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आई लाइनर, काजल, लिपस्टिक में इस्तेमाल हो रहे हैं ये 7 हानिकारक केमिकल्स!

ये सिंथेटिक केमिकल कई गंभीर बिमारियों का कारण बन सकते हैं। जानिए कैसे कर सकते हैं बचाव!

क चुटकी फाउंडेशन, परफेक्ट आई लाइनर और जरा-सी लिपस्टिक लगाते ही हमारा चेहरा खिल उठता है। पर हम यह खिला हुआ चेहरा किस कीमत पर पा रहे हैं, उसे समझना बेहद ज़रूरी है।

कील-मुहांसे, झुर्रियां, त्वचा का ढलना तो इनकी देन हैं ही, पर इनकी वजह से हमें अस्थमा और डायबिटीज जैसी भयानक बिमारियों का भी ख़तरा हो सकता है। ये सभी कुछ हमारे मेक-अप में इस्तेमाल होने वाले केमिकल उत्पादों की वजह से है। फ़र्ज़ कीजिये कि किसी प्रोग्राम या परफॉरमेंस के लिए यही मेकअप आप अपने बच्चे को भी लगा रहे हो, तब?

ज़्यादातर मेक-अप प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद हानिकारक होते हैं। हमारी त्वचा के ज़रिये वे हमारे शरीर में आ जाते हैं और फिर इसे नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं। इस तरह से ये प्रोडक्ट्स जितना हमारी सुंदरता को निखारते नहीं हैं, उससे ज्यादा हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। पर समय और प्रसंग की मांग के अनुसार हम मेकअप को पूरी तरह नकार भी नहीं सकते। इसी चुनौती से लड़ने के लिए  ‘सोनेचुरल्स’ और ‘डिस्गाइज़’ सुरक्षित और केमिकल फ्री प्रोडक्ट्स बना रही हैं।

आइये आज जानते हैं ऐसे ही कुछ कॉमन चीजों के बारे में जो हमारे मेकअप प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होती ही हैं ताकि हम अगली बार कॉस्मेटिक्स खरीदते समय सही चयन कर सकें! साथ ही जानिये उन प्रोडक्ट्स के बारे में जो इनका विकल्प बन सकतीं हैं।

1. थलैट (Phthalate): 

कंस्ट्रक्शन मटेरियल और पेस्टिसाइड जैसे उत्पादों को बनाने में इस्तेमाल होने वाला थलैट, ब्यूटी और हेल्थकेयर इंडस्ट्री में भी अपनी जगह बना चुका है। इसका इस्तेमाल नेल पॉलिश की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने के लिए और हेयर स्प्रे में होता है ताकि वह सूखे नहीं।

सबसे ज्यादा बुरा यह है कि यह इंडस्ट्रियल केमिकल, अस्थमा, टाइप 2 डायबिटीज और मेटाबोलिक बिमारियों से भी संबंधित है। स्वास्थ्य पर इसका असर जल्दी नहीं दिखता पर थलैट के लगातार संपर्क में रहना हमारे लिए बहुत हानिकारक है।

2. ऑक्सीबेन्जोन (Oxybenzone):

इस हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल सनस्क्रीन में किया जाता है ताकि आप सूरज की हानिकारक किरणों से बच सकें। इसे हॉर्मोनल समस्याओं से जोड़ा गया है। लेकिन फूलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला यह केमिकल कोरल रीफ के लिए बहुत हानिकारक है।

जरा सोचिये, लोग जब बीच पर होते हैं तब सबसे ज़्यादा सनस्क्रीम का इस्तेमाल करते हैं और यह समुद्री जीव-जंतुओं के लिए सही नहीं है। पर अब आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि अब आपको ऑक्सीबेन्जोन फ्री प्रोडक्ट्स के बहुत से विकल्प मिल जायेंगे।

आप यहां पर सनस्क्रीन के विकल्प देख सकते हैं जो कि पूरी तरह से वीगन है!

3. लेड (Lead):
सच तो यही है कि लेड को सीधा लिपस्टिक में इस्तेमाल नहीं किया जाता है। लाल, ऑरेंज, और ब्राउन शेड की लिपस्टिक बनाने के लिए सिंथैटिक आयरन ऑक्साइड का इस्तेमाल करते हैं। और आयरन ऑक्साइड को प्राकृतिक साधनों से निकाला जाता है तो ‘लेड’ जैसी अशुद्धियाँ आपके प्रोडक्ट्स में चली जाती हैं।

आप यदि लिपस्टिक हटा भी दें तब भी इस मेटल के हानिकारक तत्व हमारी त्वचा पर रह जाते हैं। लेड और दूसरे आर्सेनिक कंपाउंड्स को कलरैन्ट्स की तरह इस्तेमाल करने पर भारतीय नियम 145 के तहत रोक लगायी गयी है। और जिस सिंथेटिक कलरिंग को अनुमति मिली है, वह भी सिर्फ 20 पार्ट प्रति मिलियन के हिसाब से इस्तेमाल होती है।

पर लिपस्टिक रेग्युलर तौर पर इस्तेमाल होना वाला प्रोडक्ट्स है तो ऐसे में, यह हानिकारक हो सकता है। क्योंकि इससे लगातार मेटल हमारे शरीर में जा रहा है तो लेड पोइजनिंग होने का खतरा रहता है।

पर अपने स्वास्थ्य को खतरे में क्यों डालना जब आप एकदम प्राकृतिक और केमिकल फ्री लिपस्टिक खरीद सकते हैं।

4. बेन्ज़ल्कोनियम क्लोराइड (Bnzalkonium chloride):
यह सबसे ज़्यादा आई-लाइनर और मस्कारा में इस्तेमाल होने वाला केमिकल है और इसकी वजह से रेटिना काफी प्रभावित हो सकती है। यह केमिकल सबसे ज़्यादा आँखों की एपिथेलियल सैल को हानि पहुंचता है। ये सैल कॉर्निया के सरफेस पर होती हैं और इसे धूल, पानी, बैक्टीरिया आदि से बचाती हैं।
आई मेक अप खरीदने से पहले यह देख लें कि उस प्रोडक्ट में यह केमिकल न हो!

5. सोडियम लॉरेथ सल्फेट (Sodium Laureth Sulfate):
हमारी त्वचा पर हम जो भी लगाते हैं, वह 60 प्रतिशत तक अब्जॉर्ब कर लेती है और इस तरह यह केमिकल हमारी ब्लडलाइन में भी चले जाते हैं। सोडियम लॉरेथ सल्फेट का उपयोग टूथपेस्ट, शैंपू और चेहरे की क्रीम के निर्माण में किया जाता है। यह एक फॉमिंग एजेंट है और बहुत बार त्वचा पर जलन का कारण बन सकता है।

6. ट्राईक्लोसन (Triclosan):

साबुन, टूथपेस्ट, और कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट्स में आम तौर पर यह केमिकल आपको मिल ही जायेगा। पर यह केमिकल हमारी एंडोक्राइन के लिए हानिकारक है और इसका दूसरा हानिकारक फैक्ट है लिपोफिलिक। मतलब कि यह हमारी फैट सैल में जमा हो जाता है और कभी-कभी हमारे यूरिन, ब्लड और ब्रैस्ट मिल्क में भी इसके सैंपल मिल जाते हैं।

इसलिए कोशिश करें कि इन केमिकल युक्त साबुन की जगह हैंडमेड साबुन खरीदें जो कि आपकी त्वचा के लिए बिल्कुल सुरक्षित है!

7. पैराबेन्स (Parabens):

कॉस्मेटिक्स और मेक-अप आइटम्स में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला केमिकल है पैराबेन्स। इसे प्रोडक्ट्स की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वैसे तो यह कहा जाता है कि इससे बहुत ही कम हानि हमारे एंडोक्राइन सिस्टम को होती है, लेकिन यह रिस्क भी क्यों लेना?

मिथाइलपैराबेन, एक तरह का पैराबेन है जिसे मेकअप प्रोडक्ट्स में एंटीफंगल एजेंट की तरह इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यह सूर्य की यूवीबी किरणों के साथ रियेक्ट करके त्वचा की उम्र बढ़ाने का काम करता है और यह डीएनए के लिए भी हानिकारक है।

हमेशा यह सुनिश्चित करें कि मेक-अप आइटम्स आपका अच्छा करने से ज़्यादा कहीं नुकसान तो नहीं कर रहे। इसलिए अपनी त्वचा और पर्यावरण को बचाने के लिए प्राकृतिक और जैविक उत्पादों का इस्तेमाल करें।

मूल लेख: तन्वी पटेल

संपादन – मानबी कटोच 


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