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अपनी दरियादिली के कारण जयललिता बन गयी लाखो लोगो की चहेती ‘अम्मा’!

ऐसा क्या था जो जयललिता को और राजनेताओं से अलग करता था? लोग इस कदर इनके दीवाने क्यूँ थे? कारण था उनका गरीबो के लिए उदार भाव।

हते है सत्ता की दौड़ में कोई किसी का नहीं होता। वोट और नोट की राजनीति करते नेता किसी के सगे नहीं होते। पर इन स्वार्थी राजनेताओं की भीड़ में कई बार ऐसे नेता भी उभर कर आते है जो गरीबो के हित में काम करना चाहते है। और फिर चाहे दुनियां उसके बारे में कुछ भी कहती रहे, पर जिन लोगो के लिए वो नेता काम करता है उन लोगो के लिए वो मसीहा बन जाता है।

ऐसी ही एक मसीहा थी, तमिल नाडू की पूर्व मुख्यमंत्री, स्वर्गीय जयललिता!

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पर ऐसा क्या था जो जयललिता को और राजनेताओं से अलग करता था? लोग इस कदर इनके दीवाने क्यूँ थे? कारण था उनका गरीबो के लिए उदार भाव। अपनी सत्ता काल में जयललिता ने हर उस योजना को लागू किया जो गरीबो के हित में थे। चाहे वो पांच रूपये में भर पेट खाना उपलब्ध कराना हो या छात्रों को लैपटॉप बाँटना, जयललिता ने गरीबो की ज़रूरत की हर उस चीज़ का ध्यान रखा जिनकी वजह से उनकी ज़िन्दगी आसान होती चली गयी और इस तरह वो जयललिता से लाखों लोगो की अम्मा बन गयी।

आईये एक नज़र डाले अम्मा की शुरू की गयी ऐसी कुछ योजनाओं पर जिनकी वजह से तमिल नाडू की जनता आज भी उनकी शुक्रगुजार है-

1. अम्मा उनवागम (अम्मा कैंटीन)

अम्मा उनवागम याने कि अम्मा भोजनालय की शुरुआत जयललिता सरकार द्वारा 2013 में की गयी थी। शुरुआत में जयललिता की इस योजना के सफल होने में कई लोगो ने आशंकाएं जताई और वजह थी यहाँ का बहुत ही सस्ता खाना। दरअसल अम्मा उन गरीब लोगो के लिए भर पेट खाना उपलब्ध कराना चाहती थी जिन्हें महंगाई के कारण अक्सर एक वक़्त का खाना भी नसीब नहीं होता। और इसलिए अम्मा के खोले गए इन भोजनालयों में केवल रु.1 में इडली, रु. 3 में  दही चावल या लेमन राइस या दाल और रोटी और रु. 5 में भर पेट सांभर चावल उपलब्ध कराया गया। ज्यादातर लोगो को लगता था कि इतना सस्ता खाना देने के लिए सरकार को जो खर्च उठाना पड़ेगा, वो वह ज्यादा दिन तक नहीं उठा पाएंगे और अम्मा के ये भोजनालय जल्द ही बंद हो जायेंगे पर आज अम्मा उनवागम की करीब 200 शाखाएं है, जो बहुत ही कामयाब है।

2. अम्मा कुदिनीर थिटम (अम्मा मिनरल वाटर)

अम्मा कुदिनीर थिटम याने ‘अम्मा पीने का पानी’ पुरे तमिल नाडू में खासा चर्चित है। जहाँ बाहर आम मिनरल वाटर की कीमत रु.20 थी, यहाँ तक कि रेल नीर की भी कीमत रु. 15 थी, वहीँ अम्मा ने आम आदमी के लिए केवल रु. 10 में वही पानी मुहैया कराया। सितम्बर 2013 में सी एन अन्नादुरइ की 105वी जन्मतिथि पर जयललिता ने इस योजना की शुरुआत की थी।

3. अम्मा सीमेंट स्कीम

रोटी और पानी के बाद जो सबसे ज़रूरी चीज़ होती है वो है सर पर एक छत। और अम्मा की इस स्कीम का मकसद यही था। जनवरी 2015 में शुरू की गयी इस स्कीम में गरीब तथा मध्यम वर्गीय लोगो को सरकार की तरफ से लगभग आधे दामो पर सीमेंट लेने की छूट दी गयी। जहाँ बाज़ार में एक बोरी सीमेंट की कीमत रु. 370 या रु. 390 के करीब थी वहीँ अम्मा सीमेंट की कीमत महज़ रु. 170 ही थी। इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए लोगो को अपने घर के नक़्शे की एक प्रति देनी होती है। एक आदमी को नया घर बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा 750 सीमेंट की बोरियां तथा घर की मरम्मत करने के लिए 100 बोरियां लेने का अधिकार है।

4. अम्मा मुरुदगम (अम्मा फार्मेसी)

अम्मा मुरुदगम अम्मा द्वारा शुरू किये दवाईयों की दुकानों को कहा जाता है। इसी साल के जून महीने में शुरू किये गए दवाईयों की इन दुकानों पर दवाईयां बाकी दुकानों के मुकाबले 15% कम दाम पर मिलती है। केवल चेन्नई में ही इसकी 100 से अधिक शाखाएं है और इसके अलावा कड्डलोर, कांचीपुरम, इरोड, मदुरइ, सलेम, सिवागंगई और विरुद्धनगर में भी इसकी शाखाएं है। आमतौर पर सिर्फ दो वक़्त की रोटी कमा लेने वालो के लिए बीमार पड़ने पर महँगी दवाईयां खरीदना नामुमकिन सा हो जाता है। ऐसे लोगो के लिए अम्मा की ये पहल एक वरदान से कम न थी।

5. अम्मा बीज (अम्मा सीड्स)

भारत एक कृषि प्रधान देश है। पर किसानो की तरक्की पर यहाँ ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता। पर अम्मा के राज में चलायी गयी एक योजना से साफ़ ज़ाहिर होता है कि उनकी सोच कितनी गहरी थी। यह योजना थी किसानो को बहुत ही कम दरो पर प्रमाणित तथा उच्च दर्जे के बीज उपलब्ध कराना। जनवरी 2016 में इस योजना की शुरुआत की गयी थी और इससे किसानो को काफी राहत भी मिली।

इसके अलावा जयललिता ने हर उस बात का ख्याल रखा जो एक माँ अपने बच्चे के लिए रखती है। किसानो के लिए मध्यस्त रहित बाज़ार, जहाँ से आम लोग भी कम कीमत पर ताज़ी सब्जियां खरीद पाते है, जयललिता की सरकार के दौरान ही शुरू की गयी। गरीबो के लिए 20 रूपये किलो चावल, 14 रूपये किलो नमक, अम्मा मोबाइल, अम्मा मिक्सर ग्राइंडर और पंखा, किन्नरों के लिए मासिक पेंशन, छात्रों के लिए लैपटॉप, साइकिल तथा किताबे, गर्भवती स्त्रियों के लिए नवजात शिशु का सारा सामान और अम्मा सिनेमा जहाँ आप सिर्फ 25 रूपये में अपनी मनपसंद फिल्म का आनंद ले सकते है।

जयललिता द्वारा गरीबो के हित में किये गए कामो की फेहरिस्त इससे भी लम्बी है और यही वो कारण है जिसने जयललिता को पुरे तमिल नाडू ही नहीं पुरे देश की ‘अम्मा’ बना दिया था। ये फेहरिस्त मानो ख़त्म ही नहीं होती नज़र आ रही थी कि अचानक सोमवार की रात अम्मा के निधन से अच्छाई की इस फेहरिस्त पर पूर्णविराम सा लग गया।

जयललिता के निधन से लाखो लोग अपने आप को अनाथ महसूस कर रहे है। पर वे ये भी जानते है कि उनकी अम्मा हमारे बीच न सही पर हमारे दिलों में हमेशा रहेगी।

 

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