तस्वीरें खींचनी हैं।

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

6. इस फोटो को कैसे क्लिक किया गया, यह याद करते हुए इस बेहतरीन फोटोग्राफर ने बताया, “हमारे पास हवा में तीन हेलीकॉप्टर थे, और जमीन पर दो दर्जन से अधिक सैनिक और अधिकारी थे। इसलिए, गलती करना तो कोई विकल्प ही नहीं था। लेकिन वहां चारों तरफ बहुत धूल और हवा थी और इसलिए मैं संदेह में था कि शूट एकदम परफेक्ट हुआ है या नहीं। जब मैंने तस्वीरें देखना शुरू किया तो मेरे हाथ कांप रहे थे क्योंकि कोई भी फोटो एकदम सही नहीं आई थी।

क्या मैंने एक अच्छे अवसर को यूँ ही गंवा दिया? लेकिन फिर, मुझे यह तस्वीर मिली जो बिल्कुल मेरे मन मुताबिक आई थी।”

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

7. मानव और तकनीकी उपकरण, दोनों ही फ़ोर्स इस फोटो-सीरीज़ का हिस्सा हैं।

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

8. और कभी, कुछ हल्के और प्यारे लम्हे भी….

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

9. अपने प्रोजेक्ट को इस वक़्त लॉन्च करने पर अर्जुन ने कहा, “जैसा कि हम गणतंत्र दिवस के करीब आ रहे हैं और मुझे लगा कि इस खास प्रोजेक्ट को लॉन्च करने का इससे अच्छा समय और कोई नहीं हो सकता। यह प्रोजेक्ट बड़े पैमाने पर लोगों के लिए है और इससे बेहतर समय और कोई नहीं हो सकता था।”

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

10. अर्जुन मेनन की यह फोटो सीरीज़ आपको आर्मी अफ़सरों के जीवन की एक झलक दिखाती है और सही मायनों में उनकी उर्जा और भावना को दर्शाया गया है।

फोटो साभार: अर्जुन मेनन

आप अर्जुन मेनन की वेबसाइट यहाँ देख सकते हैं।


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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